सीकर के पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब गांव में ही होगी पशुओं की जांच, खुलीं 12 नई लैब

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सीकर के पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब गांव में ही होगी पशुओं की जांच
Last Updated:July 03, 2026, 05:04 IST
Sikar News: सीकर जिले के पशुपालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. पशुपालन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 12 पंचायत समितियों में प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाएं शुरू की हैं. अब पशुपालकों को सामान्य जांच के लिए जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा. इन लैब्स में गोबर, रक्त और थनैला जैसी मुख्य जांचें स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेंगी. जिला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा के अनुसार, इससे बीमारियों का समय पर पता चलेगा और पशुओं की मृत्यु दर में कमी आएगी.
सीकर जिले के पशुपालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब उन्हें अपने मवेशियों की सामान्य स्वास्थ्य जांच और टेस्ट करवाने के लिए जिला मुख्यालय के बड़े चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. उन्हें उनके गांवों और कस्बों में ही यह आधुनिक सुविधा मिलने वाली है. पशुपालन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सीकर जिले की 12 पंचायत समितियों में प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाएं (प्राइमरी डायग्नोस्टिक लैब्स) शुरू कर दी हैं. इस बेहतरीन पहल से अब पशुओं की शुरुआती जांच स्थानीय स्तर पर ही बेहद आसानी से संभव हो सकेगी, जिससे सही समय पर बीमारी का पता चल सकेगा और इलाज में होने वाली देरी व खर्च को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
पशुपालन विभाग ने सीकर की 12 पंचायत समिति मुख्यालयों अजीतगढ़, दांतारामगढ़, धोद, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, खंडेला, नेछवा, नीमकाथाना, पलसाना, पाटन, पिपराली और श्रीमाधोपुर में इन आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की है. इन लैब्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रत्येक प्रयोगशाला में एक प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन (Experienced Lab Technician) की नियुक्ति भी कर दी गई है. यह टेक्निशियन पशुओं के खून, गोबर व अन्य जरूरी नमूनों की सटीक जांच कर समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा. विभाग के इस कदम से अब ग्रामीण पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के सटीक इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें अपने क्षेत्र में ही सारी आवश्यक जांच सुविधाएं मिल सकेंगी.
इन नवनिर्मित प्रयोगशालाओं में पशुओं के खून की बारीकी से जांच की जाएगी, जिससे प्रोटोजोआ और अन्य घातक परजीवी संक्रमणों (Parasitic Infections) का तुरंत पता लगाया जा सकेगा. इसके अलावा मवेशियों के गोबर (फीकल) की जांच, दुधारू पशुओं में होने वाले थनैला (मास्टाइटिस) रोग की सटीक पहचान, त्वचा संबंधी परजीवी संक्रमण, कीटोन बॉडी और यूरिया जैसी कई मुख्य और जरूरी जांचें भी स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेंगी. इन एडवांस जांचों की बदौलत पशुओं में होने वाली गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण (Early Stage) में ही पता लगाना बेहद आसान हो जाएगा, जिससे पशुधन को समय रहते सुरक्षित किया जा सकेगा.
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रोग निदान प्रयोगशाला सीकर के जिला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि यदि पशुओं की बीमारी का समय रहते यानी शुरुआती चरण में ही पता चल जाए, तो गंभीर संक्रमण की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है. प्रारंभिक जांच के आधार पर पशुओं का तुरंत और सटीक उपचार शुरू किया जा सकता है, जिससे पशुओं की मृत्यु दर में भारी कमी आएगी. इसके साथ ही, बीमारी के बढ़ने से पहले ही इलाज हो जाने से पशुपालकों को होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा और क्षेत्र में पशुधन की उत्पादकता व सेहत में बेहतरीन सुधार होगा.
उन्होंने आगे बताया कि यह शानदार पहल केवल सीकर जिले तक ही सीमित नहीं है. प्रदेश सरकार की व्यापक कार्ययोजना के तहत पूरे राजस्थान की 352 पंचायत समितियों में भी इसी प्रकार की प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाएं (Primary Diagnostic Labs) स्थापित की जा रही हैं. इस दूरदर्शी कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और आधुनिक बनाना है, ताकि दूर-दराज के गांवों में रहने वाले पशुपालकों को भी अपने मवेशियों के लिए उच्च गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर इलाज अपने घर के नजदीक ही मिल सके.
जिला रोग निदान प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि जिले की सभी पंचायत समिति स्तर की प्रयोगशालाओं को पूरी तरह सक्रिय कर शुरू कर दिया गया है. इन सभी केंद्रों पर जांच के लिए आवश्यक अत्याधुनिक उपकरण, केमिकल व जांच सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिए गए हैं. इसके साथ ही, व्यवस्था को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए सभी तैनात लैब टेक्निशियनों को आधुनिक जांच प्रक्रियाओं और नई तकनीकों का विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया है. इसका उद्देश्य यही है कि ग्रामीण स्तर पर होने वाला जांच कार्य पूरी उच्च गुणवत्ता, सटीकता और चिकित्सा विभाग के निर्धारित मानकों के अनुसार ही संपन्न किया जा सके.
स्थानीय स्तर पर ही इन अत्याधुनिक जांच सुविधाओं के उपलब्ध होने से पशुपालकों के समय, श्रम और परिवहन पर होने वाले भारी खर्च की सीधी बचत होगी. पहले मवेशियों की छोटी-मोटी और सामान्य जांचों के लिए भी ग्रामीणों को मीलों दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी, जिसके कारण अक्सर रिपोर्ट आने में वक्त लगता था और पशुओं के उपचार में देरी हो जाती थी. अब गांवों के बिल्कुल नजदीक ही त्वरित जांच और प्रारंभिक रोग की पहचान संभव होने से, पशुओं का सही समय पर सटीक इलाज शुरू किया जा सकेगा. पशुपालन विभाग का यह सुधारात्मक कदम न केवल बेजुबान पशुओं की जान बचाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन व्यवसाय को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा.



