National

बाहुबलियों के गढ़ सैयदराजा सीट पर क्या है जनता का मूड? जनता बोली- विकास किसको कहते है, हमने नहीं देखा

चंदौली जिले की राजनीति में सैयदराजा विधानसभा सीट सबसे चर्चित और दिलचस्प सीटों में शुमार रही है. यहां चुनावी मुकाबले अक्सर बेहद रोमांचक और कांटे के होते है. इसलिए हर चुनाव में पूरे जिले की नजर इस सीट पर टिकी रहती है. पूर्वांचल की राजनीति में बाहुबलियों के प्रभाव और कई चर्चित चुनावी मुकाबलों के कारण सैयदराजा को लंबे समय से बाहुबलियों के गढ़ के रूप में भी देखा जाता रहा है. यही राजनीतिक इतिहास और दिलचस्प समीकरण इस सीट को चंदौली की सबसे अहम चुनावी सीटों में शामिल करते है.

सैयदराजा विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी धीरे-धीरे तेज होने लगी है. इस चुनावी माहौल को समझने के लिए सबसे अहम है जनता की राय. लोकल-18 ने सैयदराजा क्षेत्र के अलग-अलग लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि पिछले करीब 5 वर्षों के कामकाज से वे कितने संतुष्ट हैं और अगले चुनाव में उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी. बातचीत में जनता की राय एक जैसी नहीं दिखी. कुछ लोग विकास और कानून व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए, तो कुछ ने साफ कहा कि जमीनी स्तर पर अभी बहुत काम होना बाकी है.

विकास को लेकर अलग-अलग रायसैयदराजा के राम आज्ञा तिवारी सरकार और स्थानीय विधायक के कामकाज से संतुष्ट नजर आए. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पहले की तुलना में काफी विकास हुआ है. उन्होंने बताया कि सफाई, बिजली, सड़क और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है. उन्होंने रास्तों के निर्माण और लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान कराने की भी बात कही. हालांकि, सबसे बड़ी अपेक्षा रोजगार को लेकर रही. क्षेत्र में कोई बड़ा कारखाना या उद्योग लगाने की मांग की, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि विकास के कई काम हुए है, लेकिन रोजगार की समस्या का समाधान होना अभी जरूरी है.

किसी ने कहा- विकास हुआ ही नहींरामचंद्र ने मौजूदा विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में विकास के नाम पर बहुत कुछ ऐसा बताया जाता है जो जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता. उनका कहना है कि कुछ चुनिंदा जगहों पर ही काम होता है और कई इलाकों की समस्याएं जस की तस बनी हुई है. उन्होंने भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया. सरकारी काम कराने के लिए लोगों को पैसे देने पड़ते है और बिना पैसे के काम होना मुश्किल है. छोटे से लेकर बड़े स्तर तक भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने को मिलती है और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती है.

शिक्षा, सफाई और किसानों की समस्यारजनीकांत पांडे ने भी क्षेत्र के विकास को लेकर असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि मौजूदा विधायक के कार्यकाल में उनकी नजर में अपेक्षित विकास नहीं हुआ. उनका दावा था कि जिन कामों को विकास बताया जा रहा है उनमें से कई पुराने कार्यों की निरंतरता है. उन्होंने सफाई व्यवस्था और जलभराव को लेकर भी सवाल उठाए. कई जगह नालियों की सफाई नहीं होने से बारिश के दौरान पानी जमा हो जाता है. शिक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने शिक्षकों की कमी की बात कही. किसानों की समस्याओं को भी उन्होंने बड़ा मुद्दा बताया और कहा कि किसानों को अपनी समस्याओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है.

राशन और कानून व्यवस्था से संतुष्टकमलेश कुमार ने सरकार के कामकाज को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक राय रखी. उन्होंने कहा कि गरीबों को राशन की सुविधा मिल रही है और कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है. व्यापारियों के लिए सुरक्षा का माहौल बेहतर है. हालांकि, उन्होंने नई बसी कॉलोनियों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई. जिन इलाकों में नई कॉलोनियां विकसित हुई है. वहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अधिक ध्यान देना चाहिए. वहीं, बलवंत राम ने भी विकास को अच्छा बताया, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त इलाज और दवाओं की उपलब्धता पर अभी काम करने की जरूरत है.

रोजगार और स्थानीय सुविधाएं बन सकती हैं चुनावी मुद्दाफिलहाल सैयदराजा में जनता का मूड एकतरफा नहीं, बल्कि बंटा हुआ नजर आ रहा है. कुछ के लिए विकास और कानून व्यवस्था संतोष का कारण है, तो कुछ के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय समस्याएं सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है. अब ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा की चुनाव में जनता अपना हक किसे देगी.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj