किसानों का खुला ऐलान, ‘मांगें नहीं मानी तो दोहरा देंगे घड़साना का 2004 वाला आंदोलन’

Last Updated:September 23, 2026, 16:54 IST
Anupgarh Kisan Aandolan : अनूपगढ़ में चल रहा किसानों का आंदोलन अब उग्र होने लग गया है. सोमवार और मंगलवार को हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार को खुली चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई साल 2004 में रावला में हुए किसान आंदोलन को रिपीट कर दिया जाएगा. किसानों ने अपनी मांगे सरकार के सामने रखते हुए कहा कि अब गेंद उसके पाले में है. वह सोच समझकर फैसला करें अन्यथा बड़े और उग्र आंदोलन के लिए तैयार रहे. कल यानी गुरुवार को पूरे इलाके में चक्का जाम का ऐलान किया जा चुका है. किसान आंदोलन के समर्थन में आज व्यापारियों ने रावला कस्बा और 365 हेड के बाजार पूरी तरह बंद रखे.
श्रीगंगानगर. इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के प्रथम चरण में सिंचाई के पानी की भारी किल्लत और खरीफ फसलों के खराबे को लेकर भड़का किसानों का आक्रोश शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. अब किसानों ने खुली चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे 2004 में हुए घड़साना जैसा आंदोलन दोहराने से पीछे नहीं हटेंगे. किसान नेताओं ने कहा कि किसान अब केवल आश्वासनों की घुट्टी पीने वाले नहीं हैं. वे आर पार का फैसला चाहते हैं. अब गेंद सरकार के पाले में है वह सोचे कि उसे क्या करना है? किसान आंदोलन के समर्थन में आज रावला कस्बा और 365 हेड के बाजार पूरी तरह बंद रहे. किसानों ने 24 सितंबर को इलाके में चक्का जाम का ऐलान किया है.
किसानों ने सोमवार को सुबह 10 बजे से लेकर रात लगभग 12 बजे तक सभा की. इस दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण भी हो गया. किसानों की मांग के अनुसार सिंचाई विभाग के चीफ को वार्ता के लिए बुलाया गया. लेकिन यह वार्ता बेनतीजा रही. उसके बाद मंगलवार को भी अतिरिक्त जिला कलक्टर (एडीएम) कार्यालय अनूपगढ़ के सामने अनिश्चितकालीन महापड़ाव लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा. सोमवार की देर रात दोनों एडीएम, स्थानीय एसडीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ हुई लंबी वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद मंगलवार को हालात संभालने के लिए स्वयं जिला कलक्टर अमित यादव और पुलिस अधीक्षक हरी शंकर मौके पर पहुंचे. अनूपगढ़ में किसानों का पड़ाव आज तीसरे दिन मंगलवार को भी जारी है.
प्रशासन के सामने चार सूत्रीय मांग पत्र पर रखी दो-टूक बातजिला कलक्टर अमित यादव के साथ हुई वार्ता में किसानों की ओर से अगुवाई कर रहे प्रमुख किसान नेता श्योपत मेघवाल और उनके साथी प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने चार सूत्रीय मांग पत्र पर दो-टूक बात रखी. उनकी पहली मांग नहरों को चार में से दो समूह में चलाने का लिखित आदेश जारी करने की थी. दूसरी प्रमुख मांग सावनी (खरीफ) फसल की बर्बादी के लिए सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने अथवा उनका स्थानांतरण करने की रही. इसके अलावा किसानों ने पानी की कमी के चलते सूख चुकी फसलों का प्रारंभिक आकलन कर तुरंत उचित मुआवजा, फसल बीमा क्लेम का भुगतान सुनिश्चित करने और अनूपगढ़ शाखा प्रणाली के स्थाई समाधान की मांग पुरजोर तरीके से उठाई.
मांगें नहीं मानी तो उग्र होगा आंदोलन
वार्ता कक्ष से बाहर निकले किसान नेता श्योपत मेघवाल के तेवर बेहद तल्ख नजर आए. उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी की हठधर्मिता और गलत रेगुलेशन की वजह से प्रथम चरण के हजारों किसानों की खून-पसीने से सींची सावनी फसलें बर्बाद हो गई. मेघवाल ने कहा कि ऐतिहासिक अजमेर जल समझौते के तहत प्रथम चरण के लिए 58 फीसदी पानी आरक्षित है. लेकिन विभाग किसानों के हिस्से का पानी छीनकर मनमानी कर रहा है. बांधों के पानी के झूठे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कलक्टर ने मांगें ऊपर भेजने का आश्वासन दिया है. लेकिन किसान अब केवल आश्वासनों की घुट्टी पीने वाले नहीं हैं.
किसान किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगेमेघवाल ने राज्य सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते किसानों के हक में लिखित रेगुलेशन और जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई का फैसला नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन उग्र रूप अख्तियार करेगा. उन्होंने कहा कि किसान 2004 के ऐतिहासिक घड़साना-रावला किसान आंदोलन और 2021 के लंबे चक्का जाम के संघर्ष को दोहराने से पीछे नहीं हटेंगे. आने वाले दिनों में पूरे प्रथम चरण क्षेत्र में प्रशासन ठप कर दिया जाएगा. वार्ता विफल होने के तुरंत बाद पड़ाव स्थल पर जुटे किसानों ने बैठक की. उसमें पूरे प्रथम चरण के क्षेत्र को आंदोलन को एक साथ विस्तार देने और बड़े स्तर पर जाम लगाने की रणनीति तैयारी की गई.
जिला कलक्टर बोले किसानों को राहत देने के सभी प्रयास किए जा रहे हैंवार्ता के बाद जिला कलक्टर अमित यादव ने बताया कि घड़साना में पिछले 13 दिनों से चल रहे धरने और अनूपगढ़ में एडीएम दफ्तर के बाहर तीन दिन से चल रहे किसानों के महापड़ाव को ध्यान में रखते हुए किसान संगठनों से विस्तार से बिंदुवार चर्चा की गई है. कलक्टर ने कहा कि किसानों की मांगों में से फसल खराबे से जुड़ा काम लगभग पूरा किया जा चुका है. इसकी रिपोर्ट तुरंत राज्य स्तर पर भेजी जा रही है ताकि किसानों को राहत मिल सके. नहरों के रेगुलेशन और जल बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि बीबीएमबी की बैठक के बाद जल परामर्शदात्री समिति जिसमें सभी जनप्रतिनिधि शामिल होते हैं उनके स्तर पर निर्णय लिया जाता है. जैसे ही जल आवंटन की स्थिति स्पष्ट होगी इस समिति की बैठक शीघ्र बुलाई जाएगी.
विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जा रही हैमुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को हटाने और उन्हें जल परामर्शदात्री समिति से बाहर रखने की किसानों की मांग पर जिला कलक्टर ने साफ किया कि यह नीतिगत निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. लिहाजा किसानों की भावनाओं और इस बिंदु की विस्तृत रिपोर्ट उच्च स्तर (राज्य सरकार) को भेजी जा रही है. बीमा क्लेम में सर्वे की विसंगतियों पर उन्होंने कहा कि कंपनी, राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें नियमानुसार काम करती हैं. किसी भी किसान को आपत्ति होने पर समीक्षा कमेटी में अपील का पूरा अधिकार है.
About the Authorसंदीप राठौड़
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…
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Ganganagar,Ganganagar,Rajasthan
First Published :
September 23, 2026, 16:53 IST


