85 की उम्र, 15 साल से पैरालाइसिस, अस्पताल से एंबुलेंस में बूथ पहुंचे और बोले- वोट जरूरी है

कोटपूतली-बहरोड़: राजस्थान के बहरोड़ में निकाय चुनाव के दौरान लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने मतदान केंद्र पर मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया. वार्ड नंबर 40 के बूथ संख्या 47 पर 85 वर्षीय बुजुर्ग अस्पताल से सीधे एंबुलेंस के जरिए मतदान करने पहुंचे. पिछले करीब 15 साल से पैरालाइसिस से जूझ रहे बुजुर्ग की तबीयत ठीक नहीं थी और वे अस्पताल में उपचार करा रहे थे. इसके बावजूद उन्होंने मतदान करने का फैसला लिया.
एंबुलेंस से मतदान केंद्र पहुंचने के बाद उन्हें बूथ तक ले जाया गया, जहां उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. उनकी इस दृढ़ता ने यह संदेश दिया कि मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी भी है. बुजुर्ग ने मतदान के बाद कहा कि बीमारी, उम्र या किसी भी तरह की परेशानी मतदान के कर्तव्य के सामने बड़ी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में मतदान से दूर न रहें और अपने वोट का इस्तेमाल जरूर करें.
15 साल से पैरालाइसिस, फिर भी वोट के लिए निकले
85 वर्षीय बुजुर्ग पिछले करीब 15 वर्षों से पैरालाइसिस से पीड़ित हैं. उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बनी हुई हैं. निकाय चुनाव के दिन उनकी तबीयत भी ठीक नहीं थी और वे अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे थे. लेकिन मतदान का दिन होने के कारण उन्होंने अपना वोट डालने का फैसला किया. इसके बाद उन्हें अस्पताल से एंबुलेंस के जरिए सीधे मतदान केंद्र लाया गया. आमतौर पर ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपनी परेशानी को देखते हुए मतदान टाल सकता है, लेकिन बुजुर्ग ने ऐसा नहीं किया. वे एंबुलेंस से बूथ संख्या 47 पहुंचे और मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
एंबुलेंस से बूथ तक पहुंचे, फिर किया मतदान
बहरोड़ के वार्ड नंबर 40 स्थित बूथ संख्या 47 पर जब एंबुलेंस पहुंची तो लोगों का ध्यान उसकी ओर गया. एंबुलेंस से 85 वर्षीय बुजुर्ग को मतदान केंद्र तक पहुंचाया गया. शारीरिक परेशानी के बावजूद उन्होंने मतदान करने की इच्छा जताई और अपनी जिम्मेदारी पूरी की. उनके बूथ तक पहुंचने और मतदान करने के दौरान वहां मौजूद लोगों ने भी उनकी हिम्मत की सराहना की. बुजुर्ग ने यह साबित किया कि मतदान के लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति भी जरूरी है.
बोले- एक वोट की भी अहमियत
मतदान के बाद बुजुर्ग ने लोगों से मतदान जरूर करने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत होती है. बीमारी या किसी परेशानी के कारण लोगों को अपने मताधिकार से पीछे नहीं हटना चाहिए. उन्होंने कहा कि मतदान करना सभी का कर्तव्य है और हर व्यक्ति को अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहिए. 85 वर्षीय बुजुर्ग की यह पहल मतदान केंद्र पर मौजूद दूसरे मतदाताओं के लिए भी प्रेरणा बनी. उनकी कहानी ने यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उम्र और परिस्थितियां भले ही चुनौती बनें, लेकिन नागरिक जिम्मेदारी निभाने का जज्बा उससे बड़ा हो सकता है.
अस्पताल से मतदान केंद्र तक पहुंची लोकतंत्र की तस्वीर
निकाय चुनाव के बीच बहरोड़ में सामने आया यह मामला सिर्फ एक बुजुर्ग के मतदान करने की घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है. 85 साल की उम्र, 15 साल से पैरालाइसिस और अस्पताल में उपचार के बावजूद बुजुर्ग का एंबुलेंस से मतदान केंद्र पहुंचना लोगों के लिए खास संदेश छोड़ गया. उन्होंने अपने वोट का इस्तेमाल कर यह बताया कि मतदान को लेकर जागरूकता केवल भाषणों या अपीलों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारना जरूरी है.



