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यहां मिलता है ‘पुत्रजीवक’ पौधा, संतान प्राप्ति और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में रामबाण, आयुर्वेद में बताए गए इसके कई उपयोग

Last Updated:September 20, 2026, 10:35 IST

रीवा की वन विभाग की उद्यानिकी में मौजूद ‘पुत्रजीवक’ पौधा अपने औषधीय गुणों और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के कारण चर्चा में है. आयुर्वेद में इसके बीज और अन्य हिस्सों के विभिन्न औषधीय उपयोग बताए गए हैं. हालांकि, संतान प्राप्ति या बांझपन के इलाज में इसकी प्रभावशीलता के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में औषधीय पौधों की विविधता के बीच, रीवा में वन विभाग की उद्यानिकी में मौजूद ‘पुत्रजीवक’ पौधा इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. आयुर्वेदिक परंपरा में इस पौधे का उल्लेख प्रजनन स्वास्थ्य सहित कई उपयोगों के संदर्भ में मिलता है. हालांकि, संतान प्राप्ति में इसकी प्रभावशीलता को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. अनुसंधान विस्तार वृत्त रीवा के वनरक्षक उपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुत्रजीवक एक औषधीय पौधा है, जिसका आयुर्वेद में लंबे समय से उल्लेख मिलता है. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में इसके बीज और अन्य हिस्सों का उपयोग अलग-अलग औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता रहा है.

पुत्रजीवक को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी प्रजनन क्षमता से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं की वजह से होती है. आयुर्वेदिक परंपरा में इसके बीजों का उपयोग संतान प्राप्ति और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कुछ उपचारों में किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसी वजह से इसे कई जगह ‘पुत्रजीवक’ नाम से जाना जाता है. हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी औषधीय पौधे को बांझपन या गर्भधारण की समस्या का इलाज मानकर स्वयं सेवन करना उचित नहीं है. गर्भधारण में परेशानी होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ से चिकित्सकीय जांच और सलाह लेना जरूरी है.

अन्य औषधीय उपयोगपुत्रजीवक का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं बताया जाता. इसके विभिन्न हिस्सों के उपयोग का उल्लेख महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, शारीरिक कमजोरी और कुछ सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े पारंपरिक उपचारों में मिलता है. सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं में भी इसके इस्तेमाल की बात कही जाती है. इस पौधे को लेकर कई पारंपरिक दावे प्रचलित हैं, लेकिन हर दावे को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से प्रमाणित मानना सही नहीं होगा. खासतौर पर गर्भधारण या हार्मोन से जुड़ी समस्या में बिना चिकित्सकीय सलाह इसके सेवन से बचना चाहिए.

किसानों के लिए अवसररीवा में वन विभाग की नर्सरी से औषधीय पौधों में रुचि रखने वाले लोगों और किसानों को पुत्रजीवक का पौधा ₹47 में उपलब्ध है. किसान इसकी खेती भी कर सकते हैं.

About the AuthorMohd Majid

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Sidhi,Madhya Pradesh

First Published :

September 20, 2026, 10:35 IST

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