हुनर को बनाया कमाई का जरिया, घर से शुरू किया काम, अब 17 महिलाओं का सहारा बनीं द्वारिका गौड़

Last Updated:September 15, 2026, 17:06 IST
Kota Hindi News: कोटा की द्वारिका गौड़ ने अपने हुनर को कमाई का जरिया बनाकर घर से काम शुरू किया. धीरे-धीरे उनका यह प्रयास एक बड़े काम में बदल गया और परिवार के लिए सहारा बना. खास बात यह है कि आज द्वारिका गौड़ 17 महिलाओं के भरण-पोषण में मदद कर रही हैं. उनकी कहानी महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने, हुनर को रोजगार में बदलने और छोटे स्तर से शुरुआत कर सफलता हासिल करने की प्रेरणा देती है.
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कोटा। महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की जब भी बात होती है, तो कोटा की द्वारिका गौड़ का नाम एक प्रेरणादायी मिसाल के रूप में सामने आता है. कोटा शहर में अपने बेहतरीन बुटिक वर्क और डिजाइनिंग के लिए पहचानी जाने वाली द्वारिका गौड़ ने साबित कर दिया है कि यदि हौसला बुलंद हो, तो शून्य से भी शिखर का सफर तय किया जा सकता है. बूंदी जिले के हिंडोली कस्बे की मूल निवासी द्वारिका गौड़ ने आज अपने हुनर के दम पर न सिर्फ अपने परिवार को मजबूत आर्थिक संबल दिया है, बल्कि 16-17 अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उनके परिवारों का सहारा बनी हैं.
द्वारिका गौड़ बताती हैं कि उनकी शादी 1983 में हुई थी. हायर सेकेंडरी के बाद कॉलेज के दूसरे साल में पढ़ाई छूट गई थी. बचपन में मां के साथ हाथ बंटाने का शौक था और इच्छा शिक्षक बनने की थी, जो परिस्थितिजन्य कारणों से पूरी नहीं हो सकी. ऐसे में उन्होंने अपने सिलाई के हुनर को ही पेशा बना लिया. शुरुआती दिनों को याद करते हुए वे बताती हैं, “तब कारोबार के नाम पर सिर्फ एक सिलाई मशीन थी और एक रुपये की धागे की गिट्टी. घर से ही काम शुरू किया था, कोई बड़ा फंड नहीं लगाया था. ग्राहकों की पसंद से काम आगे बढ़ा.”
बढ़ा दायरा तो खोली शॉप, 17 महिलाओं को मिला रोजगारजैसे-जैसे ग्राहकों का विश्वास और काम का दायरा बढ़ता गया, घर में थोड़ी असुविधा महसूस होने लगी. इसके बाद उन्होंने अपने मकान के नीचे ही छोटी सी शॉप शुरू कर दी. वर्तमान में उनके साथ 16-17 महिलाएं काम कर रही हैं. इनमें 10 महिलाएं दुकान पर ही बैठकर सिलाई और अन्य कार्य संभालती हैं, जबकि 5-6 महिलाओं को घर पर ही फॉल, हैंडवर्क और फिनिशिंग का काम दिया जाता है.
लहंगा-चोली से लेकर भगवान के श्रृंगार तक के वस्त्रद्वारिका के बुटिक की विशेषता यह है कि यहाँ हर प्रकार के परिधान तैयार होते हैं. सूट, ब्लाउज, फैंसी ड्रेस, लहंगा-चोली के अलावा साड़ी फॉल और दुपट्टे का काम होता है. खास बात यह है कि उनके यहाँ भगवान के पूरे वस्त्र और मंदिर का विशेष श्रृंगार भी तैयार किया जाता है. ग्राहक मंदिर का फोटो या मूर्ति का साइज भेजते हैं, और वे उसके अनुरूप सटीक व सुंदर ड्रेसेस बना देती हैं.
दूर-दूर से आते हैं ग्राहकशहर में कोटा के विज्ञान नगर, महावीर नगर, सेंट पॉल व सेंट जॉन स्कूल की टीचर्स, तथा सीएफसीएल (CFCL) और रावतभाटा (आरईपीपी) जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से भी काम और ग्राहक पहुंचते हैं. घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए द्वारिका गौड़ आज अन्य महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत स्तंभ बन चुकी हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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September 15, 2026, 17:06 IST



