शुरू हुई निकाय प्रमुख बनाने की जंग, अब चलेगी निर्दलीयों की झपट्टामार राजनीति

जयपुर. राजस्थान में निकाय चुनाव नतीजे आ गए हैं. प्रदेश के 309 निकायों में हुए चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. दूसरे नंबर पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस रही है. तीसरे नंबर पर निर्दलीय रहे हैं. इन चुनावों में निर्दलियों ने झंडे गाड़ दिए हैं और बीजेपी कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी है. सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर समेत जोधपुर, अजमेर और पाली जैसे नगर निगमों में महापौर की ताजपोशी में निर्दलीय अहम भूमिका निभाएंगे. भरतपुर में तो कुल सीटों में से आधे से ज्यादा निर्दलीय जीते हैं. वहां बीजेपी केवल 20 सीटों पर ही सिमट गई.
राजस्थान के 10 नगर निगमों में से सत्तारुढ़ बीजेपी को महज चार जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा निगम में स्पष्ट बहुमत मिला है. जबकि कांग्रेस को केवल एक ही निगम बीकानेर में उसके पक्ष में जनादेश मिला है. सूबे के पांच बड़े निगम जोधपुर, भरतपुर, अजमेर, पाली और अलवर में बीजेपी और कांग्रेस किसी को भी साफ बहुमत नहीं मिला है. इन निगमों में निर्दलीयों की भूमिका अहम हो गई है. केवल इन पांच निगमों में ही नहीं बल्कि प्रदेश की दर्जनों नगर परिषद और नगरपालिकाओं में भी हालत कमोबेश ऐसे ही हैं.
प्रदेश के करीब 145 निकायों में किसी को भी बहुमत नहीं मिला हैपांच नगर निगमों समेत प्रदेश के करीब 145 निकाय ऐसे हैं जहां किसी को भी साफ बहुमत नहीं मिला है. इन सब में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों की नजरें निर्दलीयों पर टिकी है. हालांकि मतदान के पहले चरण के बाद से ही जीताऊ निर्दलीयों और बागियों की बीजेपी तथा कांग्रेस ने बाड़ाबंदी शुरू कर दी थी. लेकिन काउंटिग के बाद हालात और बदल गए हैं. कई जीताऊ प्रत्याशी चुनाव हार गए और दूसरे प्रत्याशी जीत गए. अब बाड़ाबंदी में भरे गए हारे हुए प्रत्याशियों को बाहर कर जीते हुए प्रत्याशियों की छीना झपटी शुरू हो गई है.
बिना बहुमत वाले 05 नगर निगमों की यह है स्थिति
अजमेर कुल वार्ड – 80कांग्रेस- 37बीजेपी- 32निर्दलीय- 11
जोधपुर कुल वार्ड वार्ड – 100बीजेपी- 44कांग्रेस- 44निर्दलीय- 10आरएलपी- 1
भरतपुर कुल वार्ड – 65भाजपा- 20कांग्रेस- 07निर्दलीय- 36बसपा- 01आरएलपी- 01
पाली कुल वार्ड – 65भाजपा- 21कांग्रेस- 29निर्दलीय- 29
अलवर कुल वार्ड – 65बीजेपी- 28कांग्रेस- 23निर्दलीय- 13बसपा- 01
साम, दाम, दंड और भेद’ सब अपनाए जाएंगेनिकाय प्रमुखों के चुनाव एक सप्ताह बाद 21 सितंबर को होंगे. तब तक दोनों पार्टियां अपने-अपने प्रत्याशियों के साथ अन्य समर्थित प्रत्याशियों को बाड़ाबंदी में रखेगी. इस बीच दोनों ही पार्टियों में ज्यादा से ज्यादा निर्दलीयों को अपने-अपने बाड़े में लाने की जद्दोजहद रहेगी. बीजेपी और कांग्रेस में से जो भी पार्टी ज्यादा निर्दलीयों को अपने फेवर में करेगी वो जीत में रहेगी. इसके लिए ‘साम, दाम, दंड और भेद’ सब अपनाए जाएंगे. अब इस सप्ताह तक लुकाछिपी का खेल चलेगा. ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ भी होगी. निर्दलीयों को पद के लालच से लेकर तमाम तरह के ऑफर भी दिए जाएंगे.
पूरी डील मौखिक और विश्वास पर टिकी हैआने वाला एक सप्ताह निर्दलीयों की तरफ से भी मोल भाव वाला रहेगा. कौनसी पार्टी निकाय में पद देगी या फिर अपने कैम्प में शामिल करने के बाद क्या देगी पूरा गणित इसी पर टिका है. यह कोई लिखा पढ़ी वाली डील नहीं है बल्कि मौखिक और विश्वास पर टिका सौदा है. हालांकि दोनों पार्टियां अभी ज्यादा से ज्यादा बोर्ड बनाने के दावा कर रही है लेकिन कौन कितने बोर्ड बना पाएगा इसका खुलासा आगामी 21 सितंबर को होगा. तब तक मैदान में निर्दलीय ही किंगमेकर बने रहेंगे.



