रोटी के आटे को बनाना है ज्यादा हेल्दी? गेहूं के साथ 5 चीजें मिलाकर तैयार करें ये खास नौरंगी आटा, स्वाद भी रहेगा लाजवाब

How to Make Multigrain Flour: पहाड़ों में पहले घर की रसोई भी खेत से ही जुड़ी होती थी. घर में जो अनाज मिलता, उसे मिलाकर आटा तैयार कर लिया जाता था. इसी तरह तैयार होने वाला नौरंगी या सतरंगी आटा आज भी पहाड़ी इलाकों में काफी पसंद किया जाता है. इसमें सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि मंडुवा, जौ, ओगल, भट्ट और मक्का जैसे कई अनाज और दालें मिलाई जाती हैं. इससे रोटी का स्वाद भी अलग हो जाता है और आटे में कई तरह के पोषक तत्व भी जुड़ जाते हैं.
स्थानीय जानकार संतोषी देवी बताती हैं कि इस आटे की खासियत ही यही है कि इसमें एक नहीं, बल्कि कई तरह के अनाज और दालें मिलती हैं. घर पर करीब 5 किलो पहाड़ी स्टाइल मल्टीग्रेन आटा तैयार करना हो तो 2.5 किलो गेहूं, 1 किलो मंडुवा, 500 ग्राम ओगल या फापर, 500 ग्राम जौ, 250 ग्राम काला भट्ट या सोयाबीन और 250 ग्राम मक्का लिया जा सकता है.
हर अनाज का अपना अलग काम
इस मिश्रण में गेहूं आटे को बांधने में मदद करता है, जिससे इसकी रोटी आसानी से बन जाती है. मंडुवा यानी रागी पहाड़ी इलाकों का प्रमुख अनाज है और इसमें फाइबर व कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जौ भी फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है. वहीं ओगल या फापर आटे में अलग स्वाद और विविधता लाता है. काला भट्ट और सोयाबीन से इसमें प्रोटीन बढ़ाने में मदद मिलती है. मक्का आटे का स्वाद थोड़ा हल्का और अलग करता है.
घर पर ऐसे तैयार करें नौरंगी आटा
मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए सबसे पहले सभी अनाजों और दालों को अच्छी तरह साफ कर लें. इनमें अगर कंकड़, मिट्टी या दूसरी गंदगी हो तो उसे निकाल दें. इसके बाद अनाजों को पानी से धोकर अच्छी तरह धूप में सुखा लें. इस बात का ध्यान रखें कि अनाज में नमी न रह जाए, क्योंकि नमी रहने पर आटा जल्दी खराब हो सकता है.
काले भट्ट को हल्का भून सकते हैं. इससे उसका स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है, लेकिन इसे ज्यादा न भूनें. इसके बाद सभी अनाजों को अलग-अलग या एक साथ मिलाकर घराट या चक्की में पिसवा सकते हैं. अगर आपको बहुत बारीक आटा पसंद है तो इसे दोबारा छान लें. वहीं मोटा आटा पसंद करने वाले लोग इसे बिना ज्यादा छाने भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
आटे को ऐसे रखें, लंबे समय तक रहेगा ठीक
तैयार आटे को हमेशा साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखें. इसे नमी, सीधी धूप और कीड़ों से बचाकर रखना जरूरी है. सही तरीके से रखने पर आटे की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रह सकती है.
इस आटे से सिर्फ रोटी ही नहीं, बल्कि पराठे, हलवा और कई दूसरे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं. हालांकि, किसी भी तरह के खान-पान में बदलाव करते समय अपनी उम्र, स्वास्थ्य और शरीर की जरूरत का ध्यान रखना चाहिए. अगर किसी चीज से एलर्जी या कोई खास स्वास्थ्य समस्या है तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है.



