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कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा में भी प्रसूताओं की मौत, 6 दिन में गई 5 महिलाओं की जान

Last Updated:July 11, 2026, 08:34 IST

Rajasthan Caesarean Delivery Death Case: राजस्थान में कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा का महात्मा गांधी अस्पताल प्रसूताओं की मौत को लेकर चर्चा में है. मार्च से जुलाई के बीच यहां नौ महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें छह दिनों में पांच मौतें शामिल हैं. सभी मामलों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ी थी. ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से संक्रमण की आशंका को लेकर सवाल उठ रहे हैं, हालांकि अस्पताल ने इलाज में लापरवाही से इनकार किया है. अस्पताल का कहना है कि अधिकांश मरीज गंभीर हालत में रेफर होकर आते हैं और मौतें चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई हैं.

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सरकारी अस्पताल पर सवाल, भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौतZoomकोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा में भी प्रसूताओं की मौत पर मचा बवाल

भीलवाड़ा. राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं. कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पिछले छह दिनों के दौरान पांच प्रसूताओं की मौत होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई.

सबसे ताजा मामला शुक्रवार का है, जब पोटला निवासी संगीता जीनगर की सिजेरियन डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ गई. उन्हें तत्काल मेडिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी. घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया.

ओटी की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मामला हुआ गंभीर

इससे पहले 5 जुलाई को शिमला गुर्जर, 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को ईशा पांडे और 9 जुलाई को दिव्या की भी प्रसव के बाद मौत हो चुकी है. इन सभी मामलों में परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है. इसी बीच अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से मामला और गंभीर हो गया है. रिपोर्ट सामने आने के बाद संक्रमण की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संक्रमण का इन मौतों से सीधा संबंध है या नहीं.

इन वजहों से महिलाओं की हुई मौत

मार्च से जुलाई 2026 के बीच अब तक 9 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. लगातार बढ़ते मामलों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और संक्रमण नियंत्रण प्रणाली को लेकर चिंता बढ़ा दी है. वहीं अस्पताल प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई. प्रशासन का कहना है कि अधिकांश मरीज अन्य अस्पतालों से पहले से गंभीर अवस्था में रेफर होकर आते हैं. चिकित्सकों के अनुसार प्रसूताओं की मौत पल्मोनरी एंबोलिज्म, एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (PIH) और अन्य प्रसूति संबंधी जटिलताओं के कारण हुई है.

अस्पताल में रोजाना 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन होता है

महात्मा गांधी अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जबकि अस्पताल में नियमित उपयोग के लिए केवल पांच सर्जिकल सेट और आपातकालीन स्थिति के लिए तीन अतिरिक्त सेट उपलब्ध हैं. प्रत्येक सर्जिकल सेट को दोबारा उपयोग में लेने से पहले निर्धारित स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कम से कम तीन घंटे का समय लगता है. लगातार हो रही प्रसूताओं की मौत और ऑपरेशन थिएटर की पॉजिटिव संक्रमण रिपोर्ट के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच में क्या निष्कर्ष निकालता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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