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Bharatpur News: मेले से पहले यहां पहुंचते हैं अफसर और व्यापारी, जाने बाबा गोलमोल महादेव से जुड़ी वर्षों पुरानी आस्था

Last Updated:August 23, 2026, 10:55 IST

भरतपुर के ऐतिहासिक गोलमोल महादेव मंदिर से जसवंत प्रदर्शनी एवं राष्ट्रीय पशु मेले की वर्षों पुरानी आस्था जुड़ी है. मान्यता है कि बाबा के आशीर्वाद से मेले की शुरुआत हुई थी, इसलिए हर साल मेले से पहले अधिकारी और व्यापारी यहां पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और कारोबार में सफलता की कामना करते हैं.

भरतपुर. ऐतिहासिक गोलमोल महादेव मंदिर से जुड़ी कई वर्षों पुरानी आस्था आज भी लोगों के बीच उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ कायम है. यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भरतपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि जसवंत प्रदर्शनी एवं राष्ट्रीय पशु मेले की शुरुआत बाबा गोलमोल महादेव के आशीर्वाद से हुई थी यही वजह है कि हर साल मेले की शुरुआत से पहले यहां विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जाती है.

जसवंत प्रदर्शनी एवं राष्ट्रीय पशु मेले के आयोजन के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, मेला मजिस्ट्रेट और पशुपालन विभाग के अधिकारी मंदिर पहुंचते हैं. अधिकारी बाबा गोलमोल महादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मेले के सफल आयोजन और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है.कि वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है.

गोलमोल महादेव मंदिर काफी पुराना

मंदिर के पुजारी बाबा भूमानंद गिरी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि गोलमोल महादेव मंदिर काफी पुराना है और मेले के आयोजन से इसका विशेष संबंध माना जाता है. उनके अनुसार जब जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले का आयोजन होता है तो अधिकारी यहां आकर बाबा के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं. इसके साथ ही मेले में दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले व्यापारी भी अपनी दुकानें लगाने से पहले मंदिर पहुंचते हैं. इस मंदिर का निर्माण भरतपुर राज परिवार द्वारा करवाया गया था.

व्यापारी बाबा गोलमोल महादेव के सामने माथा टेककर अपने कारोबार में सफलता अच्छी बिक्री और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. कई व्यापारी मेले के दौरान अपने व्यापार की शुरुआत भी बाबा का आशीर्वाद लेकर करते हैं, उनका मानना है.कि बाबा की कृपा से उनका कारोबार अच्छा चलता है और मेले में किसी तरह की परेशानी नहीं आती. गोलमोल महादेव मंदिर से जुड़ी यह परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. बल्कि यह भरतपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Bharatpur,Rajasthan

First Published :

August 23, 2026, 10:55 IST

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