करौली में मूकबधिर युवा बोले- हमें भी चाहिए बराबरी का अधिकार; प्रशासन को इशारों में बताई दर्दभरी पीड़ा

करौली. हमारी आवाज खामोश है, लेकिन हमारे हाथ के संकेत बोलते हैं. हमारे इशारों को समझने वाला कोई हो तो हम भी अपनी बात कह सकते हैं. कुछ इसी दर्द और उम्मीद के साथ करौली जिले के करीब 40 मूकबधिर युवा अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के मौके पर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे. उनके पास अपनी बात कहने के लिए आवाज नहीं थी, लेकिन हाथों के इशारे उनकी पूरी पीड़ा बयां कर रहे थे.
जिलेभर से आए इन युवाओं ने शांतिपूर्ण रैली निकाली. रैली के दौरान वे आम लोगों को भी सांकेतिक भाषा सीखने और मूकबधिर लोगों के साथ संवाद करने का संदेश देते नजर आए. सबसे भावुक करने वाला दृश्य तब रहा, जब सड़क से गुजर रहे लोगों ने इन युवाओं को इशारों में अपनी बात कहते देखा. बहुत से लोग उनकी भाषा समझ नहीं पाए, लेकिन उनकी खामोशी और चेहरे के भाव देखकर एक पल के लिए कदम जरूर ठहर गए.
इशारों के जरिए प्रशासन तक पहुंचाई अपनी बात
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के मौके पर मूकबधिर रवि गुप्ता, राहुल गुर्जर, कालू मीणा सहित सभी युवाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को अपनी समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन सौंपा. ISL जानने वाली एक्सपर्ट सरिता मीणा और इंटरप्रेटर भावना सोनवाल की मदद से इन युवाओं ने प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई. करौली एसडीएम राकेश कुमार रावत ने भी इंटरप्रेटर के माध्यम से उनकी समस्याओं को समझा और जहां तक संभव होगा, समाधान का आश्वासन दिया.
ज्ञापन में रखीं 8 प्रमुख मांगेंमूकबधिर युवाओं ने ज्ञापन में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, न्याय और रोजगार तक कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं. उन्होंने कहा कि बधिर विद्यार्थियों को ISL जानने वाले शिक्षक और सुलभ पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराई जाए. शिक्षकों को भी सांकेतिक भाषा सिखाई जाए या स्कूलों में योग्य ISL इंटरप्रेटर की व्यवस्था हो. उन्होंने सरकारी अस्पतालों में बधिर मरीजों के लिए ISL इंटरप्रेटर उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि वे डॉक्टरों को अपनी परेशानी आसानी से बता सकें और इलाज को समझ सकें. इसी तरह पुलिस थानों और अदालतों में भी बधिर लोगों से बातचीत के लिए इंटरप्रेटर उपलब्ध कराने की मांग की गई. ज्ञापन में सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सेवाओं की महत्वपूर्ण जानकारी सांकेतिक भाषा में उपलब्ध कराने, रोजगार, नौकरी, प्रशिक्षण और पदोन्नति में समान अवसर देने की मांग भी की गई. इसके अलावा परिवार और समाज से बधिरता को अज्ञानता नहीं समझने और ISL सीखकर बधिर लोगों से संवाद करने की अपील की गई. आपातकालीन घोषणाओं और जरूरी सूचनाओं को भी ISL के माध्यम से सुलभ बनाने की मांग रखी गई.
इशारों में दिया बराबरी का संदेशइन सभी युवाओं का प्रशासन, सरकार और आम लोगों से साफ संदेश था – आवाज नहीं है, इसका मतलब यह नहीं कि हमारे सपने या अधिकार नहीं हैं. हमें सिर्फ इतना चाहिए कि समाज हमारे इशारों को समझे और हमें भी शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोजगार में बराबरी का अवसर मिले.



