कुत्ता काटने दौड़े तो भूलकर भी न करें ये गलतियां? पाली में बढ़ते Dog Bite Cases के बीच एक्सपर्ट की जरूरी सलाह

Last Updated:August 08, 2026, 11:01 IST
Pali Dog Bite Cases: पाली जिले में डॉग बाइट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और रोजाना 10 से ज्यादा लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. जोधपुर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. संजय कृष्ण व्यास ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा, ब्रीडिंग स्ट्रेस और रेबीज के कारण कुत्ते आक्रामक होते हैं. उन्होंने सलाह दी है कि कुत्ता पीछे पड़ने पर भागने की गलती न करें बल्कि वहीं शांत खड़े हो जाएं. साथ ही, बेवजह उकसाने से बचने और नियमित रेबीज रोधी टीकाकरण करवाने की अपील की है.
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Pali: पाली जिले में पिछले कुछ समय से आवारा और पालतू कुत्तों के काटने (डॉग बाइट) की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. स्थिति यह हो चुकी है कि जिले के अस्पतालों में रोजाना 10 से भी अधिक मरीज एंटी-रेबीज का टीका लगवाने पहुंच रहे हैं. आए दिन राहगीरों और मासूम बच्चों पर कुत्तों के हमले की खबरें स्थानीय निवासियों के लिए खौफ का सबब बनी हुई हैं. इस बीच लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शांत रहने वाले कुत्ते अचानक इतने आक्रामक क्यों हो रहे हैं और ऐसी स्थिति से खुद का बचाव कैसे किया जाए.
पाली में बढ़ते मामलों को देखते हुए जोधपुर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक और डॉग एक्सपर्ट डॉ. संजय कृष्ण व्यास ने इसके पीछे के वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण साझा किए हैं. डॉ. व्यास के अनुसार हर कुत्ता बिना वजह नहीं काटता, बल्कि इसके पीछे निम्नलिखित तीन मुख्य परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं:
पिल्लों की सुरक्षा भावना: ज्यादातर आक्रामक घटनाएं मादा (फीमेल) डॉग्स द्वारा अंजाम दी जाती हैं. जब वे बच्चों को जन्म देती हैं, तो खुद को और पिल्लों को असुरक्षित मानती हैं. पिल्लों की सुरक्षा के लिए वे राहगीरों को खतरा समझकर उन पर झपट पड़ती हैं.
ब्रीडिंग सीजन का मेंटल स्ट्रेस: प्रजनन (ब्रीडिंग) के मौसम में कुत्तों के शरीर में भारी हार्मोनल बदलाव होते हैं. इस दौरान वे अत्यधिक मानसिक तनाव में रहते हैं, जिससे जरा सी आहट या छेड़छाड़ पर वे आक्रामक हो जाते हैं.
रेबीज का जानलेवा संक्रमण: यदि कोई कुत्ता रेबीज बीमारी की चपेट में आ जाता है, तो उसका दिमागी संतुलन पूरी तरह नष्ट हो जाता है. रेबीज से पीड़ित कुत्ता इंसानों के अलावा अपने सामने आने वाली हर हिलती-डुलती वस्तु या वाहन को काटने दौड़ता है.
अचानक हमला होने पर अपनाएं ‘नो रन’ फॉर्मूला, भूलकर भी न भागेंडॉ. संजय कृष्ण व्यास का कहना है कि लोग अक्सर कुत्ता पीछे पड़ने पर डरकर भागने लगते हैं, जो सबसे बड़ी भूल होती है. जब आप भागते हैं, तो कुत्ता आपको अपना शिकार समझ लेता है और उसकी गति का मुकाबला करना इंसान के लिए मुमकिन नहीं होता. बचाव के लिए ‘नो रन’ फॉर्मूला अपनाएं. अगर कोई कुत्ता भौंकता हुआ आपकी तरफ आए, तो तुरंत अपनी जगह स्थिर (स्टैच्यू) खड़े हो जाएं और बिल्कुल हलचल न करें. जब आप कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे और शांत रहेंगे, तो कुत्ता आपको खतरा न मानकर खुद ही पीछे हट जाएगा.
नियमित टीकाकरण और संवेदनशीलता से टलेगा खतराएक्सपर्ट ने आमजन से अपील की है कि आवारा पशुओं को बेवजह पत्थर मारकर या डराकर उकसाएं नहीं. इसके अलावा पालतू और आसपास के आवारा कुत्तों का समय पर रेबीज रोधी टीकाकरण (Anti-Rabies Vaccination) जरूर करवाएं. समाज में सही जानकारी और संवेदनशीलता से ही रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी और डॉग बाइट की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
August 08, 2026, 10:59 IST



