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Sirohi News I local18 I दो साल पहले स्वीकृत हुआ था पुल अब तक नहीं बना

Last Updated:July 11, 2026, 17:46 IST

Sirohi News:आबूरोड तहसील के किवरली और पांडुरी गांव के बीच बनास नदी पर प्रस्तावित पुल का निर्माण 2 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है. वर्ष 2024 की बजट घोषणा में 7.90 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिलने के बाद तकनीकी बदलाव के कारण प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर 11.93 करोड़ हो गई, जिसकी नई स्वीकृति अभी लंबित है. पुल नहीं बनने से बारिश के दौरान किवरली समेत आसपास के गांवों के लोगों को आबूरोड शहर पहुंचने के लिए 8 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है.

सिरोही. राज्य सरकार की ओर से जिले के आबूरोड तहसील से गुजरने वाली बनास नदी पर किवरली और पांडुरी गांव के बीच करीब 2 साल पहले पुल निर्माण की स्वीकृति जारी की गई थी, लेकिन 2 साल बाद भी यहां पुल नहीं बन सका है. ऐसे में इस बार भी बारिश में किवरली के ग्रामीणों को 8 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त घूम कर अब शहर के लिए जाना पड़ेगा. वर्ष 2024 की बजट घोषणा में किवरली पांडूरी गांव के बीच बनास नदी पर पुल बनाने के लिए 7.90 करोड़ की स्वीकृति जारी की गई थी.

इसमें पहले इस पुल का निर्माण ओपन फाउंडेशन तकनीक से किया जाना था, लेकिन बाद में विभाग ने पाइल फाउंडेशन तकनीक से पुल निर्माण का संशोधित प्रस्ताव बनाकर भेजा. संशोधित प्रस्ताव की वजह से प्रोजेक्ट की लागत 11.93 करोड़ होने पर अब तक राज्य सरकार से स्वीकृति नहीं मिली है. ऐसे में अब तक यहां नदी पर ब्रिज नहीं बनने से बारिश और मानसून के कुछ महीने बाद तक आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

8 से 10 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है आबूरोड शहरकिवरली के स्थानीय रहवासी पन्नालाल ने बताया कि किवरली गांव से आबूरोड शहर जाने का सबसे कम दूरी वाला रास्ता बनास नदी से पांडुरी गांव से होते हुए आकराभट्टा तक जाता है. इसके अलावा हाइवे से खड़ात गांव होकर या हाइवे से तलहटी होकर जाना पड़ता है. ये दोनो रास्ते करीब 8 से 10 किलामीटर ज्यादा लंबे रास्ते है. बारिश में नदी में पानी आने से ये रास्ता बंद हो जाता है. नदी के दूसरी तरह शहर में आबूरोड का सरकारी अस्पताल, कोर्ट, समेत विभागीय कार्यालय और सदर पुलिस थाना है. ऐसे में इस रास्ते का काफी उपयोग होता है. यहां पुल बनाने से किवरली गांव के अलावा  देलदर, डेरना, मुदरला समेत कई गांवों के फायदा मिलेगा. बारिश से पहले ग्रामीणों ने अपने स्तर पर कच्चा रास्ता बनाकर पाइप डाले है, लेकिन ज्यादा बारिश में ये रास्ता बंद हो जाता है. तेज बारिश में नदी के तेज वेग में किसी ग्रामीण के बहने का भी खतरा बना रहता है.

दुबारा स्वीकृति के बाद बनेगा पुलपीडब्ल्यूडी के एक्सईएन रमेश परिहार के अनुसार पहले पुल का निर्माण ओपन फाउंडेशन तकनीक से होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे पाइल फाउंडेशन तकनीक से बनाने पर विचार किया जा रहा है. ऐसे में बजट बढ़ाने और तकनीकी बदलाव को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. अब स्वीकृति के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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