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हाथ से बार-बार गिर जाता है फोन, लापरवाही या कमजोरी नहीं, स्पाइनल कॉर्ड में हो सकता है गंभीर खतरा

Last Updated:September 15, 2026, 18:15 IST

Dropping Phone from Hand: क्या आपके हाथ से अक्सर मोबाइल फोन गिर जाता है या आपको शर्ट के बटन बंद करने में परेशानी होती है या आपकी लिखावट में अचानक बदलाव आने लगा है. अगर ये सब आपके साथ हो रहा है तो आपको तुरंत सतर्क होने की जरूरत है. क्योंकि ये सारी गलतियां आपकी लापरवाही से नहीं हो रही है. इसके पीछे आपकी रीढ़ की हड्डी जिम्मेदार है. इसका सीधा मतलब है आपकी रीढ़ की हड्डी कमजोर हो गई है. इसका तुरंत इलाज कराने की जरूरत है.हाथ से बार-बार गिर जाता है फोन, लापरवाही या कमजोरी नहीं, स्पाइनल कॉर्ड में Zoomफोन हाथों से क्यों छूट जाता है.

Dropping Phone from Hand :  कभी-कभी हमारे हाथों से फोन पर ग्रिप कम हो जाता है और वह गिर जाता है. इसी तरह कभी-कभी शर्ट का बटन लगाने में जूझना पड़ता है. वहीं कुछ लिखते हैं तो ऊंगलियों पर सही से ग्रिफ नहीं बन पाता है. ऐसे में अक्सर आपको लोग अनाड़ी कहेंगे. आपको भी लगेगा कि यह हमारी गलती है. लेकिन जरा ठहरिए, ये आपकी गलती नहीं है. इसमें बीमारी छिपी हुई है जिसके कारण आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है. यह बीमारी है स्पाइनल कॉर्ड की. यानी रीढ़ की हड्डियों की कमजोरी की. आखिर ऐसा क्यों होता है और इसके लिए क्या करना चाहिए, आइए इसके बारे में जानते हैं.

सर्वाइकल मायलोपैथी है वजह
एचटी की खबर में स्पाइन सर्जरी के डॉ. हितेश गर्ग ने इस ग्रिप की खामियों के बारे में बताया है. डॉ. हितेश शर्मा बताते हैं कि अगर हाथ से फोन गिरने की घटना बार-बार हो रही है और इसके साथ हाथों में सुन्नपन, झनझनाहट और चलने-फिरने में कठिनाई भी हो तो असल समस्या हाथों में नहीं बल्कि गर्दन यानी रीढ़ की हड्डी में हो सकती है. हाथों का यह अनाड़ीपन या ग्रिप कमजोर होना रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या सर्वाइकल मायलोपैथी की ओर इशारा कर सकता है. सर्वाइकल मायलोपैथी तब होती है जब गर्दन यानी सर्वाइकल स्पाइन के पास रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है या वह दब जाती है. हमारे शरीर में स्पाइनल कॉर्ड कम्युनिकेशन का सबसे बड़ा रास्ता है. ब्रेन से अधिकांश तंत्रिकाएं या नसें इसी से होकर गुजरती है शरीर के विभिन्न भागों से संदेशों का आदान-प्रदान करती है. दिमाग के साथ हाथ, पैर और पंजों के बीच कम्युनिकेशन का मुख्य मार्ग यही है. इसी रास्ते दिमाग से सारे संदेश आते हैं दिमाग में सारे संदेश जाते हैं. जब इसमें खिंचाव आता है या यह किसी कारण दब जाती है तो संदेशों का आदान-प्रदान कम हो जाता है, इससे हाथ और पंजों पर संतुलन भी कम हो जाता है. नसों से संदेश नहीं पहुंचने के कारण ये अंग सही से काम नहीं कर पाते हैं. अगर सोने में सिर की स्थिति ठीक नहीं है, अर्थराइटिस है, रीढ़ की हड्डियों में कोई दिक्कत आ गई, डिस्क में प्रोब्लम है, डिस्क बल्ज हो गई है, एक तरफ हड्डियां बढ़ने लगी है या उम्र हो रही है तो इन स्थितियों में सर्वाइकल मायलोपैथी की बीमारी होती है.

सर्वाइकल मायलोपैथी के लक्षण

सर्वाइकल मायलोपैथी और सर्वाइकल स्पॉन्डिलोटिक मायलोपैथी में मुख्य रूप से गर्दन में दर्द और अकड़न होती है. ऐसी स्थिति में हाथों पर संतुलन कम होने लगता है जिसके कारण हाथों के पंजों में ग्रिप सही से नहीं बनता. इसके साथ ही हाथों और बाहों में सुन्नपन या झनझनाहट भी कभी-कभी महसूस हो सकती है. इसके अलावा मांसपेशियों में कमजोरी, संतुलन बिगड़ना, चलने-फिरने में कठिनाई होना और बारीक कामों जैसे शर्ट के बटन बंद करना या चम्मच, कांटा पकड़ने में दिक्कत होना या हाथों से ग्रिप खोना जैसी समस्याएं आ सकती हैं. इतना ही नहीं यह पैरों को भी प्रभावित कर सकता है. क्योंकि रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड से ही तंत्रिकाएं पैरों तक जाती हैं जो ब्रेन से संदेशों का आदान-प्रदान करती है.

इसका इलाज क्या है

डॉ. हितेश शर्मा कहते हैं कि सर्वाइकल मायलोपैथी का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी गंभीर है. इसकी शुरुआती जांच बहुत जरूरी है. एमआरआई से यह पता लगाया जाता है कि इसका असल कारण क्या है. कुछ लोगों को फिजियोथेरेपी के माध्यम से यह बीमारी ठीक हो सकती है जबकि कुछ लोगों को सर्जरी कराने तक की नौबत आ सकती है. कुछ लोगों को लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है. इसलिए शुरुआत से इसका मैनेज करना बहुत जरूरी है.

इस बीमारी से बचें कैसे

कुछ मामलों में सर्वाइकल मायलोपैथी उम्र बढ़ने के कारण होती है, इसे आप रोक नहीं सकते लेकिन शरीर को फुर्तीला बनाकर इसे मैनेज कर सकते हैं. इससे बचने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप अपनी रीढ़ को हमेशा सुरक्षित रखने की कोशिश करें. इस पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव न डालें. इसलिए हमेशा रीढ़ की हड्डी को सीधी कर रखें. सोते समय सही तकिए का इस्तेमाल करें. मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए मोबाइल फोन से बचें. रोजाना एक्सरसाइज भी इस बीमारी से बचा सकती है.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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September 15, 2026, 18:15 IST

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