मदन दिलावर परिवार में चुनावी घमासान, बेटे-बहू का वोटर आवेदन खारिज, भाई की दावेदारी से बढ़ी टेंशन

बारां. राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर एक बार फिर सियासी सुर्खियों में हैं. इस बार वजह शिक्षा विभाग से जुड़ा कोई फैसला नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों के निकाय चुनाव लड़ने की चर्चाएं हैं. बारां जिले की अटरू नगरपालिका में पहली बार निकाय चुनाव होने जा रहे हैं और चुनाव से पहले ही वार्ड नंबर 21 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. इसी वार्ड की मतदाता सूची में शिक्षा मंत्री के बेटे पवन दिलावर और उनकी पत्नी हेमलता दिलावर के नाम जुड़वाने के लिए किए गए आवेदन निरस्त होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है.
दूसरी ओर, इसी वार्ड से मंत्री के भाई कृष्ण मुरारी के भी चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चाएं हैं. ऐसे में एक ही परिवार से जुड़े संभावित दावेदारों को लेकर बीजेपी के सामने भी स्थिति दिलचस्प हो गई है. हालांकि पवन दिलावर ने चुनाव लड़ने की किसी भी संभावना से साफ इनकार किया है और पूरे मामले को साजिश बताया है. उनका कहना है कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने ऑनलाइन आवेदन जरूर किया था, लेकिन यह आवेदन चुनाव लड़ने के लिए नहीं था.
वार्ड 21 में वोटर लिस्ट को लेकर विवाद
अटरू नगरपालिका के वार्ड नंबर 21 की भाग संख्या-1 में पवन दिलावर और उनकी पत्नी हेमलता दिलावर ने 21 अगस्त को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया था. आवेदन में मकान नंबर 10, बस स्टैंड के पास अटरू का पता दर्ज किया गया था. आवेदन एसडीएम अंजना सहरावत के पास पहुंचा तो दिए गए पते को लेकर संदेह सामने आया. इसके बाद मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई. कमेटी ने मौके पर पहुंचकर जांच की और आसपास के पांच मकानों में रहने वाले लोगों के बयान दर्ज किए. जांच के दौरान सामने आया कि पवन दिलावर और उनकी पत्नी न तो पहले इस मकान में रहते थे और न ही वर्तमान में वहां निवास कर रहे हैं. जांच में अटरू के वार्ड 21 में निवास का कोई ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया गया. आवेदन के साथ रंगबाड़ी का आधार कार्ड लगाया गया था.
एसडीएम ने दोनों आवेदन किए निरस्त
जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने पवन दिलावर और हेमलता दिलावर के मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदन निरस्त कर दिए. आदेश में आवेदन पर हस्ताक्षर की जगह अंगूठे का निशान लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया. आदेश के मुताबिक, शिक्षित होने के बावजूद हस्ताक्षर की जगह अंगूठे का निशान होने से आवेदन की प्रमाणिकता और वास्तविकता को लेकर संदेह पैदा हुआ. वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के आवेदन निरस्त होने के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया. अटरू में पहली बार नगरपालिका चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले मंत्री के बेटे और बहू द्वारा एक वार्ड में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के आवेदन को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं.
चेयरमैन पद एससी के लिए आरक्षित
अटरू के नगरपालिका बनने के बाद यहां पहली बार निकाय चुनाव होने जा रहे हैं. खास बात यह है कि नगरपालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है. ऐसे में निकाय चुनाव को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं. इसी बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार से जुड़े नामों की चर्चा ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है. एक ओर उनके बेटे पवन दिलावर के चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मंत्री के भाई कृष्ण मुरारी के भी चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है. इसके अलावा इसी वार्ड से पूर्व विधायक, पूर्व मेयर सहित कई अन्य दावेदारों के नाम भी सामने आ रहे हैं.
पवन दिलावर बोले- चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं
हालांकि पवन दिलावर ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है. न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए कोई आवेदन नहीं किया. उन्होंने चुनाव लड़ने की चर्चा को साजिश बताया है. पवन दिलावर के इनकार के बाद भी वार्ड 21 को लेकर राजनीतिक चर्चाएं थम नहीं रही हैं. बीजेपी के स्तर पर टिकट वितरण को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है. एक ही परिवार से जुड़े नामों की संभावित दावेदारी और दूसरे नेताओं की सक्रियता के बीच पार्टी किसे मैदान में उतारती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
बीजेपी के सामने टिकट को लेकर चुनौती
अटरू में पहली बार होने जा रहे निकाय चुनाव में बीजेपी के लिए भी टिकट वितरण आसान नहीं रहने वाला है. एक ही वार्ड से कई दावेदारों के सामने आने के कारण संगठन को स्थानीय समीकरण, जीत की संभावना और कार्यकर्ताओं की दावेदारी को ध्यान में रखना होगा. खासतौर पर शिक्षा मंत्री के परिवार से जुड़े नामों की चर्चा के कारण वार्ड 21 पर पार्टी का फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है. फिलहाल पवन दिलावर चुनाव लड़ने की संभावना को पूरी तरह नकार चुके हैं और मामले को साजिश बता रहे हैं. वहीं मंत्री के भाई कृष्ण मुरारी की संभावित दावेदारी को लेकर भी तस्वीर स्पष्ट नहीं है. अब सबकी नजर बीजेपी के टिकट वितरण पर है. पार्टी का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि वार्ड 21 में मुकाबला किन चेहरों के बीच होगा और परिवार से जुड़े नामों की चर्चाओं का स्थानीय राजनीति पर कितना असर पड़ेगा.



