हाथ से लिखना या टाइपिंग? दिमाग तेज और स्वस्थ रखने के लिए क्या फायदेमंद, खुद डॉक्टर से जानें…

Last Updated:September 22, 2026, 15:06 IST
टेक्नोलॉजी के दौर में हम हाथ से लिखना भूल गए हैं. हाथ से लिखना दिमाग के कई हिस्सों को सक्रिय करता है, जिससे सीखने और याद रखने की क्षमता बढ़ती है. यह फोकस और विचारों को व्यक्त करने में मदद करता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है.
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टाइपिंग के मुकाबले हाथ से लिखना फायदेमंद है.
Writing Vs Typing: आज के दौर में फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. मैसेज से लेकर नोट्स और ऑफिस के काम तक, ज्यादातर चीजें अब टाइप करके ही की जाती हैं. इसका असर हमारी लिखने की आदत पर भी पड़ा है और हाथ से लिखना धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. लेकिन क्या हाथ से लिखना सिर्फ एक पुरानी आदत है, या इसका हमारे दिमाग पर भी असर पड़ता है? रिसर्च में सामने आया है कि हैंडराइटिंग के दौरान दिमाग के कई हिस्सों के बीच ज्यादा कनेक्टिविटी देखने को मिलती है और यह सीखने व याद रखने की प्रक्रिया में मदद कर सकती है.
तो आखिर हाथ से लिखना कितना जरूरी है, इसके क्या फायदे हैं और टाइपिंग के मुकाबले लिखने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और रिसर्च, आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में…
फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी’ में छपी एक रिसर्च के मुताबिक टाइपिंग के मुकाबले हाथ से लिखते वक्त आंख, हाथ और दिमाग एक साथ एक्टिव होते हैं, जिससे दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में कनेक्टिविटी बढ़ जाती है. साइकोलोजिस्ट संदीप वोरा (Sandeep Vohra) ने कहा कि जब हम लिखते हैं तो इससे दिमाग की कनेक्टिविटी और एकाग्रता बेहतर होती है. इससे व्यक्ति अपने विचारों को बेहतर तरीके से व्यक्त कर पाता है. लिखने की प्रक्रिया में हमारी सोच और हाथों की मूवमेंट के बीच अच्छा तालमेल बनता है, जिससे ब्रेन को बेहतर कोऑर्डिनेशन मिलता है. यह पूरी प्रक्रिया दिमाग के लिए एक तरह की एक्सरसाइज है. जब आप लिखने जैसी कोई गतिविधि करते हैं, तो उसका असर ज्यादा और लंबे समय तक रहता है. अगर कोई व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को लिखता है, तो वह खुद का विश्लेषण भी आसानी से कर पाता है. यह समझने में मदद मिलती है कि हमारे लिए क्या जरूरी है, किस चीज को प्राथमिकता देनी चाहिए और किसे नहीं. इसलिए लिखना मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.
हेल्थ एक्सपर्ट समीर भाटी ने कहा कि हाथ से लिखने से हमारा दिमाग एक्टिव रहता है. इसके पीछे वैज्ञानिक वजह यह है कि जब हम हाथ से लिखते हैं तो हमारा हाथ और दिमाग एक साथ काम करता है. इससे हमारी मसल मेमोरी भी बेहतर होती है. उन्होंने कहा कि फोन या कंप्यूटर पर टाइप करने के मुकाबले हाथ से लिखने की प्रक्रिया अलग होती है. आज के समय में लोग तकनीक पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं, जिसकी वजह से ‘डिजिटल डिमेंशिया’ जैसे शब्द भी चर्चा में हैं. समीर भाटी के मुताबिक, हाथ से लिखना दिमाग के लिए एक तरह की एक्सरसाइज है.
इससे हमारा कॉग्निटिव फंक्शन एक्टिव रहता है और हम ज्यादा बेहतर तरीके से फोकस कर पाते हैं. उन्होंने कहा कि पेन और पेपर से लिखते समय हमारा दिमाग चीजों से ज्यादा गहराई से जुड़ता है और बेहतर तरीके से सीखने और समझने में मदद मिलती है.
About the AuthorVividha SinghSub Editor
विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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September 22, 2026, 15:06 IST



