उदयपुर में स्वदेशी ‘गगन’ तकनीक से इंडिगो के Airbus A320 की पहली सफल लैंडिंग, भारत ने रचा इतिहास

Last Updated:July 01, 2026, 13:36 IST
India’s 1st Commercial Jet Land Via Satellite Navigation: उदयपुर के डबोक हवाई अड्डे पर देश में पहली बार स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली ‘गगन’ की मदद से इंडिगो के बड़े एयरबस ए320 विमान की सफल लैंडिंग कराई गई. डीजीसीए की निगरानी में हुए इस परीक्षण से भारत ने नागरिक उड्डयन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इसरो और एएआई द्वारा विकसित ‘गगन’ तकनीक से अब खराब मौसम और कम दृश्यता में भी विमानों का संचालन सुरक्षित होगा तथा छोटे एयरपोर्ट्स पर बड़े विमान उतारना आसान हो जाएगा.
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उदयपुर में स्वदेशी ‘गगन’ तकनीक से बड़े कमर्शियल विमान की पहली सफल लैंडिंग ( AI Image )
उदयपुर: भारतीय नागरिक उड्डयन और तकनीक के क्षेत्र में राजस्थान के उदयपुर से एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. देश में पहली बार किसी बड़े वाणिज्यिक (कमर्शियल) विमान की लैंडिंग पूरी तरह से भारत की अपनी स्वदेशी उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली ‘गगन’ (GAGAN) की मदद से सफलतापूर्वक कराई गई है. विमानन क्षेत्र की इस अभूतपूर्व उपलब्धि का साक्षी उदयपुर का डबोक स्थित महाराणा प्रताप हवाई अड्डा बना है. इस सफल परीक्षण ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है जिनके पास अपनी खुद की इतनी सटीक और उन्नत सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक मौजूद है.
यह ऐतिहासिक परीक्षण नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी में 27 जून को आयोजित किया गया. इस परीक्षण के लिए इंडिगो एयरलाइंस के विशालकाय ‘एयरबस ए320’ विमान का उपयोग किया गया था. विमान ने ‘गगन’ प्रणाली से प्राप्त संकेतों का उपयोग करते हुए रनवे पर बेहद सुरक्षित और सटीक लैंडिंग की. विमानन विशेषज्ञों के अनुसार इससे पहले इस प्रणाली का परीक्षण केवल छोटे एटीआर (ATR) विमानों पर ही किया गया था. यह पहला मौका है जब इतने बड़े और भारी कमर्शियल पैसेंजर विमान को इस तकनीक के सहारे सफलता के साथ जमीन पर उतारा गया है.
इसरो और एएआई की जुगलबंदी से तैयार हुआ ‘गगन’‘गगन’ यानी जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) प्रणाली को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. यह प्रणाली अंतरिक्ष में मौजूद जीपीएस संकेतों में आने वाली मामूली त्रुटियों और कमियों को सुधारने का काम करती है. इसके बाद यह विमानों के कॉकपिट में बेहद सटीक, सुरक्षित और भरोसेमंद मार्गदर्शन (नेविगेशन डेटा) प्रदान करती है. इस स्वदेशी तकनीक के आने से अब विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर भारत की निर्भरता काफी कम हो जाएगी.
खराब मौसम में मददगार और छोटे शहरों के लिए गेमचेंजरइस स्वदेशी तकनीक के सफल होने से भविष्य में देश के विमानन सेक्टर का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा. पारंपरिक उपकरण आधारित लैंडिंग प्रणाली (ILS) की तुलना में ‘गगन’ तकनीक के लिए जमीन पर बहुत ज्यादा महंगे और जटिल उपकरण लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है. इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि देश के छोटे शहरों और कस्बों में बने हवाई अड्डों पर भी भारी विमानों को बेहद सुरक्षा के साथ उतारा जा सकेगा. इसके साथ ही घने कोहरे, खराब मौसम या बेहद कम दृश्यता (लो विजिबिलिटी) की स्थिति में भी विमानों का संचालन बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से किया जा सकेगा, जिससे उड़ानों के रद्द होने या मार्ग बदलने की समस्या से मुक्ति मिलेगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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