‘मियां भाई’ को जमकर पड़ी मार, ईशान-वैभव सबने बहती ‘रनों की गंगा’ में धोया हाथ, अचानक सिराज को हुआ क्या है?

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट में ‘मियाँ भाई’ के नाम से मशहूर तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज की कहानी संघर्ष, जुनून और जादुई स्पेल की रही है. ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक दौरे से लेकर एशिया कप में श्रीलंका को घुटनों पर लाने तक, सिराज टीम इंडिया के मुख्य हथियार रहे हैं लेकिन पिछले कुछ समय से क्रिकेट के गलियारों में उनकी गेंदबाज़ी की वह पुरानी धार गायब दिख रही है.
हाल ही में घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों में से एक, दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में जो कुछ भी हुआ, उसने चयनकर्ताओं और क्रिकेट प्रेमियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. सिराज वो गेंदबाज़ है जिनकी की रफ़्तार और स्विंग से दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज़ थर-थर कांपते थे, आज उसे विकेट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
दलीप ट्रॉफी का ‘महंगा’ सच
चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में साउथ ज़ोन की ओर से खेलते हुए मोहम्मद सिराज का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. ईस्ट ज़ोन के बल्लेबाज़ों, विशेषकर 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी ईशान किशन ने सिराज की गेंदों पर जमकर प्रहार किए. सिराज ने गेंदबाज़ी में ऐसा ‘शतक’ लगाया जो कोई भी गेंदबाज़ कभी नहीं लगाना चाहेगा. उन्होंने अपने स्पेल में लगभग 5.6 की बेहद महंगी इकॉनमी रेट से रन लुटाए और एक भी विकेट लेने में नाकाम रहे. किसी प्रथम श्रेणी (रेड-बॉल) मैच में वनडे की तरह रन लीक होना यह दर्शाता है कि वह अपनी लाइन और लेंथ से पूरी तरह भटक चुके थे. सिराज ने 21 ओवर गेंदबाजी की और बिना विकेट लिए 118 रन लुटा दिए.
श्रीलंका दौरे पर छूटा पसीना, रफ़्तार में आई भारी गिरावट
सिराज के खराब फॉर्म की कहानी सिर्फ दलीप ट्रॉफी तक सीमित नहीं है इससे पहले श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में भी उनका प्रदर्शन बेहद साधारण रहा था. श्रीलंका की टर्निंग पिचों पर जहां तेज़ गेंदबाज़ों को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है, वहां सिराज पूरी तरह बेअसर दिखे. उन्होंने 2 टेस्ट मैचों में केवल 4 विकेट चटकाए. सबसे चिंताजनक बात उनकी गेंदबाज़ी की रफ़्तार (स्पीड) रही. जो सिराज अमूमन 140+ kmph की गति से गेंद फेंकते थे, वह श्रीलंका में केवल 125 की रफ़्तार के आसपास संघर्ष करते नज़र आए. आधुनिक क्रिकेट में यदि किसी फ्रंटलाइन भारतीय तेज़ गेंदबाज़ की गति गिरकर 125 kmph तक आ जाए, तो उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर बल्लेबाज़ों के लिए उन्हें खेलना बेहद आसान हो जाता है.
गिरते ग्राफ़ की बड़ी वजह
मोहम्मद सिराज के इस गिरते ग्राफ़ के पीछे कुछ मुख्य कारण दिखाई देते हैं. आईपीएल से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने की वजह से उनके शरीर पर थकान साफ दिखाई दे रही है. रफ़्तार में आई गिरावट इसी शारीरिक थकान का नतीजा मानी जा रही है. भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने भी हाल ही में यह संकेत दिया था कि सिराज नई गेंद से तो असरदार हैं, लेकिन पुरानी गेंद से वह उतने प्रभावी नहीं रह पा रहे हैं. जब गेंद की चमक खो जाती है, तो सिराज अपनी लाइन-लेंथ पर नियंत्रण खो देते हैं.सि राज अक्सर विकेट लेने के प्रयास में बहुत अधिक फुल-लेंथ या स्लॉट में गेंदें डाल बैठते हैं, जिससे बल्लेबाज़ों को बड़े शॉट्स खेलने की आसानी हो जाती है.
न्यूजीलैंड के आगामी दौरों को देखते हुए मोहम्मद सिराज का फॉर्म में लौटना भारतीय टीम के लिए बेहद ज़रूरी है, विशेषकर तब जब जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड को भी मैनेज करना होता है. सिराज को राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की रखने के लिए अपनी रफ़्तार पर काम करना होगा और नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में अपनी फिटनेस और गेंदबाज़ी इनपुट्स को रीसेट करना होगा. क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि ‘हैदराबादी एक्सप्रेस’ जल्द ही अपनी पुरानी लय और 140+ की गति हासिल कर मैदान पर दमदार वापसी करेगी.



