बिश्केक में भारत की धाक, SCO घोषणापत्र में माना हर प्रस्ताव, आतंक के खिलाफ बना चक्रव्यूह

Last Updated:September 01, 2026, 17:18 IST
एससीओ यानी शंघाई सहयोग संगठन के बिश्केक घोषणा-पत्र में भारत की कई अहम प्राथमिकताओं को जगह मिली है. घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए कहा गया है. भारत ने साफ किया है कि आतंकवाद के किसी भी रूप को सहन नहीं किया जा सकता.
बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में इस बार भारत का डंका जोर-शोर से बजा है. यहां पेश किये साझा घोषणा-पत्र में भारत की कूटनीतिक सोच को प्रमुखता से शामिल किया गया है. इसमें आतंकवाद पर भारत के सख्त रुख को भी पूरे वैश्विक मंच ने एक सुर में स्वीकार किया.
आतंकवाद को नहीं किया जाएगा सहन
सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मिलकर मुकाबला करने में साथ देने की बात दोहराई है. इसके साथ ही आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी संगठनों का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिशों को भी सहन न करने की बात कही गई.
शंघाई सहयोग संगठन के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर बिना नाम लिए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है. किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने साफ लहज़े में चेतावनी दी कि आतंकवाद को सरकारी नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह बयान इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान जल्द ही अगले एक साल के लिए SCO की अध्यक्षता संभालने जा रहा है.
आतंकवाद के खिलाफ दोहरा मापदंड नहीं
भारत के लिए सबसे अहम बात यह रही कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड नहीं अपनाने की बात कही गई. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की गई. इसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है.
घोषणा-पत्र में भारत की विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जुड़ी पहलों को भी जगह मिली. युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और एससीओ यंग साइंटिस्ट्स फोरम को नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया गया. यह फोरम भारत की पहल है.
घोषणा-पत्र में दिखा और बड़ा बदलाव
इतना ही नहीं, 2026 में भारत में होने वाले एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम का भी नेताओं ने स्वागत किया. युवाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी. इस दौरान भारत की पहल एससीओ यंग ऑथर्स कॉन्फ्रेंस के योगदान की बात भी सामने रखी गई थी. घोषणा-पत्र में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. एससीओ चार्टर में संशोधन कर अंग्रेजी को संगठन की आधिकारिक और कार्यकारी भाषा बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई.
यानी बिश्केक से जारी इस घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख, तकनीक और युवाओं को बढ़ावा देने वाली उसकी पहल और अंग्रेजी भाषा को लेकर उसकी प्राथमिकता तीनों की साफ झलक दिखाई दी.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
मैं इस समय App टीम का हिस्सा हूं. App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…
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September 01, 2026, 17:13 IST



