खुद नौकरी करती हैं, शाम को पढ़ाती हैं झुग्गी के बच्चों को, काव्या ने 20 बच्चों की जिंदगी बदलने का उठाया बीड़ा

Last Updated:August 10, 2026, 16:20 IST
Udaipur Kavya Chaudhary: उदयपुर में काव्या चौधरी पिछले करीब दो वर्षों से झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं. न्यू आरटीओ क्षेत्र में करीब 18 से 20 बच्चे नियमित रूप से उनसे पढ़ने पहुंचते हैं. निजी नौकरी करने वाली काव्या शाम को समय निकालकर बच्चों को अक्षर ज्ञान, अल्फाबेट और गणित की बुनियादी शिक्षा देती हैं. वह अपनी सैलरी का करीब 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा बच्चों की जरूरतों पर खर्च करती हैं और उन्हें कपड़े, स्टेशनरी सहित जरूरी सामान उपलब्ध कराती हैं. काव्या का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा देकर उन्हें भिक्षावृत्ति और नशे जैसी प्रवृत्तियों से दूर कर बेहतर भविष्य की ओर ले जाना है.
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‘टीचर दीदी’ बनीं काव्या, अपनी सैलरी से पढ़ाई और जरूरतों का उठा रहीं जिम्मा
उदयपुर। शिक्षा को जीवन का मूलभूत आधार मानते हुए उदयपुर में हरियाणवी छोरी काव्या चौधरी पिछले करीब दो साल से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का अनूठा प्रयास कर रही हैं. न्यू आरटीओ के समीप बनी झुग्गियों में रहने वाले करीब 18 से 20 बच्चे रोजाना काव्या से पढ़ने पहुंचते हैं. काव्या नौकरी से समय निकालकर प्रतिदिन या सप्ताह में चार से पांच दिन शाम 6 से 7 बजे तक बच्चों की कक्षा लगाती हैं.
काव्या ने अपने इस मिशन की शुरुआत 14 अप्रैल 2024 को भुवाणा में अपने घर के पास मकान निर्माण में लगे मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने से की थी. इसके बाद जुलाई 2024 से उन्होंने न्यू आरटीओ क्षेत्र की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. इन बच्चों ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, ऐसे में काव्या उन्हें फिलहाल अक्षर ज्ञान, अल्फाबेट और गणित की बुनियादी शिक्षा दे रही हैं.
अपनी सैलरी का हिस्सा 40 से 45 प्रतिशत करती है खर्चनिजी नौकरी करने वाली काव्या अपनी सैलरी का करीब 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा इन बच्चों की जरूरतों पर खर्च करती हैं. वे बच्चों को पढ़ाने के साथ कपड़े, स्टेशनरी और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध करवाती हैं. कई बार बच्चों को मॉल और अन्य स्थानों पर घुमाकर उन्हें बाहरी दुनिया से रूबरू भी करवाती हैं.
काव्या ने लोगों से अपील कीकाव्या का कहना है कि झुग्गियों में रहने वाले बच्चे शिक्षा, स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. सुविधाओं के अभाव में कई बार बच्चों से पैसे के लालच में ऐसे काम करवाए जाते हैं, जिससे नशे और भिक्षावृत्ति जैसी प्रवृत्तियां बढ़ती हैं. उनका मानना है कि शिक्षा मिलने से बच्चे सही और गलत के बीच फर्क समझ सकेंगे. काव्या ने लोगों से अपील की कि बच्चों को भीख देने के बजाय कपड़े, किताबें, स्टेशनरी और दवाइयों जैसी जरूरत की चीजें उपलब्ध कराएं. युवाओं से उन्होंने जन्मदिन और अन्य अवसर इन बच्चों के साथ मनाने तथा जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाने का आह्वान किया.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
August 10, 2026, 16:20 IST



