Agriculture News: फसल नहीं दे रही खारी जमीन, जिप्सम बनेगा सहारा, सरकार दे रही 50% सब्सिडी

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फसल नहीं दे रही खारी जमीन, जिप्सम बनेगा सहारा, सरकार दे रही 50% सब्सिडी
Last Updated:August 20, 2026, 07:37 IST
Farm Soil Inproving Method: क्षारीय मिट्टी के कारण खेत की उत्पादकता प्रभावित हो रही है तो किसानों के लिए जिप्सम उपयोगी मृदा सुधारक साबित हो सकता है. कृषि विभाग की ओर से जिप्सम पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. खास बात यह है कि अनुदान की मात्रा सामान्य अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि मिट्टी जांच रिपोर्ट में दर्ज जिप्सम की आवश्यकता के अनुसार तय होगी. मिट्टी परीक्षण के बाद रिपोर्ट में जीआर वैल्यू के आधार पर जिप्सम की मात्रा निर्धारित की जाएगी. कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ के अनुसार क्षारीय भूमि में मिट्टी की संरचना और पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित होने से फसल की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ता है. इसलिए बिना जांच के जिप्सम का इस्तेमाल करने के बजाय मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मात्रा तय करना बेहतर है. इससे लागत नियंत्रित रखने के साथ मिट्टी सुधार में भी मदद मिलेगी.
खेत की मिट्टी में क्षारीयता बढ़ने से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है तो किसानों के लिए जिप्सम का उपयोग उपयोगी साबित हो सकता है. कृषि विभाग की ओर से मृदा सुधारक के रूप में जिप्सम पर 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है. खास बात यह है कि किसान इस योजना का लाभ अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक ले सकते हैं. इससे किसानों को मिट्टी सुधार की लागत कम करने के साथ खेत की उत्पादकता बढ़ाने का अवसर मिलेगा.
जिप्सम का अनुदान सामान्य अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि मिट्टी की जांच रिपोर्ट में दर्ज आवश्यकता के अनुसार दिया जाएगा. किसानों द्वारा खेत की मिट्टी की जांच के बाद रिपोर्ट में जिप्सम की आवश्यक मात्रा को जीआर वैल्यू के रूप में बताया जाएगा. इसी जीआर वैल्यू के आधार पर किसान को अपने खेत में जिप्सम की जरूरत का निर्धारण करना होगा. इससे अनावश्यक मात्रा में जिप्सम डालने से बचने के साथ मिट्टी सुधार का काम वैज्ञानिक तरीके से खेत की मिट्टी में सुधार होगा
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि क्षारीय भूमि में मिट्टी की संरचना और पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित होने से पौधों की बढ़वार पर असर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में जिप्सम मिट्टी सुधारक के रूप में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि प्रत्येक खेत में जिप्सम की जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए बिना मिट्टी की जांच के मनमाने तरीके से इसका प्रयोग करने के बजाय मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मात्रा तय करना अधिक फायदेमंद रहता है. इससे लागत भी नियंत्रित रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है.
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योजना के तहत किसानों को जिलेवार निर्धारित जिप्सम की कुल दर का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा. अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए ही प्रति कृषक अनुदान का लाभ मिलेगा. इसका मतलब है कि किसान अपने खेत का क्षेत्रफल, मिट्टी की जांच रिपोर्ट और उसमें दर्शाई गई जिप्सम की आवश्यकता के आधार पर आवेदन तैयार करना होगा. अनुदान प्राप्त करने से पहले किसान को विभागीय नियमों और पात्रता के अनुसार आवेदन करना होगा.
आवेदन के लिए किसान को विभाग की ओर से निर्धारित प्रार्थना पत्र में जिप्सम की मांग दर्ज करनी होगी. इसमें पोषक तत्वों के रूप में जिप्सम की आवश्यकता तथा क्षारीय भूमि सुधार के लिए मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार निर्धारित जीआर वैल्यू को शामिल करना होगा. आवेदन प्रक्रिया में सभी सही जानकारी देना होंगी. क्योंकि जिप्सम की मात्रा का निर्धारण खेत की वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाता है.
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनके खेतों में मिट्टी की समस्या के कारण उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है. जिप्सम के माध्यम से मिट्टी सुधार के साथ खेती की लागत को कम करने का प्रयास कर सकते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, किसना रिपोर्ट के आधार पर ही आवश्यकता तय कर जिप्सम का उपयोग करेंगे तो उन्हें अधिक फायदा होगा. अनुदान और आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए किसान अपने जिले के संयुक्त निदेशक कृषि, सहायक निदेशक कृषि अथवा स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क कर सकते हैं.
First Published :
August 20, 2026, 07:37 IST



