Rajasthan

नागौर में विकास की रफ्तार तेज! 45.30 करोड़ से बनेगा तीसरा फ्लाईओवर, खत्म होगा रेलवे फाटक का जाम

Last Updated:July 03, 2026, 06:06 IST

Nagaur News: नागौर शहर को डीडवाना बाइपास स्थित रेलवे फाटक एलसी-60 पर तीसरे फ्लाईओवर की बड़ी सौगात मिली है. सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस परियोजना के लिए 45.30 करोड़ रुपये के बजट को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दे दी है. इस 750 मीटर लंबे फ्लाईओवर के बनने से रोजाना करीब 7 हजार वाहन चालकों को जाम से मुक्ति मिलेगी और उनका समय बचेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए दोनों ओर सर्विस रोड और नीचे अंडरब्रिज भी बनाया जाएगा.

नागौर वासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है कि मानासर और बीकानेर रोड के बाद अब डीडवाना बाइपास स्थित रेलवे फाटक एलसी-60 पर शहर का तीसरा फ्लाईओवर बनने जा रहा है, जिसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है. इस मंजूरी के साथ ही निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है, जो आने वाले समय में शहर को भारी ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाकर यहाँ की यातायात व्यवस्था को सुगम और आधुनिक बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगा.

सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस फ्लाईओवर परियोजना के लिए कुल 45.30 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है, जिसमें से 33.17 करोड़ रुपए मुख्य फ्लाईओवर निर्माण पर, 9.93 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति के लिए और 2.20 करोड़ रुपए बिजली, पानी जैसी यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों पर खर्च किए जाएंगे. विभाग ने धरातल पर निर्माण की प्रारंभिक तैयारियां तेज कर दी हैं और उम्मीद है कि जुलाई माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा, जिसके लिए जमीन अधिग्रहण के काम को समय पर पूरा करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष कमेटी का गठन भी किया जा चुका है.

डीडवाना रेलवे फाटक वर्तमान में नागौर शहर के सबसे व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग में से एक है, जो प्रतिदिन 8 से 10 बार बंद होता है और इसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं. इस व्यस्त मार्ग से रोजाना करीब 5 से 7 हजार वाहन गुजरते हैं, जिन्हें फाटक बंद होने के दौरान 10 से 15 मिनट तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है. इस दैनिक जाम के कारण स्थानीय लोगों और राहगीरों का न केवल कीमती समय बर्बाद होता है बल्कि ईंधन की भी काफी खपत होती है, जिससे पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रहती है.

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750 मीटर लंबे इस आधुनिक फ्लाईओवर के निर्माण के बाद वाहन चालकों को रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में भी रुकना नहीं पड़ेगा और वे बिना किसी बाधा के सीधे व सुगम आवागमन कर सकेंगे. इससे प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों का सामूहिक रूप से घंटों का समय बचेगा और उन्हें रेलवे क्रॉसिंग के लंबे जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी. इसके अलावा, फाटक पर वाहनों के न रुकने से ईंधन की भारी बचत होगी और प्रदूषण के स्तर में भी उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे शहर के भीतर और बाहर आने-जाने वाले सभी लोगों को एक तेज, सुरक्षित और बेहद सुविधाजनक यातायात का लाभ मिलने लगेगा.

फ्लाईओवर की डिजाइन को भी विभाग द्वारा अंतिम मंजूरी मिल चुकी है, जिसके तहत इसकी स्पाइन और पिलर की संरचना को तकनीकी रूप से स्वीकृत कर दिया गया है ताकि निर्माण कार्य मजबूत और विश्वस्तरीय हो. अब भूमि अधिग्रहण, बिजली-पानी की लाइनों को शिफ्ट करने और टेंडर प्रक्रिया की अंतिम औपचारिकताओं के पूरा होते ही धरातल पर निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि ये सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं इसी तरह समय पर पूरी होती रहीं, तो परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर आसानी से पूरा कर लिया जाएगा, जिससे स्थानीय जनता को जल्द से जल्द इस आधुनिक और सुगम मार्ग का लाभ मिल सकेगा.

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत फ्लाईओवर के दोनों ओर 5-5 मीटर चौड़ी सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा, ताकि स्थानीय दुकानों और रिहायशी इलाकों का यातायात बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलता रहे. इसके साथ ही रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में भी स्थानीय निवासियों की दैनिक आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए फ्लाईओवर के नीचे एक विशेष अंडरब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा. यह दोहरी यातायात व्यवस्था आसपास के मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जो मुख्य हाईवे के ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना स्थानीय यातायात को अलग से सुगम और सुरक्षित बनाएगी.

इस फ्लाईओवर के निर्माण से जेएलएन जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक व कृषि कॉलेज, मॉडल एवं केंद्रीय विद्यालय सहित जिला परिवहन कार्यालय, रीको औद्योगिक क्षेत्र, हाउसिंग बोर्ड और कृषि अनुसंधान केंद्र जैसी कई महत्वपूर्ण संस्थाओं तक पहुँच पहले की तुलना में बेहद आसान, सुरक्षित और तेज हो जाएगी. इसके साथ ही बाल कल्याण समिति, आबकारी थाना, लवकुश वाटिका, प्रस्तावित कोर्ट, सचिवालय और अहिछत्रपुर कॉलोनी की तरफ आने-जाने वाले लोगों को भी रोज़ाना के ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी. इन सभी प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक और आवासीय क्षेत्रों की डायरेक्ट कनेक्टिविटी सुधरने से न केवल आम जनजीवन सुगम होगा, बल्कि नागौर शहर के बुनियादी विकास और यहाँ की यातायात व्यवस्था को भी एक नई गति मिलेगी.

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