फटने वाला है कैंसर का टाइम बम, साढ़े 3 करोड़ लोग आएंगे चपेट में, क्या करें कि इस जानलेवा बीमारी से बच जाएं

Cancer Prevention: कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे समझने में अब भी दुनिया के वैज्ञानिकों के पसीने छूट रहे हैं. कैंसर से निपटने के लिए कई तरह के इलाज तो आ गए हैं लेकिन कोई भी मुकम्मल इलाज का दावा नहीं कर सकता. इसलिए जब किसी को कैंसर होता है तो यह मान कर चला जाता है कि शायद अब वह कुछ सालों का मेहमान है. इसमें कोई संदेह नहीं कि कुछ लोग कैंसर होने के बाद भी बच जाते हैं लेकिन यह संख्या काफी कम है. इसलिए डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट बेहद डराने वाली है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक यानी आने वाले सिर्फ 25 सालों में साढ़े तीन करोड़ कैंसर के मरीज होंगे. यानी वर्तमान के कैंसर मरीजों की संख्या में 70 प्रतिशत का इजाफा होगा. एक तरह से देखा जाए तो हम कैंसर के टाइम बम पर खड़े हैं और हर साल इसका कुछ हिस्सा फटने वाला क्योंकि हर साल कैंसर के मरीजों की संख्या 5 से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैंसर के इस बढ़ते मामलों को कैसे रोका जाए. सर गंगाराम अस्पताल में कैंसर डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने इसका बहुत सिंपल तरीका बताया.
क्यों है यह रिपोर्ट इतनी अहम डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वर्तमान में हर साल करीब सवा दो करोड़ कैंसर के मामले आते हैं. इनमें से 1 करोड़ मरीजों की मौत हो जाती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है. इसके अलावा यह बीमारी लाखों परिवारों पर भावनात्मक और आर्थिक बोझ भी डाल रही है. डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को हमें गंभीरता से लेनी चाहिए. जिस तरह से कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं वह चिंताजनक है. यह रिपोर्ट इस मायनों में अहम है कि कैंसर के कारण इतने बड़े पैमाने पर हो रहे नुकसान को रोका जा सकता है. कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय, समय रहते पहचान और गुणवत्तापूर्ण इलाज के जरिए लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है. अगर हम अभी से चौकन्ना रहेंगे तो कैंसर के बढ़ रहे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है.
भारत में क्यों बढ़ रहे इतने मामलेकैंसर विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि कैंसर मरीजों की संख्या में बढोतरी के एक नहीं कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण तो हमारी खराब लाइफस्टाइल है. आज हमारा खान-पान और रहन-सहन बहुत खराब हो गया है. दूसरी तरफ हम चाहारदीवारी के अंदर खुद को कैद कर लिए हैं. स्मार्ट फोन आने से बच्चे भी अब बाहर वाले खेल कम ही खेलते हैं. एक तरफ दफ्तर होता है, दूसरी तरफ घर होता है. हमेशा हम बंद कमरों में रहते हैं. लोगों के पास व्यस्तता इतनी है कि एक्सरसाइज करने यहां तक कि बाहर वॉक करने तक का समय नहीं मिलता. इन सबके अलावा पॉल्यूशन भी कैंसर का बड़ा कारण है. आए दिन पृथ्वी का तापमान भी बढ़ रहा है. ग्लोबल वार्मिंग भी कैंसर का कारण है. हालांकि अब भी कैंसर का सटीक कारण हमें नहीं पता लेकिन मोटे तौर पर यही जाना जाता है कि खराब लाइफ स्टाइल, पॉल्यूशन, हानिकारक रसायन और ग्लोबल वार्मिंग इसका कारण हैं.
कैंसर को कैसे रोका जा सकताडॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि भारत में मोटापा और लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियों को रोककर बड़े पैमाने पर कैंसर से बचा जा सकता है. हमें कई तरह के जागरुकता अभियान की जरूरत है. जैसे कई ऐसे होते हैं जिन्हें अगर समय-समय पर कराया जाए तो इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है. महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर होता है. अगर महिलाएं नियमित रूप से मेमोग्राफी टेस्ट कराए तो बहुत हद कैंसर से बच सकती हैं. इसी तरह महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर होता है. इसके लिए पेप स्मीयर टेस्ट होता है. इस टेस्ट से 10 साल पहले ही पता चल जाएगा कि किसी को कैंसर होने वाला है. इसमें डॉक्टर उसी समय सेल्स निकाल देते हैं जिससे बाद में कैंसर नहीं होता. यूरोप और अमेरिका में 70 फीसदी महिलाएं नियमित रूप से ये टेस्ट कराती हैं. इससे वहां की महिलाओं में ये दोनों कैंसर बहुत कम होते हैं. पुरुषों में सबसे ज्यादा तंबाकू जनित कैंसर जैसे कि मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, लंग्स कैंसर और लिवर कैंसर होता है. अगर पुरुष शराब और सिगरेट छोड़ दें तो इनमें से अधिकांश कैंसर से वह बच सकता है.
क्या-क्या टेस्ट कराएं कि कैंसर न होडॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं कि हर महिला को 40 साल की उम्र के बाद हर साल पेप स्मीयर टेस्ट और मेमोग्राफी टेस्ट करानी चाहिए. इसके अलावा हर साल जनरल चैक-अप करानी चाहिए. इसके साथ ही 40 साल के बाद भी पुरुषों को सामान्य चेकअप करानी चाहिए. पुरुषों को 40 साल के बाद डॉक्टरों से टेस्टिस की जांच करानी चाहिए और कोलोनोस्कॉपी करानी चाहिए. इसके साथ ही हर साल कुछ-कुछ सामान्य टेस्ट कराने चाहिए.
क्या होने वाले कैंसर का पता चल सकता हैडॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है. इसमें सिर्फ ब्लड टेस्ट से ही आने वाले समय में कैंसर के जोखिम का पता लगा लिया जाएगा. डॉ. अग्रवाल ने बताया कि 1.5 लाख लोगों पर इसका परीक्षण हुआ है. इसमें ब्लड से सैंपल लेकर कैंसर कारक खराब डीएन को पकड़ा जाता है.ब्रिटेन में 1.42 लाख से अधिक लोगों पर तीन साल तक चले इस ऐतिहासिक ट्रायल के अंतिम नतीजे जारी किए गए. इसके सटीक परिणाम सामने आए हैं जिसका रिजल्ट अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. यह GRAIL टेस्ट है. कैंसर की जल्द पहचान करने की दिशा में ग्रेल टेस्ट मेडिकल साइंस की एक क्रांतिकारी तकनीक है. यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है जो शरीर में लक्षणों के उभरने से पहले ही एक साथ कई तरह के कैंसर का सुराग लगा सकता है.
पारंपरिक कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट जैसे मैमोग्राम या कोलोनोस्कोपी केवल किसी एक विशिष्ट कैंसर का पता लगाते हैं. लेकिन ग्रेल टेस्ट एक मल्टी-कैंसर अर्ली डिटेक्शन (MCED) टेस्ट है, जो एक बार खून निकालने पर 50 से अधिक प्रकार के कैंसर के संकेतों को ढूंढ सकता है. जब शरीर में कैंसर कोशिकाएं बढ़ती हैं तो वे मरते समय अपने डीएनए के छोटे टुकड़े खून में छोड़ती हैं. इन्हें सेल-फ्री डीएनए कहा जाता है. इस टेस्ट में मशीन एआई की मदद से इस डीएनए पर मौजूद खास रासायनिक बदलावों, जिन्हें मिथाइलेशन मार्क्स कहते हैं, की जांच करता है. ये मार्क्स कैंसर का एक अनोखा फिंगरप्रिंट होते हैं, जिससे न केवल कैंसर की मौजूदगी का पता चलता है, बल्कि यह भी 92% से अधिक सटीकता से पता चल जाता है कि कैंसर शरीर के किस अंग से शुरू हुआ है.
कैंसर से बचने के लिए खान-पान क्या होना चाहिएडॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं कि क्या खाएं इससे ज्यादा जरूरी है क्या न खाएं. बाहर की चीजों को जितना कम खाएंगे कैंसर का खतरा उतना कम रहेगा. घर का बना खाना साबुत अनाज से बने चावल, दाल, हरी सब्जियां, फल, सीड्स, ड्राईफ्रूट्स आदि का सेवन भरपूर करें. सीजनल चीजों का सेवन करें. पहले के जमाने में जिस तरह लोग घर में पका हुआ जिस तरह भोजन करते थे, उसी तरह करें. ऋषि मुनियों की तरह एक्सरसाइज, योग और ध्यान करें. तनाव कम करें और खुश रहें. बाहर की पैकेटबंद चीजें, कोल्ड ड्रिक, अन्य बोतलबंद पेय पदार्थ, फास्ट फुड, जंक फूड आदि न खाएं. घर का शुद्ध खाना खाएं.



