यहां स्थापित नहीं हुआ था शिवलिंग, स्वयंभू प्रकट होने की है मान्यता, भूतों के वास की वजह से कहलाए भूतेश्वर महादेव

Last Updated:September 20, 2026, 22:53 IST
Anothe Mandir: इस मंदिर का प्राचीन नाम भूतेश्वर महादेव मंदिर हुआ करता था. मंदिर का यह नाम पास में बने पुराने श्मशान घाट की वजह से पड़ा था. स्थानीय भक्तों की मान्यता हैं कि रात को यहां भूतों का वास होने से हम भक्त यहां रात के समय नहीं आते थे.
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सिरोही : राजस्थान के आबू राज में अरावली की वादियों में कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जिनका अनोखा इतिहास रहा है. इन्हीं में से एक मंदिर है ओमनी का प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर. इस मंदिर को वर्तमान में कर्णिकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है, लेकिन इस मंदिर का प्राचीन नाम भूतेश्वर महादेव मंदिर हुआ करता था. मंदिर का यह नाम पास में बने पुराने श्मशान घाट की वजह से पड़ा था. स्थानीय भक्तों की मान्यता हैं कि रात को यहां भूतों का वास होने से हम भक्त यहां रात के समय नहीं आते थे.
स्थानीय भक्त निखिल कुमार ने बताया कि वर्तमान के कर्णिकेश्वर महादेव मंदिर को पुराने समय में भूतेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता था. आज भी मंदिर के मुख्य द्वार पर इसका प्राचीन नाम भूतेश्वर महादेव लिखा हुआ है. वैसे तो मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है लेकिन वर्तमान मंदिर करीब 700 से 800 वर्ष पुराना बताया जाता है. समय-समय पर इस मंदिर का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार करवाया जाता रहा है.
मंदिर में वन्यजीवों की आवाजाहीइस मंदिर के सामने ही प्राचीन बावड़ी और कुछ छोटे मंदिर बने हैं, जो रखरखाव के अभाव में झाड़ियां से घिरे हुए हैं. रात के समय में यहां वन्य जीवों की आवाज आई भी रहती है क्योंकि आसपास का पूरा क्षेत्र जंगल का इलाका है. कई बार मंदिर परिसर में भालू घूमने की घटनाएं देखने को मिली है. वही लंगूर समेत अन्य जानवर दिन में भी नजर आ जाते हैं. मंदिर के पास ही प्रसिद्ध ऋषिकेश मंदिर और सनका महादेव मंदिर है. यह स्थान जुना अखाड़ा के साधुओं की तपस्या भूमि भी रही है.
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहासमंदिर के पुजारी ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना हैं. महाभारत काल में जब पाण्डवों ने अज्ञातवास में यहां विश्राम किया था. तब यहां शिवलिंग की स्थापना की गई थी. मंदिर के गर्भ गृह में मने प्राचीन प्रतिमाओं के साथ स्वयंभू शिवलिंग की पूजा होती है. वहीं मुख्य मंदिर के पास ही बने एक छोटे मंदिर में प्राकृतिक शिवलिंग आज भी विराजमान है. श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर यहां कई भक्त दूरदराज से दर्शन करने आते हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Sirohi,Rajasthan
First Published :
September 20, 2026, 22:53 IST



