हार्ट का सबसे बड़ा दुश्मन कौन? कार्डियोलॉजिस्ट की बात से जान हिल जाएंगे आप, दिल के 5 सबसे बड़े विलेन को जानिए

Biggest Enemy of Heart: हार्ट हमारे शरीर का सबसे जरूर अंग है. दिल की धड़कन बंद होने के साथ ही जीवन की धड़कन भी खत्म हो जाती है. पर दिल पर आजकल संकटों की कोई कमी नहीं है. आधुनिक लाइफस्टाइल नित रोज हार्ट के लिए खतरों को बढ़ा ही रही है. यही कारण है कि देश में हर साल लगभग 30 लाख लोगों की मौत हार्ट डिजीज के कारण हो जाती है. वहीं हर साल 50 से 60 लाख नए लोग हार्ट डिजीज की चपेट में आ जाते हैं. वर्तमान में भारत में साढ़े 5 से 6 करोड़ लोग हार्ट संबंधी किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं. यह हमारे लिए बेहद चिंता की बात है. पर सवाल उठता है कि हार्ट डिजीज होती ही क्यों है. इसका कारण क्या है. क्या इसके लिए हमारा गलत खान-पान जिम्मेदार है या कुछ. आखिर हार्ट के लिए सबसे बड़ा दुश्मन कौन है. इन्हीं सब सवालों का जवाब जानने के लिए हमने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डिएक साइंस के मशहूर डॉक्टर नित्यानंद त्रिपाठी से बात की.
हार्ट का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि हार्ट को खराब करने के लिए कई चीजें एक साथ काम करती है लेकिन अगर इनमें सबसे बड़े दुश्मन की बात करें तो यह है स्मोकिंग. तंबाकू को किसी भी रूप में शरीर के अंदर घुसाते हैं तो यह हार्ट का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है. स्मोकिंग धमनियों में एंडोथेलियल डिसफंक्शन का कारण बन जाता है. दरअसल, जिस नली के माध्यम से हार्ट को खून पहुंचता है वह आर्टरीज या धमनी होती है. इस धमनी की दीवारें लचीली और मजबूत होती है लेकिन तंबाकू और सिगरेट के धुएं में मौजूद निकोटिन और जहरीले रसायन धमनियों की सबसे अंदरूनी और नाजुक परत एंडोथेलियम को खुरेच देता है. इन खुरेंची हुई जगह पर मोम जैसा चिपचिपा बैड कोलेस्ट्रॉल या फैट जमा होने लगता है. यहां कई रासायनिक प्रक्रियाओं के तहत फोम सेल्स बनने लगता है और इस कारण अंदर एक सख्त परत या पट्टिका (प्लाक) का निर्माण होने लगता है. जब यह फटता है तो हार्ट अटैक का कारण बन जाता है. भले ही धमनी में बड़ा प्लाक न बना हो, लेकिन स्मोकिंग के कारण धमनियों के काम करने की क्षमता बिगड़ जाती है. रासायनिक खिंचाव और सूजन के कारण खून की चिपचिपाहट बढ़ जाती है और एंडोथेलियम में दरारें आने लगती हैं. यही कारण है कि 25 से 40 वर्ष के युवाओं में, जिनकी धमनियों में पहले से कोई बड़ा ब्लॉकेज नहीं था, स्मोकिंग के कारण अचानक मैसिव हार्ट अटैक देखने को मिलता है. तंबाकू चाहे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या खैनी किसी भी रूप में हो, यह एंडोथेलियम को डैमेज करके ब्लड वैसल्स की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से तबाह कर देता है.
दूसरा दुश्मन क्या है
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि हार्ट को नुकसान पहुंचाने वाले कोई एक कारक नहीं होते. इसके लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं. स्मोकिंग निःसंदेह सबसे बड़ा दुश्मन है लेकिन इसके बाद आपका तनाव, चिंता, मोटापा, शुगर, बीपी, फैमिली हिस्ट्री, कोलेस्ट्रॉल, गलत खान-पान सब मिलकर काम करते हैं. स्मोकिंग के बाद स्ट्रैस हार्ट को नुकसान पहुंचाने के लिए बहुत बड़ा विलेन है. तनाव और मोटापा सीधे तौर पर शरीर के हार्मोनल और वैस्कुलर सिस्टम को बिगाड़कर दिल को नुकसान पहुंचाते हैं. अत्यधिक तनाव लेने से शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स बढ़ जाते हैं. इससे दिल की धड़कन तेज होती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. ऐसे में धमनियों की अंदरूनी परत एंडोथेलियम में सूजन पैदा होती है. फिर वही नुकसान होता है जो स्मोकिंग के कारण धमनियों का होता है. वहीं मोटापा, खासकर पेट और कमर के आसपास जमा फैट भी शरीर में मेटाबॉलिक सिंड्रोम, इंसुलिन रेजिस्टेंस और बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है. ये सब धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को तेज कर देता है. जब ये दोनों स्थिति एक साथ मिलती हैं तो हार्ट की मांसपेशियों को लगातार अधिक दबाव में काम करना पड़ता है, जिससे कम उम्र में भी हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और अचानक ब्लड क्लॉटिंग की समस्या आने लगती है.
शुगर की बीमारी तीसरा दुश्मन
डायबिटीज तेजी से हमारे देश के लोगों को ग्रसित करने लगा है. 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को डायबिटीज है. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि डायबिटीज भी हार्ट का बहुत बड़ा दुश्मन है. डायबिटीज के कारण खून में ग्लूकोज ज्यादा जमा होने लगता है. यह ग्लूकोज धमनियों की अंदरूनी परत यानी एंडोथेलियम को डैमेज कर देता है. इससे धमनियों में सूजन और फैट जमने लगता है जो एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को बढ़ा देता है. लगातार शुगर बढ़ी रहने से धमनियां सख्त और संकरी हो जाती हैं, जिससे हार्ट को खून पंप करने के लिए अतिरिक्त जोर लगाना पड़ता है. परिणामस्वरूप, हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक का जोखिम दो से चार गुना बढ़ जाता है. इसके अलावा, डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण मरीज को अक्सर साइलेंट हार्ट अटैक आने का गंभीर खतरा रहता है जिसमें सीने में दर्द भी नहीं होता.
चौथा बड़ा दुश्मन परिवार का जीन
अगर निकट परिवार यानी माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी में से किसी को भी हार्ट से संबंधित बीमारियां होती हैं तो उनके बच्चों को भी ये परेशानियां हो सकती है. इसलिए यदि परिवार में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज की हिस्ट्री है तो बच्चों में यह मुख्य रूप से आनुवंशिक म्यूटेशन और साझा जीवनशैली के माध्यम से स्थानांतरित होता है. यानी बच्चों में चला जाता है. कुछ जीन माता-पिता से बच्चों में आते हैं, जो लिवर में कोलेस्ट्रॉल के मेटाबॉलिज्म को बढ़ा सकते हैं. इससे कम उम्र में ही बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है. वहीं हाई बीपी, डायबिटीज भी बच्चों को विरासत में मिलती है जो उसी तरह से नुकसान पहुंचाता है.
शिथिल लाइफस्टाइल बहुत बड़ी बीमारी
यदि आप पूरा दिन बैठे रहते हैं. कुछ शारीरिक गतिविधियों वाला काम नहीं करते. थोड़ी भी एक्सरसाइज नहीं करते तो यह भी हार्ट का बहुत बड़ा दुश्मन है. बिना किसी मेहनत के बैठ-बैठे रहेंगे तो इससे आपकी स्टेमिना में भारी कमी हो जाएगी. स्टेमिना अगर नीचे चली जाए तो इसे दोबारा वापस लाने में बहुत मुश्किल होता है. इसे इस तरह से समझिए. दरअसल, हमें हमेशा एनर्जी की जरूरत होती है. कभी हमें भारी काम करना होता है, कभी आराम करना होता है. आराम करने में भी एनर्जी खर्च होती है लेकिन जब हम दौड़ने लगते हैं तो इसमें बहुत ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है. मतलब उस समय आपको ज्यादा ऑक्सीजन की भी जरूरत होगी. जिस व्यक्ति में स्टेमिना बना रहता है उसके शरीर में यह ऑक्सीजन रिजर्व रहता है जो हार्ट के माध्यम से ही बनता है. इसलिए जब वह दौड़ता है तो रिजर्व ऑक्सीजन से इसका खर्च कर आसानी से इसे पूरा कर लेते हैं लेकिन जो लोग मेहनत नहीं करते, उसमें स्टेमिना कम होने से ऑक्सीजन रिजर्व भी कम होने लगता है. इसलिए ऐसे व्यक्ति को दौड़ने में सांस फूलने लगता है, थोड़ी ही देर में आराम करने का मन करता है और जल्दी ही थक जाता है. यह सब हार्ट पर अतिरिक्त प्रेशर डालता है जो हार्ट की मांसपेशियों को क्षतिग्रस्त कर सकता है. स्टेमिना एक तरह से चार्ज बैटरी है. अगर बैटरी चार्ज रहेगी तो यह बेहतर तरीके से काम करेगी और नहीं रहेगी तो इसका काम बहुत धीमा होगा.
गलत खान-पान भी बड़ा विलेन
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि उपर के बड़े दुश्मन के साथ-साथ अगर आपका खान-पान खराब है तो यह हार्ट डिजीज के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. जंक फूड, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड ये सब हार्ट के लिए बहुत बड़ा विलेन है. ज्यादा नमक वाली चीजें पापड़, अचार, डिब्बाबंद सूप, नमकीन स्नैक्स, वनस्पति घी, डीप-फ्राइड फ़ूड, कचौड़ी, पकोड़े, रेड मीट,पाम ऑयल, बेकरी प्रोडक्ट्स, पेस्ट्री, कुकीज़, रिफाइंड, मैदा, सोडा, कोल्ड ड्रिक, मिठाई, मीठे पैकेज्ड जूस, सिगरेट, शराब आदि हार्ट के लिए बहुत बुरी चीज है.
हार्ट को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए 5 काम करें
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि यदि आपको अपने हार्ट को तंदुरुस्त रखना है तो सबसे पहला काम करें स्मोकिंग या तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन बंद करें. इसके बाद रोजाना एक्सरसाइज करें. चाहे थोड़ी ही करें लेकिन रोज करें, शरीर को फूर्तिला बनाएं. तीसरा अपनी डाइट पर ध्यान दें. जो उपर की चीजें हैं उसे न खाएं. इसकी जगह कुदरती चीजें खाएं. साबुत अनाज, सीड्स, ड्राई फ्रुट्स, हरी सब्जियां, ताजे फल आदि का सेवन करें. चौथा तनाव को कंट्रोल रखें. हमेशा खुश रहें और पांचवां शुगर, बीपी और मोटापे को कंट्रोल करें.



