बच्चा खेलते-खेलते अचानक गिर जाए तो ये सिर्फ कमजोरी नहीं, हो सकती है इस गंंभीर बीमारी की वजह

फरीदाबाद: परिवार में अगर किसी सदस्य की कम उम्र में हृदय संबंधी बीमारी या अचानक मौत हुई है, तो बच्चों की सेहत को लेकर सावधान रहना जरूरी है. कई बार कुछ हृदय बीमारियां आनुवंशिक होती हैं और बच्चा बाहर से बिल्कुल स्वस्थ नजर आने के बावजूद इनके लक्षण नहीं दिखते. ऐसे में समय पर जांच काफी अहम हो सकती है. खासकर खेलते समय बेहोशी, सीने में दर्द या अचानक तेज धड़कन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सवाल है कि बच्चे की जांच कब कराएं और ECG के साथ इको जरूरी है या नहीं. Local18 से बातचीत में फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और बाल एवं वयस्क जन्मजात हृदय सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. आशीष कटेवा ने बच्चों के हृदय स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर विस्तार से जानकारी दी.
तीन पीढ़ियों की मेडिकल हिस्ट्री से सामने आ सकती है बीमारी
परिवार में कम उम्र में हृदय मृत्यु हो, तो बच्चे की जांच कब कराएं. इस पर डॉक्टर आशीष बताते हैं कि यह बहुत ही गंभीर सवाल है. अक्सर हम सुनते हैं कि बच्चा बिल्कुल ठीक था और अचानक उसकी मौत हो गई. ऐसा अगर किसी भी परिवार में होता है, तो उसकी जांच करनी चाहिए. हो सकता है कि कोई जेनेटिक डिसऑर्डर हो, जो परिवार में चल रहा हो. कम से कम तीन पीढ़ियों की हिस्ट्री की जांच करनी चाहिए. कुछ हार्ट जेनेटिक बीमारियां ऐसी होती हैं, जो छोटे बच्चों या किशोरों में अचानक कार्डियक डेथ का कारण बन सकती हैं. इनमें अचानक मौत हो सकती है.
तैरते या खेलते समय अचानक बेहोशी भी हो सकती है हृदय की वजह
डॉ. आशीष बताते हैं कि ऐसा भी हमने सुना है कि बच्चा तैर रहा था और अचानक डूब गया. इसका मतलब यह नहीं है कि उसको तैरना नहीं आता था. हो सकता है कि उस समय हृदय में कोई डिस्टर्बेंस हुई हो. इसकी वजह से वह बेहोश हो गया हो और पानी में डूब गया हो. ऐसा भी सुनने में आता है कि कभी-कभी बच्चा अचानक बिना किसी एक्सीडेंट के कहीं गिर गया. हो सकता है कि उस समय हृदय में कोई डिस्टर्बेंस हुई हो और उसे बेहोशी आई हो. इसकी वजह से दिमाग में खून नहीं पहुंचा और बच्चा गिर गया हो. अगर ऐसी कोई घटना होती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इसकी वजह हृदय संबंधी समस्या तो नहीं है.
मिर्गी जैसे लक्षणों के पीछे भी हो सकता है कार्डियक कारण
कई बार हम सुनते हैं कि बच्चों को मिर्गी का दौरा आ गया. न्यूरोलॉजिकल एग्जामिनेशन किया जाता है, तो सब नॉर्मल होता है. MRI भी नॉर्मल आता है. ऐसे बच्चों को मिर्गी के लिए कई सारी दवाइयां भी चलती रहती हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं है कि इसकी वजह न्यूरोलॉजिकल हो. हो सकता है कि कोई कार्डियक कारण हो, जिसकी वजह से हृदय में डिस्टर्बेंस हुई हो. दिमाग में खून नहीं पहुंचा हो या दिमाग में ऑक्सीजन नहीं गई हो. इसकी वजह से मिर्गी जैसा प्रेजेंटेशन सामने आया हो. ऐसी चीजों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर परिवार में ऐसी घटना हुई है, तो बच्चों की स्क्रीनिंग के साथ माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच करनी चाहिए.
कोरोनरी आर्टरी की असामान्य स्थिति से बढ़ सकता है खतरा
डॉ. आशीष बताते हैं कि इसके अलावा कुछ ऐसी समस्याएं होती हैं, जो हृदय को खून की सप्लाई करती हैं. अगर उनकी पोजीशन सामान्य नहीं है, तो उसकी वजह से हृदय को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. खासकर जब हम एक्सरसाइज कर रहे होते हैं, तब समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है. कोरोनरी आर्टरीज की कुछ पोजीशन ऐसी होती हैं, जिनमें दो बड़ी नसों के बीच से गुजरने वाली कोरोनरी आर्टरी दब सकती है. इसकी वजह से हृदय में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और कार्डियक अरेस्ट हो सकता है.
खेलते समय बेहोशी और सीने में दर्द को समझें खतरे का संकेत
खेलते समय बेहोशी, सीने में दर्द और तेज धड़कन कब खतरे के संकेत हैं. इस पर डॉक्टर आशीष बताते हैं कि जी, यह बिल्कुल खतरे के संकेत हैं. इनकी जांच जरूर करनी चाहिए. फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन एक ECG होगा. इसके बाद एक जांच होती है, जिसे होल्टर मॉनिटरिंग कहते हैं. इसमें 24 घंटे तक ECG की बेसिक मॉनिटरिंग होती है. इसमें यह देखा जाता है कि हृदय की धड़कन में किसी तरह की डिस्टर्बेंस तो नहीं आ रही है. इसके बाद इको करना है. इको से हमें पता चलेगा कि हार्ट का फंक्शन कैसा है.
बच्चा सामान्य दिखे, फिर भी हो सकती है गंभीर हार्ट बीमारी
कई बार ऐसा होता है कि हार्ट का फंक्शन बहुत कम हो जाता है, लेकिन बच्चा लगभग सामान्य जैसा ही दिखाई देता है. जांच के बाद पता चल सकता है कि उसे डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी जैसी बीमारी है. डॉ. आशीष बताते हैं कि ऐसे ही कई बार हृदय की मांसपेशियां बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं. इसकी वजह से हृदय बहुत ज्यादा ताकत से कॉन्ट्रैक्ट करता है, लेकिन आगे खून भेज पाने में असमर्थ हो जाता है. इस बीमारी को हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है. यह बीमारी भी सडन कार्डियक डेथ का कारण बन सकती है.
एथलीट बच्चों में अचानक गिरने पर भी कराएं हृदय की जांच
डॉ. आशीष बताते हैं कई बार ऑटोप्सी के बाद पता चलता है कि उसे यह बीमारी थी. हम सुनते हैं कि बच्चा बहुत अच्छा एथलीट था या बहुत अच्छा स्पोर्ट्समैन था, लेकिन खेलते-खेलते वह प्लेग्राउंड में गिर गया या बेहोश हो गया. कई बार उसकी मौत भी हो जाती है. ऐसे मामलों में हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी जैसी बीमारी हो सकती है. अगर परिवार में ऐसी डेथ हुई है, तो उसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
समय पर स्क्रीनिंग से कम हो सकता है अचानक मौत का खतरा
डॉ. आशीष बताते हैं कि कई सारी बीमारियां अनुवांशिक यानी जेनेटिक होती हैं. इसलिए परिवार की कम से कम तीन पीढ़ियों का मेडिकल हिस्ट्री देखना चाहिए. यह पता करना चाहिए कि परिवार में पहले किसी की कम उम्र में अचानक मौत तो नहीं हुई थी. माता-पिता के साथ भाई-बहन और परिवार के दूसरे सदस्यों का भी इवैल्यूएशन किया जाना चाहिए. अगर समय रहते बीमारी का पता चल जाए, तो उसका इलाज और मैनेजमेंट किया जा सकता है. सही समय पर बीमारी की पहचान होने से सडन कार्डियक डेथ के खतरे को कम किया जा सकता है.



