Rajasthan

कोटा के इंजीनियर का कमाल, सैनिकों के लिए तैयार किया खास ‘हनुमंता एक्सो 1.2’, खासियत कर देगी हैरान

कोटा. भारतीय जवानों की युद्ध क्षमता और शारीरिक सहनशक्ति बढ़ाने की दिशा में राजस्थान के कोटा में तैयार हो रहा ह्यूमन एक्सोसूट अब एडवांस वर्जन तक पहुंच गया है. इस तकनीक के इस्तेमाल से जवान 100 से 200 किलो तक का भारी सामान, हथियार और गोला-बारूद लेकर भी कम थकान के साथ आगे बढ़ सकेंगे. खासतौर पर कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में सैनिकों के लिए यह तकनीक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां भारी सैन्य सामान के साथ लंबी दूरी तय करना शारीरिक रूप से बेहद मुश्किल होता है. यह ह्यूमन एक्सोसूट रक्षा मंत्रालय के आईडीईएक्स प्रोजेक्ट और अदिति प्रोग्राम के तहत राजस्थान के कोटा के इंजीनियर गौरव राय की टीम ने तैयार किया है. सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए रेगिस्तान, बर्फीली पहाड़ियों और दुर्गम जंगलों में घंटों भारी हथियार व सामान लेकर गश्त करते हैं. लंबे समय तक 60 किलो तक वजन उठाने से जवानों को घुटने और पीठ दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

इस परेशानी को कम करने के लिए मूल रूप से कोटा निवासी इंजीनियर गौरव ने ‘हनुमंता एक्सो-1’ कवच तैयार किया है. दावा है कि यह उपकरण जवानों के कंधों पर लदे वजन को 80-90 प्रतिशत तक कम कर सकता है. यानी 60 किलो वजन उठाने वाले जवान को उपकरण लगाने के बाद करीब 10 किलो ही भार महसूस होगा. इसका भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय के अधिकारियों के माध्यम से सेना और डीआरडीओ के समक्ष प्रेजेंटेशन हो चुका है. सेना ने इसे उपयोगी बताया है और एआई से लैस करने का सुझाव दिया है. पेटेंट की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है. इंजीनियर गौरव की टीम ने महज डेढ़ महीने में इसका एडवांस वर्जन ‘हनुमंता एक्सो 1.2’ विकसित किया है. इसका ट्रायल भी किया जा चुका है और अब तकनीक को सेना की जरूरतों के मुताबिक लगातार बेहतर किया जा रहा है.

डेढ़ महीने में तैयार हुआ एडवांस वर्जन

इस तकनीक पर काम कर रही टीम ने करीब डेढ़ महीने में ह्यूमन एक्सोसूट का नया एडवांस वर्जन तैयार किया है. इसे ‘हनुमंता एक्सो 1.2’ नाम दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार इसका सफल ट्रायल भी किया जा चुका है. खास बात यह है कि इसके शुरुआती मॉडल का वजन करीब 11.1 किलो था, जिसे तकनीकी सुधार के बाद घटाकर 7.5 किलो तक किया गया है. वजन कम होने के बावजूद एक्सोसूट की क्षमता को सैनिकों के भारी सामान उठाने और लंबे समय तक शारीरिक मेहनत करने के अनुकूल बनाया जा रहा है. जवान इसे पहनकर अपने साथ भारी सैन्य सामग्री ले जाने के दौरान कम थकान महसूस कर सकें, यही इस तकनीक के विकास का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है.

100 से 200 किलो तक का वजन उठाने में मददगार होंगे

ह्यूमन एक्सोसूट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि इसे पहनने के बाद जवान 100 से 200 किलो तक का सामान लेकर भी चल और दौड़ सकें. इसमें हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हो सकते हैं. भारी वजन के कारण जवानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त शारीरिक दबाव को कम करना इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है. सरहदी इलाकों में सैनिकों को कई बार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जरूरी सैन्य सामग्री के साथ लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे में एक्सोसूट तकनीक जवानों की गतिशीलता और कार्यक्षमता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है.

कोटा में निर्माण और सोनीपत में रही टेस्टिंग

इस ह्यूमन एक्सोसूट का निर्माण कोटा में किया जा रहा है, जबकि इसकी लैब टेस्टिंग और तकनीकी सुधार का काम सोनीपत में हो रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टीम आईआईटी दिल्ली से जुड़े अटल इन्क्यूबेशन सेंटर, सोनीपत के साथ काम कर रही है. यहीं एक्सोसूट की लैब टेस्टिंग और तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं. टीम सेना की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसके नए मॉडल तैयार कर रही है. यानी तकनीक को सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि सैनिकों के वास्तविक इस्तेमाल के मुताबिक लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.

गौरव को पिता से मिला उपकरण बनाने का आइडिया

‘हनुमंता एक्सो-1’ डेल्टा स्प्रिंग सिस्टम पर काम करता है. यह पीठ पर लदे भार को जूतों के जरिए जमीन की ओर भेजता है, ठीक वैसे ही जैसे बिजली में अर्थिंग होती है. स्प्रिंग से बना यह उपकरण शरीर के मसल्स सिस्टम की तरह काम करते हुए पैरों की मूवमेंट के साथ एडजस्ट होता है और वजन कम करने में मदद करता है. 2023 में एआईसी आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में इसके निर्माण पर काम शुरू हुआ था, जो अब पूरा हो चुका है. गौरव को इस उपकरण को बनाने विचार उनके पिता सतेंद्र राय से मिला, जो सेना में अधिकारी रह चुके हैं. लंबे समय तक भारी बैग लेकर गश्त करने से उन्हें आज भी घुटने और पीठ दर्द की समस्या है. जवानों की परेशानी देखकर गौरव ने समाधान तैयार करने का फैसला किया.

रक्षा जरूरतों के लिए नई तकनीक पर जोर

ह्यूमन एक्सोसूट का विकास रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है. आईडीईएक्स और अदिति प्रोग्राम के तहत विकसित हो रही यह तकनीक इस बात का उदाहरण है कि देश की रक्षा जरूरतों के लिए नई तकनीक और इंजीनियरिंग समाधान तैयार किए जा रहे हैं. फिलहाल इसका फोकस जवानों पर पड़ने वाले शारीरिक दबाव को कम करते हुए भारी भार के साथ उनकी क्षमता बढ़ाने पर है. आगे इसके नए मॉडल सेना की जरूरतों और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर विकसित किए जा रहे हैं. ऐसे में कोटा में तैयार हो रहा यह ह्यूमन एक्सोसूट आने वाले समय में सैनिकों के लिए एक उपयोगी तकनीकी विकल्प बन सकता है.

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