हरभजन सिंह के 5 बड़े रिकॉर्ड…जिनका टूटना है मुश्किल, आठवें नंबर पर लगातार दो शतक जड़ने वाले दुनिया के हैं पहले बल्लेबाज

Last Updated:July 03, 2026, 06:16 IST
Harbhajan Singh 5 unbreakable cricket records: कोलकाता के ईडन गार्डन्स की वो शाम, जब एक 20 साल के युवा ने कंगारुओं के गुरूर को घुटनों पर ला दिया था, क्रिकेट इतिहास के सबसे सुनहरे पन्नों में दर्ज है. पगड़ी धारी उस फिरकी गेंदबाज की ‘दूसरा’ के सामने दुनिया के सबसे धाकड़ बल्लेबाज भी क्रीज पर नाचते नजर आते थे. बात हो रही है भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विनर्स में से एक, हरभजन सिंह की, जिन्हें प्यार से पूरी दुनिया ‘भज्जी’ या ‘टर्बनेटर’ कहती है.1998 से 2015 तक, लगभग दो दशकों तक हरभजन सिंह ने अपनी उंगलियों के जादू से विरोधी टीम के बल्लेबाजों को बांध कर रखा.
मार्च 2001 का वो ऐतिहासिक हफ्ता कोई भी क्रिकेट प्रेमी नहीं भूल सकता. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट के पहले दिन हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने वो कारनामा किया जो उनसे पहले कोई भी भारतीय गेंदबाज नहीं कर सका था. उन्होंने लगातार तीन गेंदों पर तीन ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों को पवेलियन का रास्ता दिखाकर भारत के टेस्ट इतिहास की पहली हैट्रिक चटकाई. इस हैट्रिक ने न सिर्फ मैच का पासा पलटा, बल्कि भारतीय क्रिकेट को एक नया आत्मविश्वास भी दिया.
हरभजन सिंह की इस हैट्रिक की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने किसी पुछल्ले बल्लेबाजों को नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों को आउट किया था. उन्होंने पहले रिकी पोंटिंग को एलबीडब्ल्यू आउट किया, फिर अगली ही गेंद पर एडम गिलक्रिस्ट को भी उसी अंदाज में फंसाया. हैट्रिक बॉल पर उन्होंने शेन वॉर्न को सदगोपन रमेश के हाथों कैच आउट कराकर इतिहास रच दिया. इस महारिकॉर्ड के बाद सालों तक कोई भारतीय इसे दोहरा नहीं पाया. उनके बाद केवल 2006 में इरफान पठान और 2019 में जसप्रीत बुमराह ही टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए हैट्रिक ले पाए हैं.
जुलाई 2011 में जब भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर थी, तब हरभजन सिंह के करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ा. डोमिनिका टेस्ट के दौरान उन्होंने जैसे ही वेस्टइंडीज के बल्लेबाज कार्लटन बॉघ को आउट किया, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने 400 विकेट पूरे कर लिए. भज्जी भारत की तरफ से इस जादुई आंकड़े को छूने वाले सबसे युवा गेंदबाज बन गए. उस समय उनकी उम्र महज 31 साल और 4 दिन थी। इतनी कम उम्र में इस मुकाम पर पहुंचना उनकी निरंतरता और प्रतिभा का सबसे बड़ा प्रमाण था.
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जब सबसे कम उम्र में 400 टेस्ट विकेट लेने के विश्व रिकॉर्ड की बात आती है, तो हरभजन सिंह का नाम दुनिया के महानतम गेंदबाजों की कतार में सबसे ऊपर नजर आता है. पूरे टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में केवल श्रीलंका के महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ही ऐसे गेंदबाज रहे हैं, जिन्होंने हरभजन से कम उम्र में यह मुकाम हासिल किया था. मुरलीधरन ने 29 साल 273 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था. भज्जी का यह रिकॉर्ड आज भी भारतीय क्रिकेट में सुरक्षित है.
हरभजन सिंह अपने शानदार करियर में 103 टेस्ट मैच खेले और 32.46 की औसत से कुल 417 विकेट चटकाए. वह भारत के टेस्ट इतिहास में 400 विकेट का आंकड़ा पार करने वाले महज चौथे गेंदबाज बने थे. उनसे आगे केवल अनिल कुंबले (619 विकेट), कपिल देव (434 विकेट) और रविचंद्रन अश्विन (427 विकेट) जैसे महान खिलाड़ी ही मौजूद रहे हैं. इन दिग्गजों के बीच हरभजन की मौजूदगी यह बताती है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट की सफलता की नींव में कितना बड़ा योगदान दिया है.
हरभजन सिंह जब अपनी लय में होते थे, तो अकेले दम पर पूरी विपक्षी टीम को समेटने का माद्दा रखते थे. उनके करियर का सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एक मैच में 217 रन देकर 15 विकेट लेना रहा. यह न केवल उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा किए गए सबसे बेहतरीन और घातक गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है. इस मैच में विरोधी टीम का कोई भी बल्लेबाज उनकी फिरकी को पढ़ ही नहीं पाया था.
हरभजन सिंह का जादू सिर्फ टेस्ट क्रिकेट तक सीमित नहीं था. उन्होंने वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. 1998 से 2015 के बीच उन्होंने कुल 365 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने 32.59 की बेहतरीन औसत के साथ कुल 707 विकेट अपने नाम किए. यह आंकड़ा उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है, जिसके दम पर वह हर फॉर्मेट में कप्तानों के सबसे भरोसेमंद हथियार बने रहे.
अगर हरभजन के इन 707 अंतरराष्ट्रीय विकेटों को अलग-अलग करके देखा जाए, तो उन्होंने टेस्ट मैचों में 417 विकेट, एकदिवसीय (ODI) मैचों में 265 विकेट और टी-20 अंतरराष्ट्रीय में 25 विकेट चटकाए. इस विशाल आंकड़े के साथ वह सभी प्रारूपों को मिलाकर भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उनसे आगे सिर्फ भारत के महानतम लेग स्पिनर अनिल कुंबले हैं, जिनके नाम 953 अंतरराष्ट्रीय विकेट दर्ज हैं. इन दोनों की जोड़ी ने लंबे समय तक भारतीय स्पिन गेंदबाजी के सुनहरे दौर का नेतृत्व किया.
हरभजन सिंह को दुनिया एक बेहतरीन गेंदबाज के रूप में जानती है, लेकिन साल 2010 में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई घरेलू टेस्ट सीरीज में भज्जी ने बल्ले से वो कमाल किया जो क्रिकेट इतिहास में कभी नहीं हुआ था. वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में नंबर 8 पर बल्लेबाजी करते हुए लगातार दो मैचों में दो शतक जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए. संकट के समय आकर खेली गई इन पारियों ने उन्हें एक ऑलराउंडर के रूप में स्थापित कर दिया.
न्यूजीलैंड के खिलाफ उन दोनों ही मैचों में भारतीय टीम एक समय बेहद मुश्किल परिस्थिति में फंसी हुई थी. हरभजन सिंह ने न सिर्फ निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर पारी को संभाला, बल्कि ताबड़तोड़ अंदाज में शतक ठोक कर मैच को पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया. उनकी इन शानदार शतकीय पारियों की बदौलत भारत ने वे दोनों मैच ड्रॉ कराए. गेंदबाजी के साथ-साथ बल्ले से इस अद्भूत और ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए हरभजन सिंह को उस सीरीज में ‘मैन ऑफ द सीरीज’ के खिताब से नवाजा गया.



