Rajasthan

Agriculture: प्लास्टिक मल्चिंग पर सरकार देगी 50% अनुदान, बीकानेर में 70 हेक्टेयर लक्ष्य, जानें कैसे लें योजना का लाभ

होमताजा खबरकृषि

प्लास्टिक मल्चिंग पर सरकार देगी 50% अनुदान, जानें कैसे लें योजना का लाभ

Last Updated:September 25, 2026, 09:21 IST

Rajasthan Plastic Mulching Scheme: खेतों में पानी की बचत और उद्यानिकी फसलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए बीकानेर में प्लास्टिक मल्चिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. योजना के तहत किसानों को मल्च शीट की लागत पर 50 प्रतिशत सहायता मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 20 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तय की गई है. एक हेक्टेयर के लिए 40 हजार रुपए या अनुबंधित फर्म की निर्धारित दर, दोनों में से जो कम होगी, उसके आधार पर सहायता की गणना होगी. अनुसूचित क्षेत्रों में इकाई लागत की 15 प्रतिशत अतिरिक्त सीमा निर्धारित है. बीकानेर में 70 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है. किसानों को विभाग से अनुबंधित फर्मों की मल्च शीट का इस्तेमाल करना होगा. योजना में पहले लाभ नहीं लेने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी. इच्छुक किसान राज किसान पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और पात्रता व दस्तावेजों की जानकारी के लिए स्थानीय कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैंप्लास्टिक मल्चिंग पर सरकार देगी 50% अनुदान, जानें कैसे लें योजना का लाभZoom बीकानेर में प्लास्टिक मल्चिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है.

बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर जिले के किसानों के लिए उद्यानिकी फसलों से जुड़ी अच्छी खबर है. खेतों में प्लास्टिक मल्चिंग अपनाने पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत तक लाभ मिलेगा. इस योजना का उद्देश्य खेतों में खरपतवार पर नियंत्रण, पानी का बेहतर उपयोग और फसल की गुणवत्ता में सुधार करना है. उद्यान विभाग की ओर से जिले में कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है.

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक मल्च के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके तहत किसानों को प्लास्टिक मल्च की लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 20 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रोरेटा बेसिस पर इसका लाभ दिया जा सकता है.

पहले लाभ नहीं लेने वाले किसानों को प्राथमिकता

मुकेश गहलोत ने बताया कि योजना का लाभ देने में उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें पहले इस योजना का लाभ नहीं मिला है. वहीं वर्ष 2025-26 में इस योजना का लाभ ले चुके किसान इस बार इसके लिए पात्र नहीं होंगे. विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाना है, ताकि उद्यानिकी फसलों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ सके.

40 हजार रुपए तक की लागत के आधार पर मिलेगा लाभ

किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए उद्यान विभाग द्वारा अनुबंधित फर्मों से प्लास्टिक मल्च शीट का उपयोग करना होगा. प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल की गई मल्च शीट की लागत 40 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर या अनुबंधित फर्म की निर्धारित दर, दोनों में से जो भी कम होगी, उसके आधार पर 50 प्रतिशत राशि उपलब्ध कराई जाएगी. अनुसूचित क्षेत्रों के मामले में मल्च शीट की इकाई लागत में 15 प्रतिशत की अतिरिक्त सीमा निर्धारित की गई है. इससे पात्र किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजना का लाभ मिल सकेगा.

70 हेक्टेयर में प्लास्टिक मल्चिंग लगाने का लक्ष्य

उपनिदेशक उद्यान अनुसंधान एटीसी प्रेमाराम ने बताया कि बीकानेर जिले में कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्लास्टिक मल्चिंग का लाभ दिया जाना है. इसमें 50 हेक्टेयर क्षेत्र सामान्य किसानों के लिए और 20 हेक्टेयर क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए निर्धारित किया गया है. प्लास्टिक मल्चिंग के इस्तेमाल से खेत में खरपतवार की समस्या को कम करने में मदद मिलती है. साथ ही मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने से सिंचाई के पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है. उद्यानिकी फसलों में इसका इस्तेमाल उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने में भी उपयोगी माना जाता है.

राज किसान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं

योजना का लाभ लेने के इच्छुक पात्र किसान राज किसान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. विभाग की ओर से पात्र किसानों से ऑनलाइन पत्रावलियां आमंत्रित की गई हैं. किसानों को आवेदन से पहले योजना की पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेने की सलाह दी गई है. इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के सहायक कृषि अधिकारी या स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक उद्यान से संपर्क कर सकते हैं. विभाग का कहना है कि योजना के माध्यम से जिले में किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग जैसी तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे पानी के कुशल उपयोग के साथ उद्यानिकी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

और पढ़ेंLocation :

Bikaner,Rajasthan

First Published :

September 25, 2026, 09:21 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj