Rajasthan

गरीबी से जूझे, मगर हार नहीं मानी, पिता-पुत्र ने एक साथ पाई सरकारी नौकरी

Last Updated:July 03, 2026, 11:22 IST

Inspirational Story : सच्ची लगन और कड़ी मेहनत का फल हमेशा मीठा ही होता है. राजस्थान में इस कहावत को पिता-पुत्र की जोड़ी ने चरितार्थ कर दिखाया है. दोनों को एक साथ सरकारी नौकरी मिली है. दोनों गरीबी से जूझे लेकिन हार नहीं मानी और वो मुकाम हासिल कर लिया जिसकी कल्पना हर कोई करता है. पिता पुत्र की सफलता की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणादायक साबित होगी. पूरा मामला कहां का है, कैसे पिता-पुत्र की जोड़ी ने एक साथ सरकारी नौकरी पाई, आइए जानते हैं.
गरीबी से जूझे, मगर हार नहीं मानी, पिता-पुत्र ने एक साथ पाई सरकारी नौकरीZoomJodhpur Latest News : जोधपुर के भोपालगढ़ कस्बे में पिता-पुत्र को एकसाथ मिली सरकारी नौकरी……

जोधपुर. राजस्थान की जोधपुर जिले में भोपालगढ़ नाम से एक कस्बा है. इसी कस्बे के रहने वाले मजदूर रामेश्वर बावरी और बेटे मनीष को एकसाथ सरकारी नौकरी मिली है. राज्य सरकार की ओर से हाल ही में घोषित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती 2025 के फाइनल रिजल्ट में दोनों का एकसाथ चयन हुआ है. एक ही परीक्षा में पिता-पुत्र का चयन होने से ना केवल पूरा परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है. दोनों की सफलता की कहानी लोगों की जुबान पर है.

भोपालगढ़ कस्बे में रहने वाले रामेश्वर बावरी पत्थर तोड़ने का काम करते थे. गरीबी से जूझे लेकिन हार नहीं मानी. उन्होंने अपने बेटों को पढ़ाया. परिवार की जिम्मेदारी निभाई. खुद भी परीक्षा की तैयारी करते रहे और बेटे को भी कठिन परिश्रम के लिए प्रेरित किया. संयोग देखिए कि रामेश्वर बावरी और उनके बेटे मनीष का एक साथ नौकरी में चयन हुआ है.

मजबूत इरादों से पाई मंजिल रामेश्वर बावरी ने यह मुकाम मजबूत इरादों के चलते पाया. घर में गरीबी थी लेकिन हार नहीं मानी. परिवार चलाने के पत्थर तोड़ा लेकिन शिक्षा के महत्व को समझा. कामकाज के बीच नियमित रूप से पढ़ाई की. खुद परीक्षा की तैयारी करते रहे. गरीबी के बावजूद बेटे को परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित किया. सीमित संसाधनों के बीच नियमित अध्ययन पर जोर दिया. तीन बार असफलता मिली लेकिन हौसला नहीं टूटा. चौथे प्रयास में सफलता मिली. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती 2025 में पिता-पुत्र का एकसाथ चयन हो गया. वर्षों की कड़ी मेहनत रंग ले आई.

रामेश्वर बावरी की यह सफलता उन युवाओं के प्रेरणा है जो गरीबी और कठिन परिस्थितियों के चलते अपने सपनों को छोड़ देते हैं. हालात से समझौता कर लेते हैं. रामेश्वर के सफलता साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हो मंजिल जरूर मिलती है. मेहनत और लगन से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.

About the AuthorChaturesh TiwariNews Editor

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