गांव से शहर बना सिकराय, पहली बार पार्षद चुनेंगे मतदाता, विकास के मुद्दों पर सियासी घमासान तेज

दौसा. जिले का सिकराय इस बार एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है. दशकों तक ग्राम पंचायत में सरपंच और वार्ड पंच चुनने वाले सिकराय क्षेत्र के मतदाता अब पहली बार नगर पालिका की सरकार चुनेंगे. नगर पालिका बनने के बाद यहां पहली बार शहरी निकाय चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में यह चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि सिकराय के गांव से शहर बनने की यात्रा में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत भी है. 9 सितंबर को होने वाले मतदान को लेकर क्षेत्र में चुनावी माहौल गर्म होने लगा है.
खास बात यह है कि इस चुनाव में कई युवा पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. गांव से शहर बने सिकराय के लोगों को अब विकास की भी नई उम्मीदें हैं. सड़कों, नालियों, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और जलभराव जैसी समस्याओं से राहत की उम्मीद मतदाताओं को है. वहीं कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही सिकराय में पहली नगर पालिका का बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं. ऐसे में चुनाव स्थानीय मुद्दों के साथ दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल भी बन गया है.
पहली बार पार्षद चुनेंगे सिकराय के मतदाता
सिकराय में अब तक ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान सरपंच और वार्ड पंच चुने जाते रहे हैं. लेकिन नगर पालिका बनने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक तस्वीर बदल गई है. सिकराय के साथ कुडेरा डूंगर, मुंडिया खेड़ा, मोरेड, कैलाई सहित आसपास के कई क्षेत्रों को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किया गया है. अब इन्हीं इलाकों के मतदाता अपने-अपने वार्ड से पार्षद चुनेंगे. इसके बाद पार्षदों के जरिए नगर पालिका की पहली शहरी सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इस बदलाव को लेकर स्थानीय लोगों में उत्सुकता है. कई लोगों के लिए यह पहली बार होगा, जब वे पंचायत प्रतिनिधि की जगह नगर पालिका के पार्षद के चुनाव में मतदान करेंगे.
विकास की उम्मीदों के बीच चुनावी माहौल
नगर पालिका बनने के साथ ही स्थानीय लोगों की विकास संबंधी अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं. मतदाताओं का कहना है कि शहर का दर्जा मिलने के बाद मूलभूत सुविधाओं में सुधार होना चाहिए. सड़कों की स्थिति, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और जलभराव जैसी समस्याएं चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं. बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव और कचरे की समस्या लोगों के लिए परेशानी बनती है. ऐसे में मतदाता चाहते हैं कि सिकराय की पहली नगर पालिका सरकार सबसे पहले इन समस्याओं का स्थायी समाधान करे. स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर भी है कि नगर पालिका बनने के बाद शहर में विकास योजनाओं को किस तरह गति मिलती है.
पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में उत्साह
सिकराय के इस चुनाव की सबसे खास तस्वीर युवाओं के बीच देखने को मिल रही है. नगर पालिका क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे. उनके परिवार के बड़े सदस्य भले ही पंचायत चुनावों में वोट डालते रहे हों, लेकिन नई पीढ़ी पहली बार शहरी निकाय की सरकार चुनने जा रही है. युवा मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बेहतर सड़कें, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं. युवाओं का कहना है कि नगर पालिका बनने के बाद सिकराय को भी शहरों की तरह बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए. पहली बार मतदान को लेकर युवाओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है.
कांग्रेस और बीजेपी ने झोंकी ताकत
सिकराय को नगर पालिका का दर्जा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मिला था. कांग्रेस इसी फैसले को अपने पक्ष में मुद्दा बनाकर जनता के बीच पहुंच रही है. वहीं बीजेपी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को गिनाकर मतदाताओं से समर्थन मांग रही है. दोनों दल सिकराय में अपना पहला नगर पालिका बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है और दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है. सिकराय विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक विक्रम बंशीवाल की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी मानी जा रही है. दूसरी ओर कांग्रेस की कोशिश है कि पहली बार बनने वाली नगर पालिका में उसका बोर्ड बने.
9 सितंबर को ईवीएम में होगा फैसला
सिकराय के लोगों के लिए यह चुनाव एक नई शुरुआत है. नगर पालिका में शामिल हुए गांवों के मतदाता अब यह तय करेंगे कि उनके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कौन करेगा और आने वाले वर्षों में विकास की दिशा कैसी होगी. 9 सितंबर को मतदान के साथ मतदाता ईवीएम का बटन दबाकर अपना फैसला सुनाएंगे. फिलहाल प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है. चुनावी चर्चाएं अब गांव की चौपालों से निकलकर शहर की गलियों तक पहुंच चुकी हैं. दशकों तक सरपंच और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि चुनने वाले सिकराय के मतदाता अब पहली बार पार्षद चुनेंगे. ऐसे में पहली शहरी सरकार की बुनियाद किसके हाथों रखी जाएगी, इसका जवाब 9 सितंबर को मतदान के बाद सामने आएगा.



