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Success Story: सड़क हादसे में खोया दायां हाथ, फिर भी नहीं हारी हिम्मत, 13 साल की केसर ने 6 मेडल जीत रचा इतिहास

Last Updated:September 13, 2026, 06:08 IST

Shooter Kesar Parikh Success Story: राजस्थान की 13 वर्षीय निशानेबाज केसर पारिक ने अपनी मेहनत और जज्बे से बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बचपन में सड़क हादसे में दायां हाथ गंवाने के बावजूद केसर ने हौसला नहीं खोया और शूटिंग को अपना जुनून बना लिया. महज 6 से 8 महीने पहले शूटिंग शुरू करने वाली केसर ने देहरादून में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 गोल्ड और 1 सिल्वर समेत 6 मेडल जीते. जयपुर की एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में वह रोजाना 6 से 8 घंटे ट्रेनिंग करती हैं. उनके कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में केसर तकनीक, शरीर का संतुलन और मानसिक मजबूती पर लगातार काम कर रही हैं. योगेश शेखावत पैरा शूटिंग से जुड़े हैं और उनके मार्गदर्शन में मोना अग्रवाल ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. केसर की सफलता साबित करती है कि शारीरिक चुनौती सपनों की राह रोक नहीं सकती.

कुछ कहानियां सिर्फ जीत और हार तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि अपने जज्बे से दूसरों को रास्ता दिखाती हैं. राजस्थान की 13 वर्षीय निशानेबाज केसर पारिक की कहानी भी ऐसी ही है. बचपन में सड़क हादसे में अपना दायां हाथ गंवाने वाली केसर ने मुश्किल परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. महज 6 से 8 महीने पहले शूटिंग शुरू करने वाली केसर ने 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में 5 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीता है.

उत्तराखंड के देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज की त्रिशूल शूटिंग रेंज में आयोजित इस प्रतियोगिता में केसर ने राइफल इवेंट में अपनी प्रतिभा का दम दिखाया. महज 13 साल की उम्र में एक साथ 6 मेडल जीते हैं. इससे पहले केसर ने पांच बार गोल्ड मेडल और एक बार सिल्वर मेडल हासिल कर चुकी है. केसर की कहानी का सबसे खास पहलू यह है कि उसने शूटिंग की शुरुआत बहुत देर से नहीं, बल्कि बेहद कम समय पहले की थी.

करीब 6 से 8 महीने पहले इस खेल को अपनाने के बाद उसने डेली प्रैक्टिस को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बना लिया. जयपुर स्थित एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में वह रोजाना करीब 6 से 8 घंटे ट्रेनिंग करती है. प्रैक्टिस के दौरान निशाने पर शरीर का संतुलन, तकनीक और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान देती है. वह हर उन छोटी-छोटी बारीकियां का ध्यान रखती है जो बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी काम काम में लेते हैं.

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केसर की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया था, जिसने किसी भी बच्चे का हौसला तोड़ सकता था. बचपन में सड़क दुर्घटना के दौरान उसने अपना दायां हाथ खो दिया. लेकिन परिवार ने उसे कभी खुद को दूसरों से कम समझने नहीं दिया. माता-पिता ने लगातार उसका हौसला बढ़ाया और उसे अपने सपनों के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. इसी आत्मविश्वास के साथ केसर ने शूटिंग को अपनाया और अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि शारीरिक चुनौती किसी खिलाड़ी के सपनों की राह में अंतिम बाधा नहीं होती.

केसर की इस सफलता के पीछे उसके माता-पिता के सहयोग के साथ कोच योगेश शेखावत की मेहनत भी अहम है. कोच के अनुसार केसर अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी है. वह नई तकनीकों को तेजी से समझती है और उन्हें अपने प्रैक्टिस में शामिल करने की कोशिश करती है. शूटिंग के प्रति उसका जुनून और लगातार सीखने की इच्छा उसे अलग बनाती है. इससे पहले वह राजस्थान स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में भी केसर 4 मेडल जीते थे. अब नॉर्थ जोन में मेडल को मिलकर 6 मेडल जीत चुकी है.

केसर की कहानी में एक और खास कड़ी उसके कोच योगेश शेखावत से जुड़ी है. योगेश का जुड़ाव पैरा शूटिंग से है. उनके मार्गदर्शन में पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था. ऐसे में केसर का सफर भी एक लंबी और सफल खेल यात्रा की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. परिवार चाहता है कि केसर आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीते.

First Published :

September 13, 2026, 06:08 IST

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