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Animal Care Tips: मानसून में गाय-भैंस से लेकर बकरी और भेड़ तक की ऐसे करें देखभाल, एक्सपर्ट ने बताए टिप्स

Last Updated:August 06, 2026, 15:00 IST

बरसात का मौसम जहां खेती के लिए लाभदायक होता है, वहीं पशुपालकों के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है. अधिक नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण पशुओं में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सही देखभाल, साफ-सफाई और समय पर उपचार से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है.

बारिश का मौसम किसानों के लिए भले ही खेती-किसानी के लिहाज से राहत लेकर आता है, लेकिन पशुपालकों के लिए यह समय कई सावधानियों की मांग करता है. लगातार बारिश, बढ़ती नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण गाय, भैंस, बकरी और भेड़ों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. यदि इस मौसम में पशुओं की सही देखभाल न की जाए तो दूध उत्पादन में कमी, वजन कम होना और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसे में पशुओं के रहने की जगह की साफ-सफाई, संतुलित आहार और समय पर देखभाल करके उन्हें स्वस्थ रखा जा सकता है.

बरसात के मौसम में पशुशाला में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी तेजी से पनपने लगते हैं. इसके कारण पशुओं में गलघोटू, लंगड़ा बुखार, खुरपका-मुंहपका, थनैला, निमोनिया, दस्त, खुर गलन और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. पशु विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए पशुशाला की नियमित साफ-सफाई, सूखा और हवादार वातावरण, संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं और उत्पादन भी बेहतर बनाए रख सकते हैं.

यदि आप गाय पालन कर रहे हैं, तो बरसात के मौसम में उनकी देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. गायों को हमेशा सूखी और साफ जगह पर बांधें और पशुशाला में बारिश का पानी जमा न होने दें. गीले और गंदे स्थान पर रहने से पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. गायों को हरा चारा हमेशा ताजा और साफ देना चाहिए, जबकि सड़े-गले चारे से पूरी तरह बचना चाहिए. पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं. दूध निकालने से पहले और बाद में थनों की अच्छी तरह सफाई करें, खुरों की नियमित सफाई रखें और समय पर खुरपका-मुंहपका व गलघोटू जैसी बीमारियों के टीके जरूर लगवाएं. पशुओं को संतुलित आहार के साथ मिनरल मिक्सचर और नमक देने से उनकी सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन भी सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है.

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बरसात के मौसम में भैंसों की देखभाल के लिए कुछ खास सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं. भैंसों को लंबे समय तक बारिश में खुले में नहीं छोड़ना चाहिए और पशुशाला में पानी जमा होने से बचाना चाहिए. फर्श पर सूखा बिछावन रखने से नमी कम होती है और संक्रमण का खतरा घटता है. भैंस को साफ पानी से नहलाएं, लेकिन नहलाने के बाद उसके शरीर को अच्छी तरह सूखने दें. थनों की नियमित सफाई करने से थनैला रोग से बचाव किया जा सकता है. पशुओं को हरा चारा, सूखा चारा और दाना संतुलित मात्रा में दें, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे. बारिश के मौसम में मक्खी और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है, इसलिए पशुशाला की नियमित सफाई करें और जरूरत के अनुसार मच्छरदानी या अन्य बचाव उपाय अपनाएं, जिससे भैंसों को बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके.

बरसात के मौसम में बकरी पालन करने वाले किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि नमी और गंदगी के कारण बकरियों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. थोड़ी सी लापरवाही से बकरियों की सेहत खराब हो सकती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. यदि आप बकरी पालन कर रहे हैं, तो बकरियों को हमेशा ऊंचे और सूखे स्थान पर रखें, क्योंकि उन्हें अधिक नमी वाला वातावरण पसंद नहीं होता. बारिश में गीली घास चराने से बचाएं और उन्हें साफ व पौष्टिक चारा दें. समय-समय पर दवा देने के साथ जरूरी टीकाकरण भी करवाएं. यदि बकरी में खांसी, बुखार, दस्त या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. बकरियों के बाड़े में पर्याप्त हवा और रोशनी की व्यवस्था रखने से उन्हें संक्रमण और बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है.

भेड़ पालन किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया है. आज भी पाल समाज के लोग भेड़ पालन पर अधिक जोर दे रहे हैं. वहीं, बरसात के मौसम में भेड़ों की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. भेड़ों की ऊन में नमी लंबे समय तक रहने से त्वचा रोग और परजीवी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बारिश में भीगने के बाद ऊन को अच्छी तरह सुखाएं, भेड़ों को सूखे बाड़े में रखें और खुरों की नियमित सफाई करें. संतुलित आहार और स्वच्छ पानी दें, साथ ही समय पर कृमिनाशक दवा और टीकाकरण कराएं, ताकि भेड़ें स्वस्थ रहें और उनकी ऊन की गुणवत्ता प्रभावित न हो.

पशु विशेषज्ञ एन. के. त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि बरसात के मौसम में पशुओं की छोटी-सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. यदि पशु को बुखार, भूख कम लगना, खांसी, दस्त, लंगड़ापन या दूध उत्पादन में अचानक कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए. समय पर उपचार और उचित देखभाल से पशु स्वस्थ रहते हैं और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है.

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August 06, 2026, 15:00 IST

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