5 हजार किसानों का नेटवर्क! खेती को दिया कॉर्पोरेट मॉडल का रूप, सालाना टर्नओवर 45 लाख पार – हिंदी

खेती को दिया कॉर्पोरेट मॉडल का रूप, सालाना टर्नओवर 45 लाख पार
Business Success Story: बिहार में रोहतास को भले ही ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता हो, लेकिन समस्तीपुर के एक किसान ने कृषि विशेषज्ञों के साथ मिलकर धान की खेती का पूरा गणित ही बदल दिया है. जिले के धर्मेंद्र कुमार उपाध्याय ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) के वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेकर ‘सोना चूर्ण नमक’ चावल को एक बड़े ब्रांड में तब्दील कर दिया है. धर्मेंद्र ने कृषि नवाचार केंद्र की मदद से एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) खड़ा किया, जिससे आज लगभग 4,000 से 5,000 किसान जुड़ चुके हैं. खास बात यह है कि धर्मेंद्र खुद किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज देते हैं और पूरी फसल की निगरानी करते हैं. इस बेहतरीन क्वालिटी के कारण आम चावल जहां 40-50 रुपये किलो बिकता है, वहीं इनका ‘सोना चूर्ण’ चावल बाजार में 80 से 90 रुपये प्रति किलो के प्रीमियम दाम पर हाथों-हाथ बिक रहा है. इस अनूठी पहल से जहां सालाना कारोबार 45 लाख रुपये (शुद्ध मुनाफा 10-15 लाख रुपये) तक पहुंच गया है, वहीं दर्जनों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है. पूसा की तकनीक और किसान की लगन ने मिलकर पारंपरिक खेती को एक मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल में बदल दिया है.




