अलवर के राजीव गांधी अस्पताल में सोनोग्राफी बनी मुसीबत, महीनों बाद मिल रही तारीख, प्रसूताएं घंटों कर रही इंतजार

Last Updated:August 23, 2026, 18:11 IST
अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में सोनोग्राफी की बदहाल व्यवस्था ने मरीजों और प्रसूताओं की परेशानी बढ़ा दी है. जांच के लिए डेढ़ से दो महीने बाद की तारीख मिल रही है, जबकि तय तारीख पर भी कई बार सोनोग्राफी नहीं हो पाती. मजबूर मरीज निजी लैब में 1 से 2 हजार रुपए खर्च कर जांच कराने को मजबूर हैं. मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बावजूद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
अलवर. राजस्थान के सबसे बड़े जिला अस्पतालों में शामिल राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है. अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और प्रसूताओं को सोनोग्राफी करवाने के लिए डेढ़ से दो महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है. लंबी तारीख मिलने के बावजूद कई बार निर्धारित दिन पर भी सोनोग्राफी नहीं हो पाती, ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है.
राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में जयपुर के एसएमएस अस्पताल के बाद प्रदेश की बड़ी ओपीडी में से एक बताई जाती है. यहां प्रतिदिन करीब 4 से 5 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. अलवर के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार कराने आते हैं. ऐसे में सोनोग्राफी जैसी जरूरी जांच के लिए लंबा इंतजार मरीजों की परेशानी और बढ़ा रहा है.
प्रसूताओं को सबसे ज्यादा परेशानी
प्रसूताओं के लिए सोनोग्राफी जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसके अलावा पेट संबंधी बीमारियों और अन्य कई समस्याओं में भी डॉक्टर सोनोग्राफी की सलाह देते हैं. मरीजों का कहना है कि सोनोग्राफी के बिना कई बार डॉक्टर आगे की दवा या उपचार शुरू नहीं करते, अस्पताल में जांच के लिए पहुंचने पर उन्हें लंबी तारीख दे दी जाती है.
पर्ची पर लिख दी जाती है एक-दो महीने बाद की तारीख
मरीजों के अनुसार सोनोग्राफी कक्ष के बाहर मौजूद कर्मचारी पर्ची पर एक महीने से दो महीने के बीच की तारीख लिखकर मरीजों को लौटा देते हैं. जब मरीज निर्धारित तारीख पर दोबारा अस्पताल पहुंचता है, तब भी कई बार जांच नहीं हो पाती. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का आरोप है कि उन्हें स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सरकारी अस्पताल में समय पर सोनोग्राफी नहीं होने के कारण मरीजों को निजी सेंटरों में जांच करवानी पड़ रही है. इसके लिए उन्हें करीब 1 हजार से 2 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं. ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन रहा है. कई मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने के बावजूद उन्हें निजी जांच केंद्रों पर पैसा खर्च करना पड़ रहा है.
दोनों अस्पतालों में समस्या
राजीव गांधी सामान्य अस्पताल के साथ जनाना अस्पताल में भी सोनोग्राफी को लेकर मरीजों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रसूताओं को कई-कई घंटे लाइन में लगना पड़ता है. मरीज कई बार अस्पताल प्रशासन के सामने शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. राजीव गांधी सामान्य अस्पताल को करीब तीन साल पहले मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल चुका है, लेकिन मरीजों का कहना है कि सोनोग्राफी जैसी बुनियादी जांच के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ रहा है. ऐसे में अस्पताल प्रशासन के सामने जांच व्यवस्था को बेहतर करने और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Alwar,Rajasthan
First Published :
August 23, 2026, 18:11 IST



