अलवर के RAS अधिकारी का अनोखा हुनर, गोबर से बना रहे गणेश, अब तक तैयार की 100 प्रतिमाएं

Last Updated:August 09, 2026, 10:19 IST
Alwar RAS Officer Initiative: अलवर के नगर विकास न्यास में तैनात आरएएस अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका ने सरकारी जिम्मेदारियों के साथ अपने हुनर को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ दिया है. गणेश चतुर्थी से पहले उन्होंने गाय के गोबर से इको-फ्रेंडली भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाना शुरू किया है. बचपन से चित्रकारी का शौक रखने वाले नरूका अपने खाली समय में हाथों से इन प्रतिमाओं को तैयार करते हैं. उनका उद्देश्य इन मूर्तियों को बेचकर कमाई करना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है. अब तक वह करीब 100 प्रतिमाएं तैयार कर चुके हैं और इन्हें परिवार व मित्रों को भेंट कर रहे हैं.
अलवर जिले में एक RAS अधिकारी फ्री समय में अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं. नगर विकास न्यास अलवर में भूमि अवाप्ति एवं आरएएस अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका ने गणेश चतुर्थी से पहले पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए गोबर से इको-फ्रेंडली भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाना शुरू किया है. वह अपने कार्यालय के कार्यों के साथ फ्री समय में वह इको फ्रेंडली मूर्ति तैयार करते हैं और उन प्रतिमाओं को बिक्री के लिए नहीं, बल्कि जनजागरूकता के उद्देश्य से परिवार और मित्रों को भेंट कर रहे हैं.
आरएएस अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका ने बताया कि घरों में गाय के गोबर से इको फ्रेंडली प्रतिमा बनाने का मन में विचार आया. उन्होंने बताया कि त्योहारों पर प्रतिमाओं की पूजा करते हैं, इस दौरान उनका नदी और झीलों में विसर्जित कर देते हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में गोबर को पवित्र माना जाता है ऐसे में उन्होंने गोबर की प्रतिमाएं बनाने का फैसला लिया और उन पर आकर्षक चित्रकार करके सुंदर प्रतिमाएं बना रहे हैं.
आरएएस अधिकारी ने इको फ्रेंडली प्रतिमाएं बनाकर लोगों में जन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से से यह फैसला लिया है. उन्होंने बताया कि जिस प्रकार हम अन्य धातु से बनी प्रतिमाओं को जलाशयों में विसर्जित करते हैं जिससे जल का प्रदूषण बढ़ता है. लेकिन गोबर से बनी प्रतिमाओं का उपयोग करके धार्मिक कार्यक्रम संपन्न करने के बाद जलस्यों में विसर्जित करने की जरूरत नहीं रहती. गोबर से बनी प्रतिमा को घर में स्थित गमले, पेड़, लॉन या सार्वजनिक पार्क में वृक्ष के नीचे रख सकते हैं.
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समय के साथ इन इको-फ्रेंडली गोबर की प्रतिमाओं का प्राकृतिक रूप से अपघटन हो जाएगा. इससे रासायनिक प्रदूषण फैलने के बजाय मिट्टी को जैविक उर्वरक मिलेगा और पेड़ों की वृद्धि में भी मदद मिलेगी. पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने गोबर से प्रतिमाएं बनाने का निर्णय लिया. सरकारी कामों में बिजी रहने के बाद भी उन्होंने अपने शौक के लिए समय निकाला और प्रतिमाएं बनाने शुरू की.
अधिकारी ने बताया कि इको फ्रेंडली प्रतिमा बनाने पर आमजन की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं. ऐसे में लोगों का मानना है कि आने वाले समय में विभिन्न त्योहारों श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष पर कृष्ण जी की प्रतिमा, दुर्गा माता की पूजा के लिए प्रतिमा, गणेश जी की प्रतिमाएं सहित गोवर्धन पूजा के लिए छोटे आकर्षक गोवर्धन भगवान की प्रतिमाएं बनाने का फैसला लिया है.
आरएएस अधिकारी ने इन प्रतिमाओं को बनाने के लिए मुल्तानी मिट्टी, चिपकने वाला पदार्थ, लकड़ी का बुरादा को इस्तेमाल करके गणेश जी की प्रतिमाएं बनाई गई. उन्होंने बताया कि इन प्रतिमाओं में वजन काफी कम होता है और इनका हाथ से ही बनाया जा रहा है.
अलवर नगर विकास न्यास के भूमि आवृत्ति अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका ने बताया कि बचपन से ही उन्हें चित्रकार का शौक रहा है. लगातार खाली समय में तरह-तरह के चित्र हुए बनाते हैं. उसके बाद उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का लोगों को संदेश देने के लिए गोबर से इको फ्रेंडली गणेश की मूर्तियां बनाने शुरू की. उन्होंने बताया कि अब तक करीब 100 प्रतिमाएं उनके द्वारा तैयार की जा चुकी है.
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August 09, 2026, 10:19 IST



