नमक की झील में लौटे गुलाबी मेहमान, लाखों फ्लेमिंगो के झुंड ने बदला पूरा नजारा

नागौर: राजस्थान की मशहूर सांभर झील में इन दिनों एक बार फिर विदेशी मेहमानों की चहचहाहट सुनाई देने लगी है. दूर-दराज के ठंडे इलाकों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी यहां पहुंचने लगे हैं. सबसे खास आकर्षण फ्लेमिंगो हैं. झील के खारे पानी के बीच जब हजारों-लाखों फ्लेमिंगो एक साथ नजर आते हैं, तो पूरा इलाका मानो गुलाबी रंग में रंगा दिखाई देता है. यही नजारा सांभर झील को सर्दियों में पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खास बना देता है.
सांभर झील हर साल विदेशी प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बनती है. रूस, साइबेरिया और मंगोलिया जैसे बेहद ठंडे क्षेत्रों से पक्षी सर्दियों के मौसम में यहां पहुंचते हैं. अक्टूबर के अंत से इनकी संख्या बढ़ने लगती है और मार्च तक झील के आसपास इनका डेरा बना रहता है. कड़ाके की सर्दियों से राहत के साथ इन्हें यहां भोजन और अनुकूल वातावरण भी मिलता है.
240 वर्ग किलोमीटर में फैली झील, कई प्रजातियों का बसेरा
करीब 240 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली सांभर झील जयपुर, नागौर और अजमेर जिलों तक फैली हुई है. यहां फ्लेमिंगो के अलावा पेलिकन, शॉवलर, वेडर, कॉमन क्रेन, पिनटेल, बार-हेडेड गीज, ग्रे लेग गीज, टफ्टेड डक और पेरेग्रीन फाल्कन जैसी कई प्रजातियां दिखाई देती हैं. सर्दियों के दौरान झील और आसपास का क्षेत्र प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो जाता है.
खारे पानी में मिलता है खास भोजन
पक्षी विशेषज्ञ गौरव दाधीच के मुताबिक सांभर झील का खारा पानी प्रवासी पक्षियों के लिए खास तरह का आवास तैयार करता है. यहां मौजूद शैवाल और छोटे जलीय जीव इनके लिए प्रमुख भोजन हैं. फ्लेमिंगो अपनी लंबी और मुड़ी हुई चोंच से पानी को छानकर भोजन करते हैं. इनके भोजन में मौजूद बीटा-कैरोटीन इनके शरीर के गुलाबी रंग को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.
एक साथ उड़ते हैं तो बनता है अद्भुत नजारा
सांभर झील की सबसे बड़ी खूबसूरती तब सामने आती है, जब सैकड़ों-हजारों फ्लेमिंगो एक साथ पानी में उतरते हैं या अचानक आसमान की ओर उड़ान भरते हैं. झील के नीले-खारे पानी के बीच गुलाबी पक्षियों के झुंड पर्यटकों के लिए यादगार पल बन जाते हैं. देश-विदेश से आने वाले पक्षी प्रेमी इस नजारे को कैमरे में कैद करने के लिए घंटों झील के आसपास बिताते हैं. फ्लेमिंगो के साथ इस मौसम में सारस, कई प्रजातियों की बत्तखें और अलग-अलग वेडर पक्षी भी यहां नजर आते हैं. यही वजह है कि सर्दियों के महीनों में सांभर झील सिर्फ नमक उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि प्रवासी पक्षियों के अनोखे संसार के लिए भी पहचानी जाती है.



