Rajasthan

Ajab-Gajab: पिता की चिट्ठियों से 146 साल पुराने पोस्टकार्ड तक… बीकानेर के शख्स के पास है गजब का संग्रह

बीकानेर. मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जहां चिट्ठी-पत्री की परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, वहीं बीकानेर के संग्रहकर्ता भारत भूषण गुप्ता ने डाक इतिहास की अनमोल धरोहर को आज भी सहेजकर रखा है. उनके पास वर्ष 1879 से लेकर वर्तमान समय तक के सैकड़ों पोस्टकार्डों का दुर्लभ संग्रह मौजूद हैं. इन पोस्टकार्डों के माध्यम से भारत की डाक व्यवस्था, संचार प्रणाली और विभिन्न ऐतिहासिक दौर की झलक साफ दिखाई देती है. उनका यह अनूठा संग्रह डाक इतिहास, विरासत और स्मृतियों को सहेजने का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है.

भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि भारत में वर्ष 1879 से पोस्टकार्ड का प्रचलन शुरू हुआ था. उस समय देश में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के बाद ब्रिटिश शासन का दौर था और महारानी विक्टोरिया का प्रभाव था. उनके संग्रह में उस समय के पोस्टकार्ड आज भी सुरक्षित हैं. इसके अलावा किंग एडवर्ड, किंग जॉर्ज पंचम और किंग जॉर्ज षष्ठम के शासनकाल में जारी किए गए पोस्टकार्ड भी उनके संग्रह की शोभा बढ़ाते हैं. आजादी के बाद जारी हुए विभिन्न मूल्य वर्ग के पोस्टकार्ड भी उन्होंने बड़ी मेहनत से संजोकर रखे हैं.

तीन पैसे से लेकर 50 पैसे तक के 50 से अधिक हैं पोस्टकार्ड

उन्होंने बताया कि उनके संग्रह में तीन पैसे, पांच पैसे, छह पैसे, दस पैसे, पंद्रह पैसे, बीस पैसे, पच्चीस पैसे और पचास पैसे मूल्य वाले 50 से अधिक प्रकार के पोस्टकार्ड मौजूद हैं. समय के साथ इनकी कीमत और स्वरूप बदलते गए, लेकिन इनकी ऐतिहासिक महत्ता आज भी बरकरार है. उनके अनुसार हर पोस्टकार्ड अपने समय की एक अलग कहानी बयां करता है. भारत भूषण गुप्ता के संग्रह में कई ऐसे पोस्टकार्ड भी हैं, जो बेहद दुर्लभ माने जाते हैं. इनमें प्रतियोगिता पोस्टकार्ड विशेष आकर्षण का केंद्र है. यह पोस्टकार्ड दो रुपये का होता था और आज आसानी से देखने को नहीं मिलता. इसके अलावा भारत में पोस्टकार्ड सेवा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर डाक विभाग द्वारा जारी किया गया विशेष स्मारक पोस्टकार्ड भी उनके संग्रह में शामिल है. एयर मेल के माध्यम से भेजे जाने वाले पोस्टकार्ड भी उन्होंने सुरक्षित रखे हैं, जो उस दौर की डाक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं.

सहेज कर रखे हुए हैं पिता के हाथ से लिखे पोस्टकार्ड

अजमेर के रहने वाले भारत भूषण गुप्ता बताते हैं कि एक समय ऐसा था, जब पोस्टकार्ड ही आम लोगों के बीच संवाद का सबसे सस्ता और सबसे लोकप्रिय माध्यम था. लोग अपने सुख-दुख, पारिवारिक समाचार, शुभकामनाएं और आवश्यक संदेश पोस्टकार्ड के जरिए ही भेजते थे. उस समय हर गांव और शहर में डाकिए का इंतजार किया जाता था. आज भी उनके पास उनके पिता के हाथ से लिखे कई पोस्टकार्ड सुरक्षित हैं, जो उनके लिए केवल संग्रह नहीं बल्कि पारिवारिक यादों की अमूल्य धरोहर हैं. उनके संग्रह में मेघदूत पोस्टकार्ड भी विशेष स्थान रखता है. इन पोस्टकार्डों पर सरकारी योजनाओं और निजी संस्थाओं के विज्ञापन प्रकाशित किए जाते थे.

विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है उद्देश्य

यह पोस्टकार्ड कम कीमत में उपलब्ध होते थे और जनजागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम भी बने. इसके अलावा विभिन्न विषयों, अवसरों और विशेष अभियानों से जुड़े कई प्रकार के पोस्टकार्ड भी उन्होंने वर्षों की मेहनत से एकत्र किए हैं. भारत भूषण गुप्ता का कहना है कि आधुनिक तकनीक ने भले ही संचार के साधनों को बदल दिया हो, लेकिन पोस्टकार्ड भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. उनका उद्देश्य इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है, ताकि लोग जान सकें कि कभी एक साधारण-सा पोस्टकार्ड ही लोगों के दिलों को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करता था.

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