लद्दाख की बर्फीली सरहदों तक पहुंची जोधपुर की बेटी, 3750 जवानों की कलाई पर बांधा रक्षासूत्र

Last Updated:September 21, 2026, 15:09 IST
Parvati Jangid Suthar: जोधपुर की बेटी और ‘युवा संसद, भारत’ की चेयरपर्सन कर्नल (मानद) पार्वती जांगिड़ सुथार ने 21 दिनों में लद्दाख के दुर्गम सीमांत इलाकों की 3100 किलोमीटर यात्रा पूरी की. इस दौरान उन्होंने 3750 से अधिक जवानों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधे और 71 सैन्य यूनिट्स व फॉर्मेशन्स को सम्मानित किया. सियाचिन से रेजांग ला और कारगिल तक पहुंची इस यात्रा में उन्होंने देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के प्रति सम्मान और अपनत्व का संदेश दिया.
जोधपुर की बेटी और ‘युवा संसद, भारत’ की चेयरपर्सन कर्नल (मानद) पार्वती जांगिड़ सुथार ने लद्दाख के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण सीमांत इलाकों में 3100 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के प्रति सम्मान और अपनत्व का संदेश दिया. 21 दिनों तक चली इस यात्रा में उन्होंने करीब 3750 जवानों की कलाई पर स्वयं तैयार किए गए रक्षासूत्र बांधे. साथ ही 71 सैन्य फॉर्मेशन्स एवं यूनिट्स को सम्मानित किया.
सुरक्षित सीमा-समर्थ भारत, 35वीं भारत रक्षा पर्व यात्रा-2026” की शुरुआत 28 अगस्त को दिल्ली में हुई. इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि को रक्षासूत्र बांधकर यात्रा का शुभारंभ किया गया. इसके बाद पार्वती जांगिड़ ने लद्दाख के अलग-अलग सीमांत क्षेत्रों का दौरा किया और सेना, आईटीबीपी तथा बीआरओ के जवानों से मुलाकात की. 21 दिनों के इस सफर का समापन ऐतिहासिक कारगिल वॉर मेमोरियल, द्रास में अमर बलिदानियों को पुष्पचक्र अर्पित करने के साथ हुआ.
यात्रा का सबसे भावुक पड़ाव 16,420 फीट की ऊंचाई पर स्थित रेजांग ला युद्ध स्मारक रहा. यही वह रणभूमि है जहां 18 नवंबर 1962 को 13 कुमाऊं की चार्ली कंपनी के जवानों ने चीनी सेना के खिलाफ अदम्य साहस के साथ युद्ध लड़ा था. कंपनी कमांडर मेजर शैतान सिंह, परमवीर चक्र सहित अनेक वीरों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. जोधपुर के वीर सपूत मेजर शैतान सिंह की शहादत स्थली पर पहुंचकर पार्वती ने पुष्पचक्र अर्पित किया और रणभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया.
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पार्वती जांगिड़ सुथार ने दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन युद्धक्षेत्रों में शामिल सियाचिन ग्लेशियर के बेस कैंप और अग्रिम मोर्चों तक पहुंचकर सैनिकों के साथ रक्षाबंधन मनाया. अत्यंत विषम मौसम और बर्फीले वातावरण के बीच तैनात ‘सियाचिन वॉरियर्स’ से मुलाकात कर उन्होंने जवानों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा. इस दौरान ग्लेशियर के रक्षक माने जाने वाले ‘ओपी बाबा’ के देवस्थल पर भी उन्होंने श्रद्धा से शीश नवाया. उन्होंने देश की सीमाओं पर तैनात हर सैनिक की लंबी उम्र, सुरक्षित सेवा और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की.
लद्दाख के ऐतिहासिक बाल्टिस्तान क्षेत्र में पार्वती जांगिड़ तुरतुक, थांग, त्याक्षी और चालुंका जैसे सीमावर्ती गांवों तक भी पहुंचीं. वर्ष 1971 के युद्ध में भारतीय सेना के पराक्रम से जुड़े इन क्षेत्रों में उन्होंने लद्दाख स्काउट्स और मेजर चेवांग रिनचेन के साहस को नमन किया. गिलगित-बाल्टिस्तान के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाने जाने वाले ‘जीरो आरडी’ पोस्ट तक पहुंचकर उन्होंने वहां तैनात जवानों को अपने हाथों से रक्षासूत्र बांधे.
21 दिनों की यात्रा के दौरान पार्वती जांगिड़ ने 3,750 से अधिक जवानों को रक्षासूत्र बांधकर उनके प्रति देशवासियों का सम्मान और विश्वास प्रकट किया. इसके साथ ही 71 सैन्य यूनिट्स और फॉर्मेशन्स को उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा एवं सामरिक योगदान के लिए ‘युवा संसद, भारत’ की ओर से यूनिट प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए. 99 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को दीर्घकालिक सेवा, रणनीतिक योगदान और नेतृत्व के लिए ‘राष्ट्रीय योद्धा सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया.
सीमांत क्षेत्रों में पार्वती जांगिड़ के इस अभियान को सेना, आईटीबीपी और बीआरओ के अधिकारियों एवं जवानों की ओर से सराहना मिली. अलग-अलग स्थानों पर सैन्य कमांडरों ने उनके प्रयासों को सम्मान देते हुए विशेष प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हजारों किलोमीटर का सफर तय कर जवानों तक पहुंचना इस अभियान की विशेष पहचान बना. अंत में कारगिल वॉर मेमोरियल, द्रास में अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर यात्रा का समापन हुआ. जोधपुर की बेटी का यह अभियान सीमाओं पर डटे जवानों के प्रति सम्मान दिखाता है.
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September 21, 2026, 15:09 IST



