Alwar News I महंगे प्याज बीज ने बढ़ाई किसानों की चिंता, खेत में ही कण तैयार कर बचा रहे हजारों रुपए

Last Updated:September 15, 2026, 17:34 IST
Alwar News: अलवर और खैरथल-तिजारा में लाल प्याज की खेती को लेकर किसानों का रुझान फिर बढ़ा है. इस सीजन 14 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई का अनुमान है. महंगे बीज से बढ़ी लागत के बीच 50 फीसदी से ज्यादा किसान खेत में ही प्याज का कण तैयार कर रहे हैं. वहीं बारिश और नमी के चलते फसल में रोगों का खतरा भी बढ़ गया है.
अलवर. राजस्थान में लाल प्याज की खेती सबसे ज्यादा अलवर में की जाती है, ऐसे में किस प्याज की बुवाई करने में लगे हुए हैं. अलवर और खैरथल-तिजारा का तीखा लाल प्याज देशभर में अपनी खास पहचान रखता है. जिले के किसान हर साल बड़ी संख्या में प्याज़ की बुवाई करते ऐसे बीते साल मंडी में कम भाव मिलने के कारण घाटा उठाने के बावजूद इस बार क्षेत्र के किसानों का रुझान प्याज की खेती की ओर फिर बढ़ा है.
अकेले खैरथल तिजारा जिले में इस सीजन में जिले में 14 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में बुवाई होने का अनुमान है. फिलहाल 70 प्रतिशत से अधिक किसान खेतों में प्याज का कण लगा चुके हैं, जबकि शेष किसान गांठी लगाने का काम पूरा करने में जुटे हैं. इस साल प्याज की गांठी (बीज) के भाव में भारी उछाल आया है. जिले के किशनगढ़ बास में बड़ी संख्या में अस्थाई बीज व्यापारी बड़े बड़े ट्रकों में भरकर बीज लेकर पहुंच रहे हैं और किसानों को समय पर बीज उपलब्ध करवा रहे हैं.
किसान अपने खेतों में ही प्याज का कण कर रहे तैयार
जिले में पिछले वर्ष जो बीज 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल था, वह इस बार बढ़कर 6500 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. महंगे बीज के कारण बढ़ी लागत से बचने के लिए किसानों ने आत्मनिर्भर तरीका निकाला है. अब 50 प्रतिशत से अधिक किसान अपने खेतों में ही प्याज का कण तैयार कर रहे हैं. किसान अपनी जरूरत के मुताबिक कण रखकर बाकी कण अच्छे मुनाफे पर अन्य किसानों को बेच देते हैं. इससे बाहरी महंगे कण की निर्भरता खत्म हुई है. बाजार भाव कम रहने की स्थिति में भी किसानों को सीधा वित्तीय नुकसान कम झेलना पड़ता है.
किसान शिवचरण यादव, हवा सिंह, फराज खान सहित अन्य किसानों ने बताया कि एक बीघा में करीब चार से पांच क्विंटल कण लगता है. कीटनाशक, खाद और मजदूरी सहित कुल लागत करीब 50 से 60 हजार रुपए प्रति बीघा तक पहुंच जाती है. पिछले साल के नुकसान की भरपाई के लिए इस बार बेहतर बाजार भाव की आस में बुवाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है. लगातार हो रही बारिश और हवा में नमी की अधिकता से प्याज की फसल में बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है. सहायक कृषि अधिकारी महेश खेरिया के अनुसार इस मौसम में फसल में एंथेक्नोज (ट्विस्टर ब्लाइट) और कंद सड़न रोग का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है. ऐसे में खेतों में पानी रुकने न दें और जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था रखें. मौसम साफ होते ही कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उपयुक्त फफूंदनाशी (फंगीसाइड) का छिड़काव करें ताकि फसल को सड़न से बचाया जा सके.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Alwar,Rajasthan
First Published :
September 15, 2026, 17:34 IST



