लकड़ी के बांस और खड़ाऊ पर टिके कदम, सरवडी का भक्त 3 इंच ऊपर चलकर पहुंच रहा रामदेवरा, उमड़ी भीड़

Last Updated:September 07, 2026, 14:57 IST
Ramdevra Yatra 2026: रामदेवरा यात्रा में सरवडी के एक भक्त की अनोखी आस्था लोगों का ध्यान खींच रही है. भक्त लकड़ी के बांस और खड़ाऊ के सहारे अपने कदमों को जमीन से करीब 3 इंच ऊपर रखकर यात्रा कर रहा है. बाबा रामदेव के दर्शन की इच्छा लेकर निकले भक्त का यह अनोखा तरीका लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है. यात्रा के दौरान कई लोग रुककर उसकी आस्था को देख रहे हैं.
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पाली. लोक देवता बाबा रामदेवजी के प्रति श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का एक अनोखा और हैरान कर देने वाला रूप पाली हाईवे पर देखने को मिला. जहां कोई भक्त पेट के बल दंडवत प्रणाम करते हुए तो कोई कड़कड़ाती धूप में नंगे पांव मीलों का सफर तय कर रामदेवरा पहुंच रहा है, वहीं सरवडी से आए एक श्रद्धालु खेतसिंह की यात्रा ने हर किसी को अचंभित कर दिया है. यह श्रद्धालु जमीन से करीब 3 इंच ऊपर, केवल लकड़ी के बांस के डंडों और खड़ाऊ के सहारे संतुलन बनाकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं. इस तरह बैलेंस करके चलना हर किसी के बस की बात नही होती और वह भी इतनी धूप के समय.
पाली हाईवे से गुजरते हुए इस अनोखे पैदल यात्री को देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ उमड़ रही है. लोग न केवल उनकी भक्ति को सलाम कर रहे हैं, बल्कि इसे बाबा रामदेवजी का चमत्कार भी मान रहे हैं. लगातार 10 दिनों के कठिन सफर के बाद अब यह श्रद्धालु जल्द ही रामदेवरा धाम पहुंचकर बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाएंगे और ढोक देकर मन्नत उतारेंगे.
मनोकामना पूरी होने पर उठाई यह कठिन साधनाकठिन और अकल्पनीय लगने वाली यह यात्रा किसी कौतूहल का नतीजा नहीं, बल्कि बाबा रामदेवजी के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है. श्रद्धालु के अनुसार, उनकी मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने यह संकल्प लिया था. इस अनोखे और कठिन तरीके से यात्रा करते हुए उन्हें 10 दिन हो चुके हैं, और उनका साहस तथा संतुलन रास्ते में देखने वाले हर शख्स को हैरान कर रहा है.
सरवड़ी से रामदेवरा पदयात्रासरवड़ी से बाबा रामदेवरा धाम के लिए रवाना हुआ पदयात्रियों का संघ अगाध श्रद्धा और अटूट भक्ति का अनुपम उदाहरण पेश कर रहा है. सैकड़ों किलोमीटर लंबे और दुर्गम रास्ते की परवाह किए बिना बच्चे, बुजुर्ग और महिला श्रद्धालु “खम्मा-खम्मा ओ रामापीर” और “बाबा के जयकारों” की गूंज के साथ लगातार आगे बढ़ रहे हैं. कड़कड़ाती धूप और थका देने वाले सफर के बावजूद भक्तों के चेहरे पर जरा भी थकान नजर नहीं आती. यही वजह है कि यह भक्त भी
बाबा रामदेवजी के प्रति जन-आस्था का कारणलोक देवता बाबा रामदेव जी को पीरो के पीर भी कहा जाता है. यही वजह है कि यहां पर 36 कौम के लोग दर्शन करने के लिए आते है. रामदेवजी के प्रति करोड़ों लोगों की गहरी आस्था का मुख्य कारण उनका सामाजिक समरसता, छुआछूत निवारण और दीन-दुखियों के कल्याण का संदेश है. 14वीं शताब्दी में जन्मे बाबा रामदेवजी ने जाति-पाति, ऊंच-नीच और धर्म के भेदभाव को मिटाकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया था. उन्हें हिंदू विष्णु का अवतार मानते हैं, तो मुस्लिम समाज ‘रामसा पीर’ के रूप में पूजता है. भक्तों का ऐसा दृढ़ विश्वास है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता और सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है. इसी चमत्कारिक कृपा, सामाजिक सद्भाव और शरणागत की रक्षा करने के भाव के कारण सदियों बाद भी उनका स्थान जन-जन के हृदय में सर्वोपरि है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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September 07, 2026, 14:57 IST



