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‘पंजाब 95’ अब बनी ‘सतलुज’, सेंसर बोर्ड से 3 साल लंबी जंग, अब बिना किसी कट के OTT पर रिलीज हुई फिल्म

Last Updated:July 04, 2026, 09:32 IST

Satluj Release: करीब साढ़े तीन साल तक सेंसर बोर्ड की मंजूरी का इंतजार करने के बाद आखिरकार दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ दर्शकों तक पहुंच गई है. पहले ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई इस फिल्म को लंबे समय तक रिलीज का रास्ता नहीं मिल सका. खास बात यह है कि फिल्म के नाम के अलावा कोई बदलाव नहीं किया गया है.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में कई फिल्में सेंसर बोर्ड की कैंची का शिकार हो जाती हैं. लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जो हर कट को ठुकराकर अपनी पहचान बनाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म है दिलजीत दोसांझ की ‘पंजाब 95’ है, जो नए नाम के साथ आखिरकार रिलीज हो गई है. फिल्म का नया नाम ‘सतलुज’ है. करीब साढ़े तीन साल तक फिल्म को सीबीएफसी सर्टिफिकेट न मिल पाने के बाद आखिरकार यह फिल्म जी5 पर डिजिटल रिलीज हो गई है. सबसे खास बात ये है कि फिल्म बिना एक भी कट के रिलीज हुई है.

फिल्म के लेखक और निर्देशक हनी त्रेहान ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि उन्हें इस बात का अफसोस जरूर है कि फिल्म सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच सकी. उन्होंने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि दर्शक अब इसे उसी रूप में देख पाएंगे, जैसा इसे बनाया गया था. उन्होंने साफ-साफ कहा कि फिल्म का टाइटल बदलने के अलावा फिल्म में किसी तरह का समझौता नहीं किया गया. फाइल फोटो. 

दिलजीत दोसांझ स्टारर ये फिल्म पिछले कापी समय से सुर्खियों में थी. दरअसल, सीबीएफसी ने फिल्म में 127 कट्स लगाने की मांग कर दी थी. इन कट्स में फिल्म के टाइटल से ‘पंजाब’ हटाने, हीरो का नाम बदलने, भारतीय झंडे के सीन हटाने और पंजाब पुलिस का जिक्र न करने जैसी शर्तें शामिल थीं. निर्देशक हनी त्रेहान ने उस वक्त कहा था कि अगर 127 कट्स लगा दिए गए तो फिल्म से सिर्फ ट्रेलर ही बचेगा. फाइल फोटो. 

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उन्होंने साफ कहा था कि इतने कट्स के बाद ये फिल्म उनकी या दिलजीत की नहीं रहेगी. हालांकि, मेकर्स ने हार नहीं मानी. निर्देशक हनी त्रेहान और दिलजीत दोसांझ ने सेंसर बोर्ड की मांग को ठुकरा दिया. तीन साल से लंबे के इंतजार के बाद आखिरकार फिल्म जी5 पर रिलीज हुई. फाइल फोटो. 

यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित है. फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालड़ा का किरदार निभाया है. फिल्म की कहानी 1980 और 1990 के दशक के पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जब राज्य उग्रवाद, राजनीतिक हिंसा और भय के दौर से गुजर रहा था. उस समय बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के मामलों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था.

फिल्म में दिखाया गया है कि अमृतसर के एक बैंक कर्मचारी जसवंत सिंह खालड़ा किस तरह इन मामलों की सच्चाई सामने लाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए व्यवस्था से लड़ते रहे. इस गंभीर और संवेदनशील फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे मंझे हुए कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. फाइल फोटो. 

फिल्म की रिलीज के मौके पर दिलजीत दोसांझ ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा की शहादत और मानवता के लिए उनके योगदान ने उन्हें इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि जब पहली बार उन्होंने स्क्रिप्ट सुनी तो वह भावुक हो गए थे, क्योंकि यह वास्तविक लोगों के संघर्ष, दर्द और बलिदान पर आधारित कहानी है. फाइल फोटो. 

उनके मुताबिक, ऐसे किरदार निभाने का मौका बार-बार नहीं मिलता और उन्होंने पूरी ईमानदारी व सम्मान के साथ इस भूमिका को निभाने की कोशिश की है. फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं. थिएटर तक नहीं पहुंच पाने के बावजूद ‘सतलुज’ अब OTT के जरिए दर्शकों के बीच है. ऐसे में फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं. फाइल फोटो. 

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