शतावरी आयुर्वेद में महिलाओं के पाचन, कमजोरी के लिए उपयोगी औषधीय पौधा, दूध बढ़ाने के लिए भी होता है प्रयोग, जानें

Last Updated:September 20, 2026, 14:46 IST
शतावरी एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से आयुर्वेद में किया जाता रहा है. इसे खास तौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए उपयोगी माना जाता है. इसके अलावा शतावरी की जड़ों का इस्तेमाल पाचन और शरीर की कमजोरी जैसी समस्याओं में भी पारंपरिक रूप से किया जाता है. आयुर्वेद में शतावरी को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना जाता है. इसका उपयोग स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध बढ़ाने के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है. हालांकि, किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
शतावरी एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से आयुर्वेद में किया जाता रहा है. इसे खास तौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए उपयोगी माना जाता है. इसके अलावा शतावरी की जड़ों का इस्तेमाल पाचन और शरीर की कमजोरी जैसी समस्याओं में भी पारंपरिक रूप से किया जाता है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि शतावरी का पौधा बेल की तरह बढ़ता है. इसकी जड़ें जमीन के अंदर गुच्छे के रूप में होती हैं और इन्हीं जड़ों का औषधीय उपयोग ज्यादा किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग इसे औषधीय पौधे के रूप में उगाते भी हैं.
महिलाओं के लिए उपयोगी मानी जाती है. आयुर्वेद में शतावरी को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना जाता है. इसका उपयोग स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध बढ़ाने के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है. हालांकि, किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
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पाचन में भी किया जाता है इस्तेमाल: शतावरी की जड़ का इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार में पाचन से जुड़ी परेशानियों के लिए भी किया जाता है. इसे शरीर को पोषण देने वाली जड़ी-बूटी के तौर पर भी जाना जाता है.
शरीर की कमजोरी में भी उपयोग: आयुर्वेद में शतावरी को शरीर को ताकत और पोषण देने वाली औषधि माना जाता है. इसके कारण कई लोग इसका इस्तेमाल कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं में करते हैं. हालांकि, इसके फायदे व्यक्ति की स्थिति और सेवन के तरीके पर निर्भर कर सकते हैं.
कैसे दिखता है शतावरी का पौधा: शतावरी का पौधा हरे रंग का और बेलनुमा होता है. इसकी शाखाओं पर बारीक पत्तियां दिखाई देती हैं. पौधे की सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी जड़ होती है. अच्छी मिट्टी और उचित देखभाल में इसकी जड़ों का विकास बेहतर होता है.
खेती से भी किसानों को मिल सकता है फायदा: औषधीय पौधों की मांग बढ़ने के कारण किसान शतावरी की खेती की ओर भी ध्यान दे रहे हैं. इसकी खेती शुरू करने से पहले किसानों को मिट्टी, जलवायु, बाजार और बिक्री की व्यवस्था की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. औषधीय फसल में खरीदार और बाजार की जानकारी होना बहुत जरूरी है.
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September 20, 2026, 14:46 IST



