Sikar News: बच्चों के जटिल इलाज के लिए जनाना अस्पताल में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी-कार्डियोलॉजी की तैयारी

Last Updated:September 13, 2026, 16:39 IST
Sikar News: सीकर के जनाना अस्पताल में अब डॉक्टरों की तैनाती स्वीकृत पदों के बजाय मरीजों के वर्कलोड के आधार पर करने की तैयारी है. प्रत्येक यूनिट का अलग ड्यूटी रोस्टर बनेगा, जिससे मरीजों की संख्या और डॉक्टरों की उपलब्धता की नियमित निगरानी होगी. साथ ही पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और नवजात देखभाल जैसी विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार की भी योजना है.
सीकर जिला मुख्यालय के नेहरू पार्क स्थित जनाना हॉस्पिटल में अब एक्सपर्ट डाक्टरों की तैनाती केवल स्वीकृत पदों के आधार पर नहीं होगी. हॉस्पिटल में जिस यूनिट में मरीजों का दबाव अधिक रहेगा, वहां उसी अनुपात में डॉक्टरों की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए प्रत्येक यूनिट का स्पष्ट ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जाएगा. रोस्टर के जरिए डॉक्टरों की उपलब्धता, मरीजों की संख्या और यूनिट पर पड़ने वाले कार्यभार की नियमित निगरानी की जाएगी. इससे जरूरत के अनुसार डॉक्टरों का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
आउटडोर में सीनियर डॉक्टरों को लगाने पर जोर दिया जाएगा. प्रत्येक यूनिट के लिए अलग रोस्टर तैयार होने से यह पता रहेगा कि किस समय कौन सा डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद है. खास तौर पर मरीजों की अधिक संख्या वाले समय में डॉक्टरों की उपलब्धता का भी सही पता चल जाएगा. इसके अलावा इससे एक्सपर्ट डॉक्टरों से परामर्श लेने में आसानी होगी और अस्पताल की व्यवस्थाओं को भी वर्कलोड के अनुसार बदला जा सकेगा. जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों की यूनिट को पुनर्गठित करने का ऑप्शन भी रहेगा.
जनाना अस्पताल में एक्सपर्ट डॉक्टरों की सुविधाओं का विस्तार करने की भी तैयारी है. यहां पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी जैसी सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. इन सेवाओं के शुरू होने से बच्चों से जुड़ी गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए परिजनों को बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ेगा. फिलहाल इन सेवाओं के लिए कई मरीजों को जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों पर रेफर किया जाता है. स्थानीय स्तर पर ये सुविधा मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सकेगी.
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इसके अलावा हॉस्पिटल में नवजात शिशुओं की देखभाल को लेकर भी व्यवस्थाएं मजबूत की जाएंगी. प्रसव के बाद नवजात की तत्काल देखभाल, कमजोर नवजात की समय पर पहचान और न्यूबॉर्न केयर यूनिट के संचालन के लिए जरूरी संसाधनों की सूची तैयार कर उपलब्ध करवाई जाएगी. इससे जन्म के तुरंत बाद ऐसे बच्चों की पहचान आसन हो जाएगी जिन्हें अतिरिक्त चिकित्सकीय निगरानी या उपचार की आवश्यकता हो सकती है. गंभीर स्थिति वाले नवजात को समय पर उपचार मिलने से जटिलताओं को कम करने में मदद मिलेगी और रेफरल की जरूरत भी घट सकती है.
पहले चरण में प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों में संबंधित विशेषज्ञ विभाग विकसित किए जाएंगे. इसके बाद राजस्थान मेडिकल एज्यूकेशन सोसाइटी से जुड़े डॉक्टरों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. नई सुविधाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए केवल चिकित्सकों को ही नहीं, बल्कि नर्सिंग स्टाफ को भी ट्रेंड किया जाएगा. खासकर गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी, इमरजेंसी स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया और आवश्यक उपचार प्रक्रिया को लेकर नर्सिंग स्टाफ की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा.
रोस्टर व्यवस्था से हॉस्पिटल मैनेजमेंट को मरीजों और डॉक्टरों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी. इसमें यह देखा जा सकेगा कि किसी यूनिट में कितने डॉक्टर मौजूद हैं, रोजाना कितने मरीज देखे जा रहे हैं और किस यूनिट में डॉक्टर को नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है. यदि किसी यूनिट में लगातार मरीजों का दबाव अधिक रहता है तो वहां मौजूद डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. इसी तरह कम वर्कलोड वाली यूनिट से आवश्यकता के अनुसार डॉक्टरों की व्यवस्था दूसरी यूनिट में की जा सकेगी.
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने प्रदेश स्तर से मांगी गई जानकारी के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. उपलब्ध संसाधनों और हॉस्पिटल में जरूरी सुविधाओं की जानकारी मुख्यालय को भेजी जाएगी. मरीजों की संख्या के अनुसार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने के लिए रोस्टर तैयार किया जाएगा. संबंधित विशेषज्ञ विभाग शुरू करने का प्रस्ताव भी तैयार कर मुख्यालय भेजा जाएगा. मेडिकल कॉलेज सीकर के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार के अनुसार अस्पताल की व्यवस्था को मरीजों की जरूरत और वर्कलोड के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा
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September 13, 2026, 16:39 IST



