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Rajasthan News | Pali News

Last Updated:July 01, 2026, 16:22 IST

Rajasthan Thakur Gopal Das Ji Fort: राजस्थान का इतिहास अपने आप में इतना समृद्ध है कि यहां की मिट्टी के कण-कण से राजपूती शौर्य और स्थापत्य कला की खुशबू आती है. आज हम आपको लेकर चल रहे हैं पाली जिले के एक ऐसे ही ऐतिहासिक और जादुई ठिकाने पर जो आज पूरी दुनिया के पर्यटकों के लिए पहली पसंद बन चुका है.हम बात कर रहे हैं ‘घाणेराव फोर्ट’ की.

<br />साल 1606 में मेड़तिया राठौड़ शासक ठाकुर गोपाल दास जी द्वारा स्थापित किया गया यह किला आज भी अपने उसी पुराने वैभव, अनोखी बनावट और बेमिसाल नक्काशी के साथ सीना ताने खड़ा है. आखिर क्या है इस किले की बनावट की खासियत कि सात समंदर पार से विदेशी मेहमान भी खिंचे चले आते हैं.

<br />अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा यह किला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ की सीमाओं की रक्षा करने वाले राजपूत योद्धाओं के शौर्य, त्याग और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है. सदियों का इतिहास समेटे यह फोर्ट आज भी ठाकुर साहब की उसी अनमोल विरासत को पूरी शानो-शौकत के साथ बयां करता है. इस किले के निर्माण में पारंपरिक राजपूती स्थापत्य शैली का बेहतरीन उपयोग किया गया है.किले की मजबूत और ऊंची दीवारें, विशाल बुर्ज और सुरक्षा के लिहाज से बनाए गए गुप्त मार्ग इसकी सैन्य सूझबूझ को दर्शाते हैं.

<br />घाणेराव फोर्ट के भीतर कदम रखते ही आप इतिहास के एक सुनहरे दौर में पहुंच जाते हैं. किले के कमरों और दीवान-ए-खास की दीवारों पर बने पारंपरिक भित्ति चित्र (फ्रेस्को पेंटिंग्स) आज भी अपने मूल रंगों में चमक रहे हैं.इन चित्रों में राजपूती ठाट-बाठ, शिकार के दृश्य, लोक कथाएं और देवी-देवताओं के सुंदर चित्रण देखने को मिलते हैं. शाही साज-सज्जा और विंटेज फर्नीचर के साथ इस इंटीरियर को देखकर विदेशी मेहमान मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.

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आज घाणेराव फोर्ट केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व पर्यटन के नक्शे पर एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है. हेरिटेज लवर्स, इतिहासकार और फोटोग्राफर्स के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है.सात समंदर पार (यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों) से आने वाले सैलानियों के लिए यहां का शांत माहौल, ग्रामीण संस्कृति का अनुभव और राजसी मेहमाननवाजी एक लाइफटाइम एक्सपीरियंस बन जाती है, जिसे वे अपने कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाते.

<br />पर्यटन के लिहाज से घाणेराव फोर्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे एक आलीशान हेरिटेज होटल/होमस्टे के रूप में संवारा गया है. यहां आने वाले पर्यटकों को सिर्फ किला घूमने का ही मौका नहीं मिलता, बल्कि वे उन्हीं शाही कमरों में ठहर सकते हैं जहां कभी राजा-महाराजा रहा करते थे.

<br />पारंपरिक राजस्थानी पोशाक में स्वागत, लोक संगीत की धुनें, कालबेलिया नृत्य और चूलहे पर बना पारंपरिक राजस्थानी भोजन (दाल-बाटी-चूरमा) मेहमानों को मारवाड़ की संस्कृति से गहराई से जोड़ देता है. साथ ही यह आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों का काफी खास अंदाज में राजस्थानी कल्चर के साथ जो स्वागत होता है वह काफी यादगार रहता है.

<br />घाणेराव फोर्ट सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और एडवेंचर प्रेमियों के लिए भी परफेक्ट स्पॉट है.अरावली के जंगलों के मुहाने पर स्थित होने के कारण यहां से ‘कुम्भलगढ़ वाइल्डलाइफ सेंचुरी’ बेहद नजदीक है. सैलानी यहां आकर जंगल सफारी, ट्रेकिंग और बर्ड वॉचिंग का लुत्फ उठा सकते हैं.किले की छत से दिखने वाला सूर्यास्त (Sunset View) और चारों तरफ फैली हरियाली का नजारा इस ऐतिहासिक यात्रा को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना देता है.

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