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जोधपुर में बारिश न होने से सूखी खरीफ फसलें, किसानों ने की गिरदावरी की मांग
Last Updated:September 25, 2026, 08:41 IST
Jodhpur Agriculture News: राजस्थान के जोधपुर और मारवाड़ क्षेत्र में मानसून की बेरुखी से किसानों पर अकाल का संकट मंडराने लगा है. बारिश न होने से खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूखकर बर्बाद हो रही हैं. बिजाई, खाद और जुताई में अपनी जमा पूंजी गंवाने के बाद किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. इसके अलावा पशुओं के लिए चारे और ग्रामीण इलाकों में पेयजल का संकट भी गहरा सकता है. ग्रामीणों ने सरकार से तुरंत विशेष सर्वे कराकर गिरदावरी करने और फसल बीमा का मुआवजा जल्द से जल्द प्रदान करने की मांग की है.
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Jodhpur: मारवाड़ के कई जिलों में इस बार मानसून की बेरुखी ने किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. राजस्थान के जोधपुर जिले समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें अब पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. बारिश के इंतजार में किसान लगातार आसमान की ओर निहार रहे हैं, लेकिन इंद्रदेव की मेहरबानी न होने से खेतों में हरियाली की जगह सूखी और मुरझाई हुई फसलें ही नजर आ रही हैं. फसल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होने से ग्रामीण इलाकों में किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट पैदा होने लगा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस बार खेतों में लगाई गई लागत भी वापस निकलना मुश्किल हो जाएगा.
खेती-किसानी में आई इस आपदा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है. स्थानीय किसान पबाराम और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि खरीफ सीजन की शुरुआत में उन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ तैयारी की थी. खेतों की जुताई से लेकर महंगे बीज खरीदने, खाद डालने, बिजाई करने और निंदाई-गुड़ाई तक में उन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगा दी. मजदूरी और कृषि उपकरणों पर लगातार भारी खर्च करने के बाद अब जब फसल पकने और फलने-फूलने का समय आया, तो बारिश की कमी ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है. कई क्षेत्रों में फसलें समय से पहले ही सूखकर पूरी तरह जल चुकी हैं, जबकि कुछ जगहों पर पौधों का विकास पूरी तरह रुक गया है. इस वजह से किसानों को इस बार भारी पैदावार घाटा सहना पड़ सकता है.
चारे और पेयजल का संकट गहराने की आशंकामानसून की बेरुखी का असर केवल खेती और फसलों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. इसका सीधा असर पशुपालन और ग्रामीण पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है. खेतों में फसलें सूखने के कारण पशुओं के लिए हरे और सूखे चारे की उपलब्धता शून्य के बराबर रह गई है. मारवाड़ का ग्रामीण क्षेत्र मुख्य रूप से पशुपालन पर भी निर्भर करता है, ऐसे में पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है. इसके अलावा, बारिश न होने से भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में गांवों में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है. अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो ग्रामीणों को पीने के पानी और पशुओं के चारे के लिए दर-दर भटकना पड़ सकता है.
गिरदावरी करवाकर राहत देने की मांगफसलों के जलने और लगातार बढ़ते नुकसान को देखते हुए जोधपुर के किसानों और ग्रामीणों ने राज्य सरकार व जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीमों का गठन कर फसल नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और जल्द से जल्द गिरदावरी की रिपोर्ट तैयार की जाए. समय रहते खेतों में हुए वास्तविक नुकसान का सही आंकलन होने से पात्र किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और सरकारी राहत कोष का लाभ मिल सकेगा. इसके साथ ही किसानों ने मांग की है कि प्रभावित गांवों में प्रशासन द्वारा अकाल राहत कार्य तुरंत प्रभाव से शुरू किए जाएं, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तबाह होने से बचाया जा सके.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 25, 2026, 08:41 IST



