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Liver Transplant: शरीर का सबसे खास अंग! छोटा सा हिस्सा भी बना सकता है नया लिवर, जानें कैसे होता है लिवर ट्रांसप्लांट

Liver Transplant Process In Hindi: लिवर एक ऐसा अंग है, जो शरीर के 500 से ज्यादा फंक्शन में शामिल होता है. ऐसे में लिवर का सही कंडीशन में होना सेहतमंद लाइफ जीने के लिए बहुत जरूरी होता है. वैसे तो ये अंग खुद की सफाई और मरम्मत करने में भी सक्षम होता है, लेकिन यदि लाइफस्टाइल की आदतें लगातार खराब बनी रहे तो इसके खराब होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है. ऐसी कंडीशन में सर्वाइवल के लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है.

बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एचपीबी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट के चेयरमैन एवं एचओडी डॉ. अभिदीप चौधरी बताते हैं कि लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंदरूनी अंग है जिसमें कोशिकाओं के दोबारा बनने क्षमता होती है. ‘लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट’ के दौरान, सर्जन आमतौर पर स्वस्थ डोनर के लिवर का 40% से 60% हिस्सा निकाल लेते हैं. जैसे ही यह हिस्सा निकाला जाता है, कोशिकाओं के बंटने और बढ़ने की प्रक्रिया बहुत तेजी से शुरू हो जाती है. 6 से 8 हफ्तों के अंदर, डोनर का बचा हुआ लिवर अपने असली आकार का लगभग 80% से 90% तक दोबारा बढ़ जाता है और पूरी तरह काम करने लगता है.

ट्रांसप्लांट की जरूरत कब होती है?पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एचपीबी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अजिताभ श्रीवास्तव बताते हैं कि जब लिवर गंभीर सिरोसिस, अचानक लिवर फेलियर, कुछ खास तरह के लिवर कैंसर या कुछ जन्मजात बीमारियों के कारण बुरी तरह डैमेज हो जाता है, तो ट्रांसप्लांट सबसे अच्छा इलाज होता है.

लिवर ट्रांसप्लांट प्रोसेस सही डोनर खोजनालिवर ट्रांसप्लांट में मृत डोनर या सावधानी से चुने गए जीवित डोनर की जरूरत होती है. जीवित डोनर से ट्रांसप्लांट के मामले में, एक स्वस्थ व्यक्ति अपने लिवर का एक हिस्सा दे सकता है क्योंकि लिवर की एक खास खूबी यह है कि इसमें दोबारा बढ़ने (रीजनरेट होने) की क्षमता होती है. जो भी व्यक्ति डोनर बनना चाहता है, उसकी मेडिकल हिस्ट्री, शरीर की बनावट और मानसिक स्थिति के आधार पर कड़ी जांच होनी चाहिए.

ट्रांसप्लांट की तैयारीऑपरेशन से पहले, मरीज को सही इलाज दिया जाना चाहिए और शरीर में पानी जमा होने (फ्लूइड रिटेंशन), ​​इन्फेक्शन, कुपोषण और किडनी की समस्याओं जैसी मेडिकल दिक्कतों का ध्यान रखा जाता है. मरीज और उनके परिवार को पूरी प्रक्रिया, संभावित दिक्कतों और सर्जरी के बाद दवाइयां लेने की अहमियत के बारे में बताया जाता है.

सर्जरीलिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी में मरीज के खराब लिवर को निकालकर उसकी जगह डोनर के स्वस्थ लिवर या उसके हिस्से को लगाया जाता है. इसके बाद, डोनर के लिवर को मुख्य रक्त वाहिकाओं और पित्त नली (बाइल डक्ट) से जोड़ा जाता है ताकि वह काम करना शुरू कर सके.

सर्जरी के बाद ट्रीटमेंटशुरुआती कुछ दिनों में मरीज की ICU में कड़ी निगरानी की जाती है. डॉक्टर लिवर के काम करने की क्षमता, रक्त के बहाव, किडनी के काम करने की क्षमता, इन्फेक्शन और अन्य संभावित दिक्कतों की जांच करते हैं. शरीर द्वारा नए लिवर को अस्वीकार करने (रिजेक्शन) के जोखिम को कम करने के लिए इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां दी जाती हैं और मरीज की स्थिति के अनुसार उनकी डोज को सावधानी से एडजस्ट किया जाता है. मरीज के स्थिर होने पर, धीरे-धीरे चलना-फिरना, सही पोषण और रिकवरी शुरू होती है. डिस्चार्ज से पहले, परिवार को दवाइयों, खान-पान, इन्फेक्शन से बचाव और चेतावनी वाले लक्षणों के बारे में जानकारी दी जाती है.

ट्रांसप्लांट के बाद की जिंदगीसफल ट्रांसप्लांट के बाद भी मरीजों को जिंदगी भर फॉलो-अप, नियमित जांच और बताई गई दवाइयों का सख्ती से पालन करने की जरूरत होती है. हेल्दी लाइफ़स्टाइल, सही वैक्सीनेशन और खुद से दवा लेने से बचना भी उतना ही जरूरी है.

डोनर की जिंदगीडोनर एक हफ्ते से भी कम समय में अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाते हैं. लेकिन रोजमर्रा की ज़िंदगी में लौटने में 3 से 6 हफ्ते लगते हैं. ज्यादा मेहनत वाले वर्कआउट 8-12 हफ्तों के बाद फिर से शुरू किए जा सकते हैं. डोनर की उम्र सामान्य रहती है और जीवन की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है.

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