भीलवाड़ा का सबसे रहस्यमयी धार्मिक स्थल! जहां 400 साल से लगातार जल रही धूणी, हर मनोकामना पूरी होने का दावा

भीलवाड़ा. वैसे तो भीलवाड़ा टेक्सटाइल सिटी और मेवाड़ के प्रवेश द्वार के नाम से जाना जाता है, लेकिन आज हम आपको भीलवाड़ा के गुलाबपुरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नामकरण गुलाब बाबा के नाम पर हुआ है. यहां की सबसे खास बात यह है कि गुलाब बाबा की धूणी पिछले 400 वर्षों से निरंतर प्रज्वलित है. भीलवाड़ा जिले का गुलाबपुरा केवल एक कस्बा नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और धार्मिक विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु यहां गुलाब बाबा की धूणी पर माथा टेकने पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इस स्थान का नाम भी महान तपस्वी संत गुलाब बाबा के नाम पर ही पड़ा है. वर्षों पहले उन्होंने यहां कठोर तपस्या की थी और तभी से यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बन गया. समय के साथ यहां बस्ती विकसित हुई और लोग इसे गुलाब बाबा की नगरी, यानी गुलाबपुरा के नाम से पहचानने लगे.
कैसे बने गुलाब बाबा संतस्थानीय निवासी केडी मिश्रा ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि गुलाब बाबा ब्राह्मण परिवार से थे और बचपन में गुलाबपुरा के पास स्थित भिनाय गांव में रहते थे. एक दिन जब वह गाय चराने जा रहे थे, तब उन्होंने अपनी भाभी से उनके लिए खाना बांधने को कहा. उस समय भाभी किसी काम में व्यस्त थीं और खाना तैयार नहीं कर सकीं. इस बात पर गुलाब बाबा नाराज हो गए और जिद करने लगे कि खाना वही बांधें. तब भाभी ने मजाक में कहा कि अगर साधु बन जाओगे तो खाना अपने आप मिल जाएगा.
जब मित्र के साथ घर छोड़कर निकल गए थे बाबायह बात गुलाब बाबा के मन में बैठ गई और उन्होंने साधु बनने की ठान ली. इसके बाद वह अपने एक मित्र के साथ घर छोड़कर निकल पड़े और मसूदा में एक संत के पास पहुंचे. उन्होंने संत से अपना शिष्य बनाने का आग्रह किया. शुरुआत में संत ने उन्हें बच्चा समझकर गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन उनकी जिद और लगन देखकर उन्हें तपस्या करने की अनुमति दे दी. गुलाब बाबा ने करीब 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की. उनकी साधना से प्रसन्न होकर संत ने उन्हें अपने गांव लौटने और वहां धूणी स्थापित करने का आशीर्वाद दिया. इसके बाद वह भिनाय लौटे और वहीं तपस्या करते हुए धूणी स्थापित की. तभी से यह स्थान गुलाब बाबा की नगरी, यानी गुलाबपुरा के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
आज भी जल रही है 400 साल पुरानी धूणीगुलाब बाबा की तपस्या और चमत्कारों की चर्चा धीरे-धीरे दूर-दूर तक फैल गई. लोगों का विश्वास है कि बाबा के आशीर्वाद से अनेक भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हुईं. यही कारण है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान और सुख-समृद्धि की कामना लेकर बाबा की धूणी पर पहुंचते हैं. श्रद्धालु यहां धोक लगाकर परिवार की खुशहाली, व्यापार में उन्नति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं. गुलाब बाबा की धूणी आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. यहां प्रतिदिन सुबह से शाम तक दर्शन करने वालों का तांता लगा रहता है. विशेष अवसरों, अमावस्या, पूर्णिमा और धार्मिक आयोजनों पर हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है गुलाबपुराधूणी पर पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाते हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना बाबा जरूर सुनते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. हर वर्ष यहां भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मेले के दौरान धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, भंडारे और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं. पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह मेला काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं से बाजारों में रौनक बढ़ जाती है.
आज गुलाबपुरा की है सबसे अलग पहचानआज गुलाबपुरा की पहचान केवल एक औद्योगिक और व्यापारिक कस्बे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु गुलाब बाबा की धूणी के दर्शन के साथ क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी रूबरू होते हैं. गुलाब बाबा की कृपा और आशीर्वाद ने ही इस कस्बे को विशेष पहचान दिलाई है. यही वजह है कि गुलाबपुरा का नाम आज पूरे राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में श्रद्धा और आस्था के प्रतीक के रूप में जाना जाता है.



