Mini Ramdevra Jalore | जालोर के मिजलिया नाड़ा

Last Updated:September 18, 2026, 09:55 IST
Jalore: जालोर के दूदवा गांव स्थित मिजलिया नाड़ा को ‘मिनी रामदेवरा’ कहा जाता है. भादवा दूज और दशमी पर यहां भारी मेला लगता है. मान्यता है कि 150 साल पहले बाबा रामदेवजी ने यहां रामाजी रेबारी को पर्चा दिया था. 20 साल पहले कई ट्यूबवेल फेल होने के बाद बाबा के नाम से खोदी गई ट्यूबवेल में मीठा पानी निकलने को लोग चमत्कार मानते हैं. दशमी के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. संकरे रास्तों के कारण ट्रैफिक की समस्या होती है, लेकिन भक्तों की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आती है.
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Jalore: राजस्थान के जालोर जिले में आस्था का एक ऐसा अनूठा केंद्र है, जिसे लोग मिनी रामदेवरा के नाम से जानते हैं. जालोर के सायला उपखंड में स्थित दूदवा गांव का मिजलिया नाड़ा बाबा रामदेवजी के भक्तों के लिए अपार श्रद्धा का प्रतीक बन चुका है. भादवा महीने की दूज और दशमी आते ही इस स्थान पर आस्था का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. कोई पैदल चलकर अपनी मन्नत पूरी करने आता है, तो कोई दंडवत प्रणाम करते हुए बाबा के दरबार में शीश नवाता है.
स्थानीय लोगों और बुजुर्गों के अनुसार मिजलिया नाड़ा की कहानी करीब डेढ़ सौ साल पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोक देवता बाबा रामदेवजी ने इसी स्थान पर एक जाळ के पेड़ के नीचे रामाजी रेबारी को साक्षात दर्शन देकर पर्चा (चमत्कार) दिया था. उस ऐतिहासिक घटना के बाद से ही इस जगह के प्रति लोगों की श्रद्धा और अटूट विश्वास लगातार बढ़ता चला गया. मिजलिया नाड़ा वही पवित्र जगह है, जहां आज भी उस चमत्कार की कहानियां स्थानीय लोगों की जुबान पर सुनी जा सकती हैं.
जब खारे पानी की जगह निकला मीठे पानी का चमत्कारमिजलिया नाड़ा की ख्याति सिर्फ बाबा के प्राचीन मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई चमत्कार भी भक्तों की आस्था को और गहरा करते हैं. ग्रामीणों के अनुसार करीब 20 साल पहले इस क्षेत्र में मीठे पानी की भारी किल्लत थी. पानी की तलाश में कई ट्यूबवेल खोदे गए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी और पानी नहीं मिला. अंततः ग्रामीणों ने बाबा रामदेवजी का नाम लेकर एक नई ट्यूबवेल की खुदाई शुरू की. सभी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब वहां से मीठा पानी फूट पड़ा. आज भी श्रद्धालु इस घटना को बाबा रामदेवजी की असीम कृपा और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं.
भादवा दूज और दशमी पर लगता है आस्था का महाकुंभभादवा महीने में बाबा रामदेवजी के मेले का विशेष महत्व होता है. स्थानीय श्रद्धालु चतराराम और डुंगराराम चौधरी बताते हैं कि दूदवा गांव में भादवे की दूज और दशमी को भारी मेला भरता है. इन विशेष दिनों में मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और लंबी कतारें नजर आने लगती हैं. दशमी के दिन अलसुबह से ही भक्तों का रेला मिजलिया नाड़ा की तरफ उमड़ पड़ता है. सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत यहां पूरी होती है, यही विश्वास भक्तों को यहां खींच लाता है.
संकरे रास्तों से परेशानी, लेकिन नहीं डिगती श्रद्धालुओं की आस्थादशमी के अवसर पर उमड़ने वाली इस भारी भीड़ के बीच कुछ स्थानीय समस्याएं भी सामने आती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क काफी संकरी है. वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण अक्सर यहां लंबी कतारें और जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे पैदल आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. हालांकि, स्थानीय युवा और ग्रामीण पूरी तत्परता के साथ व्यवस्थाओं को संभालने में सहयोग करते हैं, ताकि बाबा के भक्तों को कम से कम असुविधा हो. भक्तों की यह अटूट आस्था ही है जो तमाम शारीरिक कष्टों और रास्तों की दुश्वारियों के बावजूद उन्हें बाबा के दरबार तक खींच लाती है. मिजलिया नाड़ा में बजते भजनों की धुन और बाबा रामदेवजी के जयकारे पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं. आसपास के कई गांवों जैसे सायला, जीवाणा, और बागोड़ा से भी लोग टोलियां बनाकर यहां पहुंचते हैं. मेले के दौरान मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाता है. कुल मिलाकर मिजलिया नाड़ा मारवाड़ और जालोर के लोगों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का एक जीवंत केंद्र बन चुका है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
September 18, 2026, 09:55 IST



