रूस में संसद तक कैसे पहुंचते हैं नेता, स्टेट ड्यूमा क्या है? पुतिन, कम्युनिस्ट, विपक्षी दलों में सीटों का गणित

Russia Election Explained: रूस में इस समय चुनाव हो रहे हैं. यूक्रेन के खिलाफ जंग के बीच यह पहला संसदीय चुनाव है. शुक्रवार से लेकर रविवार तक ये चुनाव हो रहे हैं. चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब रूस की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है. वहीं यूक्रेन की ओर से रूस के अग्रिम मोर्चे से दूर तेल रिफाइनरियों और गोदामों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए जा रहे हैं. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का जीतना तय नजर आ रहा है. उनका सपॉर्ट करने वाली सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदन में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है. रूसी अधिकारी चुनाव को जनता को अपनी राय जाहिर करने का मौका बता रहे हैं, जबकि सरकार के आलोचकों का कहना है कि विपक्ष की सीमित मौजूदगी की वजह से नतीजे काफी हद तक पहले से ही तय दिखाई दे रहे हैं. आखिर ये चुनाव कैसे होता है और इसकी क्या प्रक्रिया है?
कैसे होता है रूस का संसदीय चुनाव?रूसी नागरिक स्टेट ड्यूमा यानी कि संसद के निचले सदन के सदस्यों के लिए मतदान कर रहे हैं. इसके साथ कई इलाकों में लोकल लेवल पर चुनाव भी हो रहे हैं. 11 क्षेत्रों में गवर्नर और 39 क्षेत्रों में स्थानीय विधानसभाओं के सदस्य चुने जा रहे हैं. मतदान 3 दिनों तक कराया जा रहा है. करीब 11.1 करोड़ मतदाता ही वोटिंग के योग्य हैं. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है. ड्यूमा की कुल 450 सीटों में आधी सीटें पार्टी लिस्ट के जरिए और बाकी आधी सीटें निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे मुकाबले से तय होती हैं.
यूनाइटेड रशिया क्या है?यूनाइटेड रशिया का गठन 2001 में क्रेमलिन समर्थक दलों के विलय से हुआ था. पार्टी ने पुतिन का समर्थन किया है और लंबे समय से संसद में प्रमुख ताकत बनी हुई है. 2021 के चुनाव में पार्टी ने ड्यूमा की दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीती थीं. इस बार भी उसके मजबूत स्थिति में रहने की उम्मीद जताई जा रही है.
पार्टी की सूची में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं. खास बात ये है कि वार रिपोर्टर येवगेनी पोद्दुबनी भी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जो यूक्रेनी ड्रोन हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे. यूनाइटेड रशिया के सदस्यों ने यूक्रेन में युद्ध की कोशिश और पुतिन के इरादों का समर्थन करने का इरादा जाहिर किया है.
कौन-कौन सी दूसरी पार्टियां मैदान में हैं?यूनाइटेड रशिया के अलावा कई ऐसी पार्टियां चुनाव में हैं जिनका जिक्र सिस्टम के अंदर के विपक्ष के तौर पर किया गया है. ये पार्टियां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के साथ मतदान करती रही हैं. याब्लोको पार्टी ही रूस की एकमात्र रजिस्टर्ड पार्टी थी जो खुले तौर पर जंग का विरोध करती थी.
हालांकि अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसे पार्टी-लिस्ट चुनाव से हटा दिया गया. अदालत ने अन्य वजहों के साथ उसके युद्ध-विरोधी रुख को रूस की क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की मांग के ही समान माना. याब्लोको के कुछ कैंडिडेट अब सिंगल सीट निर्वाचन के इलाकों से चुनाव लड़ रहे हैं.
कम्युनिस्ट पार्टी 1990 के दशक से रूसी संसद की प्रमुख पार्टियों में रही है. इसके लंबे समय से नेता गेन्नाडी ज्यूगानोव हैं. पार्टी सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना करती रही है, लेकिन पुतिन की सीधे आलोचना से बचती रही है और यूक्रेन में युद्ध का समर्थन करती है. लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDPR) भी लंबे समय से संसद में मौजूद है.
छोटी पार्टियों की क्या भूमिका है?A Just Russia करीब दो दशक से रूसी राजनीति में सक्रिय है. यह सोशल-डेमोक्रेटिक पार्टी है और यूक्रेन में युद्ध का समर्थन करती है.
2021 के पिछले संसदीय चुनाव से कुछ समय पहले New People Party बनी थी. इसने खुद को युवा मतदाताओं और टेक्नोक्रेट ग्रुप की उदार आवाज के रूप में पेश किया था. 2021 में इसे 5 प्रतिशत से थोड़ा अधिक वोट मिले थे, जिससे इसे संसद में छोटा गुट बनाने का मौका मिला.
स्टेट ड्यूमा में सीटों के लिए होड़ करने वाली अन्य पार्टियों में मुख्य तौर पर ‘कम्युनिस्ट्स ऑफ रूस’, ‘पार्टी ऑफ पेंशनर्स’, ‘ग्रीन पार्टी’, ‘पार्टी ऑफ डायरेक्ट डेमोक्रेसी’, ‘मदरलैंड पार्टी’ शामिल हैं.
क्रेमलिन के लिए चुनाव क्यों अहम है?इन चुनावों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक पुतिन ने चुनाव को युद्ध के समर्थन से जोड़ा है. अगस्त में यूनाइटेड रशिया के पार्टी सम्मेलन में पुतिन ने पार्टी से यूक्रेन युद्ध में जीत के लिए सब कुछ करने की बात कही थी.
पिछले चुनावों में क्या हुआ?साल 2000 में पुतिन के सत्ता में आने के बाद से यूनाइटेड रशिया ने ड्यूमा का हर एक चुनाव जीता है, आमतौर पर बड़े अंतर से. हालांकि कई चुनावों के नतीजों पर विवाद हुआ है. 2011 में वोटों में हेरफेर के आरोप लगे, जिसके बाद पुतिन के शासनकाल के सबसे बड़े सड़क प्रदर्शनों में से एक हुआ था.



